इसके बाद केंद्र द्वारा प्रस्ताव को दूसरे बैकग्राउंड इनपुट के साथ रिव्यू किया जाता है, फिर इसे भारत के चीफ जस्टिस को भेजा जाता है, जो सिफारिश को फाइनल करने से पहले सुप्रीम कोर्ट के दो सबसे सीनियर जजों से सलाह लेते हैं। सलाह के बाद, चीफ जस्टिस चार हफ्ते में केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री को अपनी सिफारिश भेजते हैं।