
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने परिजनों की ओर से पूर्वजों के माध्यम से या 'सपिंड' शादी से संबंधित व्यक्तियों के बीच विवाह पर रोक लगाने वाले हिंदू मैरेज एक्ट के एक प्रावधान की वैधता पर रोक बरकरार रखा है। कार्यवाहक चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनमीत पीएस अरोड़ा की बेंच ने ममले की सुनवाई के दौरान कहा कि शादी में अनियमित विकल्प अनैतिक संबंधों को वैध बना सकते हैं और हिंदू मैरेज एक्ट की धारा 5 (B) को चुनौती देने में कोई योग्यता नहीं है, जो सपिंडों (रिश्तेदारों) के बीच विवाह पर रोक लगाता है जब तक कि प्रत्येक पक्ष को नियंत्रित करने वाली प्रथा या प्रथा ऐसे संघ की अनुमति देती है।
कोर्ट ने कही ये बात
कोर्ट ने कहा, याचिकाकर्ता अपने मामले के तथ्यों में प्रथा के अस्तित्व को साबित करने में विफल रही और उसने माता-पिता की इजाजत पर भरोसा किया, जो प्रथा की जगह नहीं ले सकता। इसलिए, इस कोर्ट को हिंदू मैरेज एक्ट की धारा 5 (v) को चुनौती देने में कोई योग्यता नहीं है।
Updated on:
26 Jan 2024 09:35 pm
Published on:
26 Jan 2024 09:29 pm
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