
Supreme Court (Photo - ANI)
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार को संभवत: पहली बार एक अहम केस में अपने और देश की न्यायपालिका के मुखिया प्रधान न्यायाधीश सीजेआई (Chief Justice Of India - CJI) को परोक्ष रूप से 'हितबद्ध पक्षकार' मान लिया और मुकदमा दूसरी बेंच में लगाने को कहा। केंद्रीय चुनाव आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों (ईसी) की नियुक्ति और सेवा शर्तों संबंधी कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने खुद को सुनवाई से अलग (रिक्यूज़) कर लिया और कहा कि इस मामले को ऐसी बेंच सुने जिसमें भावी सीजेआई भी न हो।
जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वीएम पंचौली के साथ बेंच की अगुवाई कर रहे सीजेआई सूर्यकांत ने इस मामले में हिताें के टकराव की आशंका व्यक्त की। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि यह मामला दूसरी बेंच को सौंपना चाहिए। इस पर सीजेआई ने कहा कि उनके विचार से इसे ऐसी बेंच को भेजना सबसे अच्छा होगा जिसमें भावी चीफ जस्टिस भी नहीं हों, इससे कोई कुछ भी नहीं कह पाएगा। उन्होंने कहा कि बेंच के दूसरे जज जस्टिस बागची और जस्टिस पंचौली भी सीजेआई बनने की कतार में हैं। बेंच ने यह मुकदमा नई गठित होने वाली बेंच में 7 अप्रैल को रखने को कहा।
दरअसल चुनाव आयोग में सीईसी और ईसी की सरकार की ओर से नियुक्तियों पर सवाल उठाते हुए दायर की गई एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2023 में एक फैसला दिया था। इसमें कहा गया था कि जब तक इस संबंध में संसद द्वारा कानून नहीं बन जाता, नियुक्तियों के लिए चयन समिति में प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और सीजेआई शामिल होंगे। फैसले के कुछ माह बाद दिसंबर 2023 में केंद्र सरकार की ओर से संसद में पारित कानून में चयन समिति में सीजेआई को शामिल नहीं किया गया। विपक्ष ने सीजेआई को चयन प्रक्रिया से हटाने की आलोचना की और याचिकाकर्ताओं ने इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इस लिहाज से याचिका का प्रमुख मुद्दा चयन समिति में सीजेआई को रखने या न रखने का है। संभवत: इसीलिए सीजेआई सूर्यकांत ने इसे हितों के टकराव (हितबद्ध पक्षकार) मानते हुए खुद को सुनवाई से अलग किया।
Updated on:
21 Mar 2026 06:34 am
Published on:
21 Mar 2026 06:34 am
