
नई दिल्ली। राज्यसभा सांसद और इंफोसिस फाउंडेशन की अध्यक्ष सुधा मूर्ति सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल हो रही हैं। उन्होंने एक पोस्ट में रक्षाबंधन की उत्पत्ति को मुगल बादशाह हुमायूं और रानी कर्णावती से जुड़ी एक कहानी से जोड़ा था। इस पोस्ट के बाद लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। उन्होंने एक्स (ट्वीटर) पर एक वीडियो संदेश में रक्षाबंधन के इतिहास को शेयर किया। उन्होंने कहा कि त्योहार की परंपरा को 16 वीं शताब्दी में रानी कर्णावती द्वारा हुमायूं को राखी भेजने से जोड़ा जा सकता है। वीडियो के साथ अपने पोस्ट को कैप्शन देते हुए, मूर्ति ने लिखा, 'रक्षाबंधन का इतिहास बहुत समृद्ध है।
जीवन में भाई-बहन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इसका पुराना इतिहास है, जब रानी कर्णावती खतरे में थीं। उनका राज्य छोटा था। किसी और ने उस पर हमला कर दिया था। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। उन्होंने मुगल बादशाह, राजा हुमायूं को धागे का एक छोटा सा टुकड़ा यह कहते हुए भेजा कि मैं खतरे में हूं। कृपया मुझे अपनी बहन समझें, और कृपया आकर मेरी रक्षा करें। हुमायूं को समझ नहीं आया कि यह क्या है क्योंकि वह दूसरे देश से आया था।'
लोगों ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह कहानी गलत है। कई यूजर्स ने कहा कि यह कहानी महाभारत के समय की है, न कि मध्यकालीन भारत की। यूजर्स ने कहा कि महाभारत के समय में, भगवान कृष्ण ने राजा शिशुपाल को मारने के लिए सुदर्शन चक्र का इस्तेमाल करते समय अनजाने में अपनी उंगली काट ली थी। द्रौपदी ने घाव को कपड़े के टुकड़े से ढक दिया था। भगवान कृष्ण उसके इस कृत्य से बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने उसे किसी भी तरह के नुकसान से बचाने का वादा किया। चीरहरण के दौरान, जब कौरवों ने द्रौपदी को शर्मिंदा करने और अपमानित करने की कोशिश की, तो भगवान कृष्ण प्रकट हुए और जब कोई और नहीं कर सका, तब उन्होंने द्रौपदी कि रक्षा की।
सुधा मूर्ति ने रक्षाबंधन पर शेयर किए गए वीडियो पर स्पष्टीकरण दिया है। सुधा मूर्ति ने स्पष्ट किया कि रक्षा बंधन पर मैंने जो कहानी साझा की है, वह इस त्यौहार से जुड़ी कई कहानियों में से एक है और निश्चित रूप से इसकी उत्पत्ति नहीं है। मेरा इरादा उन कई कहानियों में से एक को उजागर करना था, जो मैंने बड़े होने पर रक्षा बंधन के पीछे सुंदर प्रतीकात्मकता के बारे में सीखी थीं।
Updated on:
21 Aug 2024 12:02 pm
Published on:
21 Aug 2024 11:57 am
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