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दिवाली से पहले घुटने लगा दम, दिल्ली का एक्यूआई 195 पंहुचा, जानिए अपने शहर का हाल

दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स फिर से बेहद खरतनाक स्थिति में पहुंच गया है। यहां की हवाओं में सांस लेना मुश्किल हो रहा है। दिल्ली के कई इलाकों में एक्यूआई 195 तक पहुंच गया है। दिवाली से पहले ही इस बार ऐसे आंकडें यहां के लोगों को डरा रहे हैं।

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दिवाली से लगभग 20 दिन पहले राजधानी दिल्ली की हवा एक बार फिर खराब रिकॉर्ड की गई है। स्थिति यहां इतनी ज्यादा ख़राब हो गयी है कि जो लोग बाहर से यहां पूर्ण रूप से स्वस्थ आ रहे हैं। यहां की हवा में सांस लेने के बाद अस्वस्थ हो जाते हैं। मौसम बदलने के बाद दिल्ली में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। शुक्रवार 20 अक्टूबर को दिल्ली का एक्यूआई 195 दर्ज किया गया है। गुरुवार 19 अक्टूबर के मुकाबले इसमें 74 अंकों की बढ़ोतरी हुई है। यहां के 16 इलाकों की हवा खराब श्रेणी में और 15 इलाकों की हवा मध्यम श्रेणी में दर्ज की गई है। इसके अलावा सबसे खराब हालत फरीदाबाद की है। दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार पराली का धुआं दिल्ली की ओर आ रहा है। आने वाले दिनों में स्थिति और चिंताजनक होगी। जिन इलाकों की हालत सबसे है, उनमें न्यू मोती बाग पहले स्थान पर है और यहां का एक्यूआई 274 दर्ज किया गया है।


मुंबई का हाल दिल्ली से बदतर

आर्थिक राजधानी मुंबई का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) दिल्ली से भी बदतर हो गया है, जिससे शहर देश का सबसे प्रदूषित महानगर बनता जा रहा है। सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च के अनुसार वित्तीय राजधानी में बीते दिनों वायु गुणवत्ता सूचकांक 191 दर्ज किया गया, जो दिल्ली के 84 से भी खराब है।

अंधेरी और मझगांव में यह 300 से अधिक था; सायन और बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स 200 को पार कर गया। विशेषकर श्वसन संबंधी समस्याओं वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य अलर्ट शुरू हो गया है। एक्यूआइ मॉनिटरिंग चार्ट के अनुसार 201-300 को खराब, 301-400 को बहुत खराब और 400 से अधिक एक्यूआइ को गंभीर माना जाता है।

नवंबर 2022 और जनवरी 2023 के बीच 92 दिनों में से, मुंबई में 66 दिनों के लिए खराब और बहुत खराब एक्यूआइ दर्ज किया गया, इसके लिए शहर में बड़े पैमाने पर चल रहे निर्माण कार्यों को सबसे बड़ा कसूरवार ठहराया जा रहा है। यह मुंबई के तटीय शहर की साफ हवा के स्वास्थ्य पर वरदान को छीन सकता है।

मुंबई में वायु प्रदूषण के शीर्ष पांच स्रोत

1. निर्माण मलबे से उत्पन्न होने वाली धूल।
2. सड़क पर उड़ती धूल।
3. ठोस अपशिष्ट और कूड़े को खुले में जलाना।
4. रेस्तरां, ढाबों, बेकरियों और सड़क किनारे भोजनालयों में अशुद्ध ईंधन का उपयोग।
5. ऐसे उद्योगों जिनमें रेडी मिक्स कंक्रीट (आरएमसी) संयंत्रों और कास्टिंग यार्ड संयंत्रों का उपयोग होता है।

अन्य शहरों का हाल जानिए

जयपुर-105
लखनऊ-187
बेंगलूर-147
पटना-179
चेन्नई-112