
Delhi's Coaching Reality Check: राजीव चौक मेट्रो स्टेशन दिल्ली के उन स्टेशनों में है, जहां लाइन में खड़े हो जाने मात्र से आम जनता धक्का दे- देकर आपको मेट्रो के डिब्बे के अंदर कर देती है। मैं भी वहां से द्वारका जाने वाली मेट्रो पकड़कर चंद मिनटों में करोल बाग पहुंच गया। मेट्रो स्टेशन में कोचिंग सेटरों के लगे बड़े- बड़े बोर्ड अन्य मेट्रो स्टेशन से थोड़ा अलग अहसास करवा रहे थे। करोल बाग मेट्रो स्टेशन से यूपीएससी छात्रों के प्रदर्शन वाली जगह की ओर बढ़ा ही था कि 50 कदम की दूरी में 5 लपके मेरे पास आ गए। कहने लगे यूपीएएसी की तैयारी करनी है.. आ जाओ.. देख लो.. अच्छी कोचिंग है.. फलाने सर पढ़ाते हैं.. एक सप्ताह डेमो ले ले.. एक बार आकर देख तो लो..। मौके पर पहुंचा तो छात्रों का हुजूम उमड़ा पड़ा था। सड़क के दोनों ओर दो लेयर की बैरिकेड दिल्ली पुलिस ने लगा रखी थी। छात्र बीच में प्रदर्शन कर रहे थे। कई छात्रों के परिजन भी यहां नजर आए। पूछने पर बताया कि टीवी और अखबारों में खबरें पढ़कर बच्चों की चिंता हो गई, सोचा बच्चे से मिल आए कि किन हालातों में है। बच्चों को अब यहां से निकालकर सुरक्षित जगह पर भी करना है।
छात्र-छात्राओं से बात करना शुरू किया तो कई बातें सामने निकलकर आईं। छात्रों के अपने कोचिंग सेंटर से लेकर सुरक्षा जैसे सवाल भी थे। इन सबके बीच किराए के मकान यानी हॉस्टल और पीजी का खेल अलग ही नजर आया। कई छात्राओं ने बताया कि यदि आपको पहली बार यहां रहने का ठिकाना चाहिए तो 40000 हजार रूपए तो चाहिए ही चाहिए। पहला किराया, एक महीने का एडवांस और एक महीने की दलाली...यदि आपके पास देने के लिए इतना नहीं है तो कमरा भूल जाइए। बिना दलाल कमरा नहीं मिलेगा।
मुंबई की रहने वाली अर्चना जादौन की बेटी इस इलाके में रहकर यूपीएससी की तैयारी करती हैं। लेकिन अब अर्चना भी दिल्ली में अपनी बेटी के पास रहेंगी इसलिए बेटी का पीजी बदलकर नई जगह जाना चाहती हैं। लिहाजा, शुरू में डिपॉजिट किए अपने 21,000 रूपए मांगने पहुंची तो डिपॉजिट देने से मना कर दिया गया। सुबह से भटक रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं है। हम बेटी को पढ़ाने के लिए आए हैं या थाने के चक्कर लगाने। सरकार ऐसे माफियाओं पर नियंत्रण क्यों नहीं करती है?
यूपी के बरेली से आए रामपाल राठी ने बताया कि पहले बेटी जहां रहती थी। वहां व्यवस्था और सुरक्षा अच्छी नहीं थी। इसलिए हमने उसका पीजी बदलने का सोचा। आसपास बहुत देखा लेकिन हमें कहीं कोई कमरा नहीं मिला और न ही सीधे कोई देने को तैयार हो रहा था। दलालों से ही संपर्क करना पड़ा। एक दलाल को 12000 रुपए की दलाली दी, तब इससे दोगुने किराए पर कमरा मिला।
मेरठ से दिल्ली करने आईं छात्रा आस्था ने कहा कि पहले मैं इसी इलाके में रहती थी लेकिन सुरक्षा और सफाई दोनों नहीं थी। कमरा इतना छोटा था कि पढ़ने में मन नहीं लगता था। इसलिए मैंने अब दूसरी जगह कमरा लिया है। लेकिन हर जगह हालात एक जैसे हैं। ट्रेन के केबिन से थोड़ा बड़े साइज का कमरा यहां 15 से 20 हजार का ही मिलेगा। ब्रोकर और एडवांस अलग से है।
कुछ छात्राओँ ने बताया कि कई दलाल छात्रों को परेशान तक करते हैं। उनके पास आसानी से हमारा नंबर पहुंच जाता है। बेवजह मैसेज और कॉल करते हैं। अभी तो एक छात्रा से दलाल ने अजीबगरीब डिमांड तक की थी। जिसकी चैट भी सबसे सामने आई है। उस मामले की शिकायत भी की गई है। साइबर पुलिस मामले की जांच कर रही है। ऐसे कई मामले हैं, जो पुलिस तक नहीं जाते, हम पढ़ने आए हैं, इनसे लड़ नहीं सकते।
Updated on:
08 Aug 2024 04:58 pm
Published on:
08 Aug 2024 12:39 pm
बड़ी खबरें
View Allबिहार चुनाव
ट्रेंडिंग
