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‘एससी-एसटी में क्रीमी लेयर का प्रावधान लागू नहीं किया जा सकता’, सरकार ने साफ किया रुख

Creamy Layer Provision: केंद्र सरकार ने आरक्षण में क्रीमी लेयर प्रावधान पर अपना रुख साफ कर दिया है। क्या है इस मामले में सरकार का रुख? आइए जानते हैं।
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भारत

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Tanay Mishra

Aug 07, 2026

Creamy layer

क्रीमी लेयर (Representational Photo)

केंद्र सरकार (Central Government) ने आरक्षण (Reservation) में क्रीमी लेयर (Creamy Layer) प्रावधान पर अपना रुख साफ करते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में कहा है कि अनुसूचित जाति-जनजाति यानी एससी-एसटी (SC-ST) वर्ग में यह व्यवस्था लागू नहीं की जा सकती। क्रीमी लेयर का प्रावधान सिर्फ अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी (OBC) के लिए लागू है। एक याचिका पर दिए नोटिस के जवाब में हलफनामा पेश करते हुए केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने यह भी कहा है कि आरक्षण नीति में बदलाव और एससी-एसटी वर्गों की सूची में बदलाव का अधिकार सिर्फ संसद के पास है अदालत के पास नहीं।

सरकार ने की याचिका को खारिज करने की मांग

रामाशंकर प्रजापति की इस याचिका में केंद्र सरकार को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश में आरक्षण के लिए ज़्यादा न्यायसंगत और निष्पक्ष प्रणाली तैयार करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता की मांग थी कि मौजूदा ढांचे के बजाय आरक्षण योग्यता-सह-आर्थिक दृष्टिकोण पर आधारित हो। ओबीसी की तरह एससी-एसटी में भी आय आधारित प्राथमिकता यानी क्रीमी लेयर प्रणाली लागू हो। नवंबर 2025 में जस्टिस (अब सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच इस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। अपने जवाब में केंद्र सरकार ने इस याचिका को भारी हर्जाने के साथ खारिज करने की मांग की है।

सरकार ने क्या दिए तर्क?

सरकार ने इस मामले में तर्क दिए कि एससी-एसटी और ओबीसी का आरक्षण ऐतिहासिक सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन पर आधारित है, सिर्फ आर्थिक स्थिति पर नहीं। आय के आधार पर सब-कोटा संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। सरकार ने यह भी कहा कि आरक्षण नीति में बदलाव करने का फैसला अदालत नहीं कर सकती, बल्कि सिर्फ संसद कर सकती है। सरकार के अनुसार एससी की पहचान ऐतिहासिक रूप से छुआछूत और सामाजित भेदभाव के आधार पर हुई है। वहीँ एसटी की पहचान जनजातियों की खास संस्कृति, भौगोलिक अलगाव और सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर हुई है। वहीँ ओबीसी की पहचान सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक पिछड़ेपन और सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व के आधार पर हुई है। सरकार का मानना है कि आरक्षण के भीतर आय-आधारित सब-कोटा लागू करने पर विचार करने के लिए सामाजिक और आर्थिक आंकड़ों की स्टडी करनी होगी।

कल्याणकारी योजनाओं में आय सीमा लागू

हलफनामे में केंद्र सरकार ने यह भी कहा है कि नौकरियों और शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के लिए आरक्षण ही ऐतिहासिक, सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन के आधार पर लागू है। लेकिन सरकार की कल्याणकारी योजनाओं में लाभ के लिए पहले से ही आय सीमा लागू है, जिससे ज़रूरतमंद लोगों तक ही लाभ पहुंच सके।

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