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IPL फ्रैंचाइजी जैसा हो गया है दिल्ली हाई कोर्ट- अलविदा कहते हुए बोल गए जस्टिस शर्मा

आईपीएल के उदाहरण के साथ बाहरी लोगों की बढ़ती मौजूदगी को स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति धर्मेश शर्मा ने दिल्ली उच्च न्यायालय को अलविदा कहा कि हाई कोर्ट में बदलाव सकारात्मक है।

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वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस धर्मेश शर्मा (Photo - IANS)

Justice Dharmesh Sharma: दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस धर्मेश शर्मा ने अपने विदाई समारोह में एक भावुक और दिलचस्प टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट अब किसी इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) फ्रेंचाइज़ी जैसा प्रतीत होता है, क्योंकि यहां 'बाहर से आए खिलाड़ियों' यानी न्यायाधीशों की संख्या बढ़ रही है। जस्टिस शर्मा 8 जून को औपचारिक रूप से सेवानिवृत्त होंगे, जब कोर्ट अवकाश पर होगा। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही बार में शामिल होंगे और कानूनी सेवा जारी रखेंगे।

'IPL फ्रैंचाइजी जैसा हो गया है दिल्ली हाई कोर्ट'

दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) द्वारा आयोजित इस समारोह में बोलते हुए जस्टिस शर्मा ने कहा, अगर मुझे कहने की छूट दी जाए तो बहुत कुछ हो रहा है। हाईकोर्ट का पूरा स्वरूप बदल रहा है। क्रिकेट की भाषा में कहूं तो दिल्ली हाईकोर्ट अब एक आईपीएल फ्रेंचाइज़ी की तरह लगने लगा है, क्योंकि यहां इतने सारे बाहरी खिलाड़ी आ रहे हैं और भविष्य में और भी आएंगे।

तीन जजों को दिल्ली हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने की सिफारिश

यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब हाल ही में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने तीन न्यायाधीशों को दिल्ली हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने की सिफारिश की है। इनमें बॉम्बे हाईकोर्ट से जस्टिस नितिन सांबरे, इलाहाबाद हाईकोर्ट से जस्टिस विवेक चौधरी, और कर्नाटक हाईकोर्ट से दिल्ली हाईकोर्ट में वापसी कर रहे जस्टिस वी. कामेश्वर राव शामिल हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय भी इसी साल जनवरी में बॉम्बे हाईकोर्ट से स्थानांतरित होकर यहां आए थे।

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'न्याय प्रणाली में सुधार की जरूरत'

जस्टिस शर्मा ने कहा, यह अच्छा बदलाव है। मुझे लगता है न्याय प्रणाली में सुधार की जरूरत है… थोड़े बदलाव जरूरी हैं। जो कुछ हो रहा है, उसमें थोड़ा वस्तुनिष्ठ दृष्टिकोण लाना चाहिए। हम और भी बेहतर कर सकते हैं।

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मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय ने दी जस्टिस शर्मा की तारी।

मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने फुल कोर्ट विदाई समारोह में जस्टिस शर्मा की सराहना करते हुए कहा, वह कानूनी सहायता ढांचे को संस्थागत रूप देने, अधोसंरचना विकास और राजधानी में कानूनी जागरूकता कार्यक्रमों के संचालन में गहराई से जुड़े रहे हैं। उन्हें व्यवहारिक ज्ञान और न्यायिक सूझबूझ के लिए जाना जाता है।

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