
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश (photo - Jairam Ramesh/X)
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर, कांग्रेस ने गुरुवार को महात्मा गांधी के एक निजी सहयोगी की पुस्तक का हवाला देते हुए दावा किया कि महात्मा गांधी ने संघ को 'तानाशाही प्रवृत्ति वाला सांप्रदायिक संगठन' बताया था।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, "प्यारेलाल महात्मा गांधी के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक थे। वे लगभग तीन दशकों तक गांधीजी के निजी स्टाफ़ का हिस्सा रहे। 1942 में महादेव देसाई की मृत्यु के बाद वे महात्मा गांधी के सचिव बने।"
उन्होंने कहा, "महात्मा गांधी पर प्यारेलाल की किताबें आज मानक संदर्भ ग्रंथ मानी जाती हैं। 1956 में उन्होंने ‘महात्मा गांधी: द लास्ट फेज’ का पहला खंड प्रकाशित किया, जिसे अहमदाबाद की नवजीवन पब्लिशिंग हाउस ने प्रकाशित किया था। इसमें तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने लंबी भूमिका लिखी और उपराष्ट्रपति डॉ. एस. राधाकृष्णन ने भी इसकी सराहना की। दो साल बाद इसका दूसरा खंड प्रकाशित हुआ।"
रमेश ने कहा, "दूसरे खंड के पृष्ठ 440 पर प्यारेलाल ने महात्मा गांधी और उनके एक सहयोगी के बीच हुई बातचीत का उल्लेख किया है। इस बातचीत में राष्ट्रपिता ने आरएसएस को "सर्वसत्तावादी दृष्टिकोण वाला एक सांप्रदायिक संगठन" बताया है। यह बातचीत 12 सितंबर 1947 को हुई थी। पाँच महीने बाद, गृह मंत्री सरदार पटेल ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगा दिया।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 1 अक्टूबर को संघ की राष्ट्र निर्माण में भूमिका की सराहना करने के बाद, कांग्रेस ने उन्हें याद दिलाया कि सरदार पटेल ने कहा था कि संघ की गतिविधियों ने ऐसा माहौल पैदा किया, जिसने महात्मा गांधी की हत्या का रास्ता तैयार किया।
बुधवार, को एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए रमेश ने लिखा, "प्रधानमंत्री ने आज सुबह RSS की बहुत प्रशंसा की। क्या उन्हें यह भी पता है कि सरदार पटेल ने 18 जुलाई 1948 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को क्या लिखा था?” कांग्रेस नेता ने सरदार पटेल द्वारा श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लिखे गए पत्र के कुछ अंश साझा किए।
Updated on:
02 Oct 2025 12:13 pm
Published on:
02 Oct 2025 11:45 am
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