
Kerala High Court
केरल हाईकोर्ट ने कहा कि सामान बेचने में यदि बच्चे अपने माता-पिता की मदद करते है तो उसे बाल श्रम नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने दिल्ली के दो बच्चों को रिहा करने का आदेश दिया, जिन्हें यह आरोप लगाते हुए आश्रय गृह भेजा गया था कि उन्हें अपने माता-पिता के साथ सड़कों पर सामान बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है। नवंबर 2022 में दो बच्चों को पुलिस ने यह आरोप लगाते हुए पकड़ा कि उन्हें सड़कों पर सामान बेचकर बाल श्रम के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसके बाद बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया और आश्रय गृह भेज दिया गया।
बच्चों के माता-पिता के लिए रिट याचिका दायर की गई थी जिसमें बच्चों को उनकी हिरासत में छोड़ने का निर्देश देने की मांग की गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति वी जी अरुण ने कहा कि, मुझे यह समझ में नहीं आ रहा है कि कलम और अन्य छोटे सामान बेचने में बच्चों की अपने माता-पिता की मदद करने की गतिविधि बाल श्रम की श्रेणी में कैसे आएगी। इसमें कोई संदेह नहीं है कि बच्चों को अपने माता-पिता के साथ सड़कों पर घूमने की अनुमति देने के बजाय शिक्षित किया जाना चाहिए। मुझे आश्चर्य है कि बच्चों को उचित शिक्षा कैसे प्रदान की जा सकती है जबकि उनके माता-पिता खानाबदोश जीवन जी रहे हैं। फिर भी पुलिस या सीडब्ल्यूसी बच्चों को हिरासत में नहीं ले सकती और उन्हें उनके माता-पिता से दूर नहीं रख सकती है। गरीब होना अपराध नहीं है।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष ने न्यायालय के समक्ष अपने एक बयान में कहा कि पुलिस ने दो बच्चों को मरीन ड्राइव इलाके में पेन और अन्य सामान बेचते हुए पाया था। चूंकि ऐसी गतिविधि बाल श्रम की श्रेणी में आती है, इसलिए बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष ले जाया गया। किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम 2015 की धारा 2(14) (i)(ii) के अनुसार बच्चों को देखभाल और सुरक्षा की आवश्यकता वाले बच्चों की श्रेणी में आने का पता चलने पर समिति ने आदेश दिया बच्चों को शेल्टर होम (5वां उत्तरदाता) की देखरेख और संरक्षण में रखा जाएगा। यह कहा गया कि उनके लाभ और समग्र विकास के लिए, बच्चों को अपनी संस्कृति में रहना चाहिए और बढ़ना चाहिए। बाल कल्याण समिति ने 23.12.2022 को अधिनियम की धारा 95 के तहत बच्चों को पुनर्वास के लिए सीडब्ल्यूसी, नई दिल्ली भेजने का आदेश दिया।
अदालत ने याचिकाकर्ताओं और सरकारी वकील द्वारा उठाए गए तर्कों पर विचार करने के बाद कहा कि पुलिस या सीडब्ल्यूसी बच्चों को हिरासत में नहीं ले सकती है और उन्हें उनके माता-पिता से दूर नहीं रख सकती है। इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने यह भी वचन दिया कि वे बच्चों को सामान बेचने के लिए स्टीयर पर नहीं चढ़ने देंगे और वे बच्चों को शिक्षित करने के उपाय करेंगे।
Published on:
09 Jan 2023 10:56 am
बड़ी खबरें
View Allबिहार चुनाव
राष्ट्रीय
ट्रेंडिंग
