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अमित शाह के छेड़छाड़ किये हुए वीडियो के मामले में दिल्ली पुलिस तेलंगाना कांग्रेस को जारी करेगी नोटिस

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के वीडियो से साथ छेड़छाड़ कर उसे वायरल करने के मामले में जांचकर्ता कांग्रेस की तेलंगाना इकाई को नोटिस जारी करने वाले हैं। सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी। वास्तव में, गृह मंत्री ने तेलंगाना में मुसलमानों के लिए आरक्षण समाप्त करने की प्रतिबद्धता जताई थी, लेकिन वीडियो से […]

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के वीडियो से साथ छेड़छाड़ कर उसे वायरल करने के मामले में जांचकर्ता कांग्रेस की तेलंगाना इकाई को नोटिस जारी करने वाले हैं। सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी। वास्तव में, गृह मंत्री ने तेलंगाना में मुसलमानों के लिए आरक्षण समाप्त करने की प्रतिबद्धता जताई थी, लेकिन वीडियो से छेड़छाड़ कर यह जताने की कोशिश की गई कि वह सभी वर्गों के लिए आरक्षण समाप्त करने की बात कर रहे हैं।

सूत्रों ने बताया कि दिल्ली पुलिस की एक टीम तेलंगाना जाकर उन लोगों को नोटिस थमायेगी जिन्होंने इस फर्जी वीडियो को एक्स पर पोस्ट किया था। उन्होंने कहा, "चूंकि तेलंगाना कांग्रेस के आधिकारिक हैंडल से भी इसे पोस्ट किया गया था, इसलिए उन्हें भी नोटिस दिया जाएगा।"

इससे पहले भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने दावा किया था कि तेलंगाना कांग्रेस का एक धरा अमित शाह के छेड़छाड़ किये हुए वीडियो को वायरल कर रहा है जिससे बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क सकती है।

सूत्र ने बताया, "मामले की जांच चल रही है। हम वीडियो के मूल तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। जिन लोगों ने इसे पोस्ट किया है उनसे पूछताछ की जाएगी और जांच में शामिल होने के लिए उन्हें नोटिस दिये जायेंगे।"

भाजपा और केंद्रीय गृह मंत्रालय की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की साइबर शाखा के आईएफएसओ ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आईपीसी की धारा 153, 153ए, 465,469 तथा 171जी, और आईटी एक्ट की धारा 66सी के तहत मामला दर्ज किया गया है।

एफआईआर में, जिसकी कॉपी आईएएनएस के पास उपलब्ध है, गृह मंत्रालय ने अपनी शिकायत में कहा है कि "फेसबुक और ट्विटर (अब एक्स) के यूजरों द्वारा कुछ छेड़छाड़ किये गये वीडियो" सर्कुलेट करने की जानकारी मिली है।

शिकायत में मंत्रालय ने वीडियो के लिंक भी साझा किये थे।

इस वीडियो के सामने आने के बाद विवाद पैदा हो गया था जिससे ऐसा लगता है कि गृह मंत्री अमित शाह की मंशा अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटा) ओर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण समाप्त करने की है।