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दिल्ली का बॉस कौन? केंद्र के अध्यादेश से गरमाई सियासत, फिर सुप्रीम कोर्ट जाएगा मामला

Delhi Govt vs LG Tussle: शुक्रवार रात केंद्र सरकार ने दिल्ली की व्यवस्था के लिए एक नया अध्यादेश जारी किया है। इस अध्यादेश के जरिए राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण (NCCSA) के गठन की बात कही गई है। इस अध्यादेश से दिल्ली का सियासी पारा हाई है।

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दिल्ली का बॉस कौन? केंद्र के अध्यादेश से गरमाई सियासत, फिर सुप्रीम कोर्ट जाएगा मामला

दिल्ली का बॉस कौन? केंद्र के अध्यादेश से गरमाई सियासत, फिर सुप्रीम कोर्ट जाएगा मामला

Delhi Govt vs LG Tussle: दिल्ली की चुनी हुई सरकार और केंद्र द्वारा नियुक्त उपराज्यपाल के बीच जारी अधिकारों की लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई को ऐतिहासिक फैसला दिया था। दिल्ली में अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े मामले में सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली सरकार के पक्ष में फैसला दिया। कोर्ट के आदेश से यह तय हुआ कि दिल्ली का कंट्रोल लोगों द्वारा चुनी हुई सरकार और मुख्यमंत्री के हाथों में होगी। सुप्रीम कोर्ट के इन निर्णय के बाद ऐसा लगा कि दिल्ली में सालों से चली रही केंद्र बनाम राज्य सरकार की लड़ाई समाप्त हो जाएगी। लेकिन इस आदेश के 9 दिन बाद भी केंद्र ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार अधिनियम, 1991 में संशोधन करते हुए एक नया अध्यादेश पेश कर दिया है।


अध्यादेश से ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार फिर एलजी के हाथों में

इस अध्यादेश के जरिए दिल्ली की व्यवस्था के लिए राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण (NCCSA) का गठन किए जाने की कही गई है। इस अध्यादेश के जरिए ट्रांसफर-पोस्टिंग का कंट्रोल फिर से उपराज्यपाल के हाथों में दे दिया गया है। जिससे दिल्ली की राजनीति में उबाल आ गया है। आम आदमी पार्टी के नेता इसे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना बताते हुए केंद्र पर निशाना साध रहे हैं।

क्या है राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण (NCCSA)

केंद्र सरकार ने 19 मई को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार अधिनियम, 1991 में संशोधन करते हुए एक नया अध्यादेश पेश किया। इस अध्यादेश के जरिए राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण (NCCSA) के गठन की बात कही गई है। इस प्राधिकरण के पास दिल्ली के अधिकारियों की ट्रांसफर, पोस्टिंग और विजिलेंस का अधिकार होगा।

दिल्ली के मुख्यमंत्री NCCSA के मुखिया होंगे। सीएम के अलावा प्रधान सचिव पदेन सचिव, मुख्य सचिव, प्रधान गृह सचिव प्राधिकरण के सचिव होंगे। ट्रांसफर पोस्टिंगग का फैसला सीएम अकेले नहीं इस प्राधिकरण के बहुमत पर ले सकेगा। साथ ही सीएम के फैसले के बाद उपराज्यपाल का फैसला अंतिम माना जाएगा। उपराज्यपाल चाहे तो सीएम के फैसले को नकार सकते हैं।


दिल्ली की मंत्री ने केंद्र पर बोला हमला

केंद्र के इस अध्यादेश पर दिल्ली की मंत्री आतिशी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली की चुनी हुई सरकार के पास पूरी ताकत है और यह ताकत है अफसरों की जवाबदेही, अफसरों की ट्रांसफर पोस्टिंग, भ्रष्ट अफसरों पर एक्शन लेने की ताकत है।

आतिशी ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का मतलब हुआ कि अगर दिल्ली की जनता ने अरविंद केजरीवाल को चुना है तो निर्णय लेने की ताकत अरविंद केजरीवाल के पास है। लैंड, लॉ-एंड ऑर्डर और पुलिस को छोड़कर निर्णय लेने की ताकत अरविंद केजरीवाल की है लेकिन भाजपा से यह सहन नहीं हुआ।

अध्यादेश को चुनौती देगी दिल्ली सरकार

केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ दिल्ली सरकार फिर से सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती है। केंद्र बनाम दिल्ली मामले में दिल्ली सरकार के वकील रहे अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सिविल सेवा पर दिल्ली सेवा को अधिकार संविधान पीठ ने दिया था। जिसे केंद्र ने अध्यादेश के जरिए पलट दिया है। इसे चुनौती दी जाएगी। संसद के जरिए इसे पारित नहीं होने दिया जाएगा।



बीजेपी ने अध्यादेश का किया स्वागत

दूसरी ओर इस अध्यादेश का स्वागत करते हुए भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीरंद्र सचदेवा ने कहा कि पिछले एक सप्ताह से केजरीवाल दिल्ली के प्रशासन को बदनाम कर मनमानी करने का प्रयास कर रहे थे, इसी वजह से केंद्र सरकार को यह अध्यादेश लाना पड़ा और भाजपा इसका स्वागत करती है। सचदेवा ने आगे कहा कि दिल्ली देश की राजधानी है, पूरे भारत का इस पर अधिकार है।

केजरीवाल दिल्ली के प्रशासन को कर रहे बदनामः बीजेपी

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने केजरीवाल सरकार पर दिल्ली के प्रशासन को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस सरकार के भ्रष्टाचार ने भी दिल्ली को काफी शर्मसार किया है। अब पिछले एक सप्ताह से जिस तरह अरविंद केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के प्रशासन को बदनाम कर मनमानी करने का प्रयास किया उसकी वजह से केंद्र सरकार जो अध्यादेश लाई है, भाजपा उसका स्वागत करती है।

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