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‘केस पुराना हो तो भी जमानत अर्जी BNSS में ही’- Delhi High Court

Delhi High Court news: Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी अपराध में FIR भले ही एक जुलाई 2024 को नए आपराधिक कानून लागू होने से पहले भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत दर्ज हुई हो लेकिन उस पर अग्रिम जमानत अर्जी की सुनवाई और फैसला नए कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत किया जाएगा।

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Delhi High Court

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Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी अपराध में FIR भले ही एक जुलाई 2024 को नए आपराधिक कानून लागू होने से पहले भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत दर्ज हुई हो लेकिन उस पर अग्रिम जमानत अर्जी की सुनवाई और फैसला नए कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत किया जाएगा।

जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने कहा कि बीएनएसएस की धारा 531(2)(a) से यह स्पष्ट है कि कोई भी आवेदन, अपील या कार्यवाही 1 जुलाई या उसके बाद दायर होने पर बीएनएसएस के तहत ही होनी चाहिए। कोर्ट ने बलात्कार के आरोपी की अर्जी पुराने कानून (CRPC) के तहत दाखिल करने के बावजूद उसे बीएनएसएस के तहत सुनना स्वीकार किया।

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