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क्रिस्पर जीन एडिटिंग से जड़ खत्म होगा एचआइवी एडस, भारत में 24 लाख से ज्यादा मरीज को मिल सकता है जीवनदान

Crisper Gene Editing HIV AIDS :भारत के 24 लाख से अधिक मरीजों को जीवन दान मिल सकता है। क्रिस्पर जीन एडिटिंग के माध्यम से अब मरीजों को एडस मुक्त किया जा सकता है।

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Crisper Gene Editing HIV AIDS: नीदरलैंड्स के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्हें क्रिस्पर जीन एडिटिंग तकनीक के जरिए कोशिका से एचआइवी को निकालकर अलग करने में कामयाबी मिल गई है। उन्होंने इस तकनीक का इस्तेमाल कर आणविक कैंची से संक्रमित हिस्सों को मॉलिक्यूलर स्तर पर डीएनए से काटकर अलग कर दिया। इससे लाइलाज एचआइवी को भविष्य में जड़ से खत्म किए जाने की संभावना बढ़ गई है।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक मेडिकल साइंस के लिए यह बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि एचआइवी को लेकर अब तक जो दवाएं मौजूद हैं, वे इसे फैलने से रोकती हैं, शरीर से पूरी तरह खत्म नहीं करतीं। पहली बार वैज्ञानिकों ने कोशिका से एचआइवी को काटकर अलग करने का कमाल कर दिखाया है।

यूनिवर्सिटी ऑफ एमस्टर्डम के वैज्ञानिकों की टीम का कहना है कि इस तरीके से शरीर से एचआइवी संक्रमण को निकाला जा सकता है। मेडिकल कॉन्फ्रेंस में अपने शोध की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि इस दिशा में और शोध की जरूरत है कि क्या शरीर से संक्रमित हिस्से को निकालकर मरीज को एचआइवी से मुक्त किया जा सकता है। यह भी पता लगाया जाना है कि यह तरीका कितना सुरक्षित और असरदार है।

नॉटिंघम विश्वविद्यालय में स्टेम सेल और जीन थेरेपी टेक्नोलॉजीज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जेम्स डिक्सन का कहना है कि यह शोध प्रयोगशाला में कोशिकाओं पर किया गया। यह जानने के लिए और शोध की जरूरत है कि क्या यह तकनीक इंसान के शरीर में काम करेगी।

1. क्रिस्पर जीन एडिटिंग (इसे जीनोम एडिटिंग भी कहा जाता है) की खोज अमरीकी वैज्ञानिक जेनिफर डौडना और फ्रांसीसी वैज्ञानिक इमैनुएल चारपेंटियर ने की थी। इसके लिए उन्हें 2020 में संयुक्त रूप से रसायन विज्ञान का नोबेल प्राइज दिया गया था।
2. इस तकनीक से जीव के डीएनए को बदला जा सकता है। इसके जरिए जीनोम में विशेष हिस्सों पर आनुवंशिक सामग्री जोडऩे, हटाने या बदलने में मदद मिलती है।
३. यह तकनीक जीनोम अनुक्रम में लक्षित हस्तक्षेप को संभव बनाती है। जीन एडिटिंग से कृषि वैज्ञानिक जीन अनुक्रम में विशिष्ट लक्षणों के समावेश के लिए जीनोम को संपादित कर सकते हैं।

कैंसर की तरह दुनियाभर में ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआइवी) के मरीज भी बढ़ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनिया में इसके करीब चार करोड़ मरीज हैं। इनमें से 24 लाख से ज्यादा भारत में हैं। एचआइवी के दो तिहाई मरीज अफ्रीकी देशों में हैं। यह संक्रमण शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करता है और फैलने पर एड्स में बदल जाता है।