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’11 बजे रात को पीएम मोदी के ऑफिस से फोन आया…’, एक देश-एक चुनाव की कमेटी पर कांग्रेस नेता अधीर रंजन का खुलासा

One Nation One Election Adhir Ranjan Chaudhary: एक देश-एक चुनाव की कमेटी में शामिल होने से इनकार करने के बाद कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी का पक्ष सामने आया है।

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PM call to adhir

PM call to adhir

One Nation One Election Adhir Ranjan Chaudhary: पक्ष- विपक्ष के बीच 'एक देश-एक चुनाव' के मुद्दे पर राजनीतिक खींचतान जारी है। मोदी सरकार तेजी से इस ओर कदम बढ़ा रही है, इसे लेकर हर दूसरे दिन कोई नया अपडेट आ रहा है तो विपक्षी गठबंधन द्वारा एकसुर में इसे असंवैधानिक बताया जा रहा है। मोदी सरकार ने 'एक देश एक चुनाव' पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है, जिसमें 8 लोग शामिल हैं। इसमें शामिल होने के लिए प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी को न्योता दिया गया था लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। अब अधीर रंजन ने बताया कि कैसे देर रात 11:00 बजे उनके पास प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से कॉल आया था और इस कमेटी में शामिल होने के लिए कहा गया था।

अधीर क्या बोले

आज समाचार एजेंसी एएनआई के बातचीत करते हुए कांग्रेस नेता अधीर रंजन ने बताया, "एक देश-एक चुनाव की कमिटी की जानकारी देने के लिए 31 अगस्त को रात 11 बजे पीएम मोदी के प्रिंसिपल सेक्रेटरी पीके मिश्र का फोन आया था तो मैंने कहा, कागजात देखने के बाद मैं अपनी राय बताऊंगा।" अधीर ने आगे कहा, किसी मंत्री या किसी बड़े नेता ने नहीं एक बाबू ने मुझे फोन किया था। अपने बात की सत्यता को साबित करने के लिए उन्होंने कहा अगर मेरी बातों पर विश्वास नहीं है तो पेगासस से जांच कर लीजिए तब पता चल जाएगा हमारी क्या बात हुई? जरूरत पड़े तो जेल भेज दो।

इस समिति में किसका-किसका नाम

इस समिति में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी, गुलाम नबी आज़ाद, एनके सिंह, सुभाष कश्यप, हरीश साल्वे और संजय कोठारी शामिल हैं। नितेन चंद्र इसमें सचिव की भूमिका में होंगे। इसके अलावा समिति की बैठक में न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल विशेष रूप से मौजूद रहेंगे।

पीएम मोदी इसके पक्ष में क्यों

राज्यसभा में चर्चा के दौरान पीएम ने कहा था 'सीधे कह देना कि हम इसके पक्षधर नहीं हैं। आप इस पर चर्चा तो करिए भाई, आपके विचार होंगे। हम चीजों को स्थगित क्यों करते हैं। मैं मानता हूं जितने भी बड़े-बड़े नेता हैं, उन्होंने कहा है कि यार इस बीमारी से मुक्त होना चाहिए। पांच साल में एक बार चुनाव हों, महीना-दो महीना चुनाव का उत्सव चले। उसके बाद फिर काम में लग जाएं। ये बात सबने बताई है। सार्वजनिक रूप से स्टैंड लेने में दिक्कत होती होगी।'

सीधे-सीधे शब्दों में कहें तो पीएम मोदी का 'एक देश-एक चुनाव' करवाने के पीछे तर्क यह है कि इससे न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि देश का संसाधन भी बचेगा। देश के जवान को आधे से ज्यादा समय चुनाव करवाने में लगे रहते हैं, जिस कारण एक जगह से दूसरे जगह जाते रहते हैं, इसमें जो बड़ी राशि खर्च होती है। उस पर भी लगाम लगेगा।

ऐसे में बीजेपी का तर्क है कि यदि इन चुनावों को एक साथ करवाया जाता है तो पैसे और समय की बचत होगी, जिसे देश के विकास में लगाया जा सकेगा। पीएम मोदी लंबे समय से एक साथ चुनाव करवाने के पक्षधर रहे हैं। कुछ साल पहले उन्होंने इसको लेकर सर्वदलीय बैठक भी बुलाई थी। लेकिन राय अलग होने के कारण इस बैठक से कोई निष्कर्ष नहीं निकला था।


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