scriptNew States: उत्तर प्रदेश के 4 तो राजस्थान-महाराष्ट्र के दो टुकड़े करने की मांग, पूरी हुई तो ऐसा दिखेगा देश का नक्शा | Demand of New States in india Vidarbha Saurashtra Bhil Pradesh Bundelkhand purvanchal awadh | Patrika News
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New States: उत्तर प्रदेश के 4 तो राजस्थान-महाराष्ट्र के दो टुकड़े करने की मांग, पूरी हुई तो ऐसा दिखेगा देश का नक्शा

Demand of New States in India: देश में लंबे समय से कई अलग-अलग क्षेत्र नए राज्य की मांग कर रहे हैं। जिनमें विदर्भ, गोरखालैंड, बोडोलैंड, सौराष्ट्र, भीलीस्थान, पूर्वांचल, अवध प्रदेश और पश्चिम प्रदेश प्रमुख हैं।

नई दिल्लीJul 09, 2024 / 11:04 am

Anish Shekhar

Demand of New States in India: भारत में कई राज्यों के गठन की मांगें लंबे समय से चल रही हैं। इन मांगों के पीछे कई अलग-अलग कारण है, जैसे कि सांस्कृतिक पहचान, प्रशासनिक असुविधा, विकास की कमी या क्षेत्रीय उपेक्षा। देश की विशाल भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता के कारण, कई क्षेत्रों के लोग यह सोचते हैं कि वह अपनी अलग पहचान और जरुरतों को पूरा करने के लिए एक अलग प्रशासनिक राज्य की मांग कर सकते हैं। इसके अलावा, कुछ क्षेत्र यह भी मानते हैं कि एक नया राज्य उनके स्थानीय विकास को तेज करेगा और उनके क्षेत्रीय संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
आज की तारीख में, ये मांगें केवल क्षेत्रीय हितों की बात नहीं हैं, बल्कि यह दिखाती हैं कि समुदाय अपने इतिहास, भाषा और परंपराओं को बचाए रखते हुए, विकास की एक समान और मजबूत दिशा में बढ़ना चाहते हैं। आइए, कुछ मुख्य क्षेत्रों और उनकी स्थितियों को देखते हैं जहां नए राज्य बनने की मांग हैं।

1.विदर्भ

शामिल जिले: नागपुर, अमरावती, वर्धा, चंद्रपुर
-मूल राज्य: महाराष्ट्र

विदर्भ क्षेत्र महाराष्ट्र के पूर्वी हिस्से में स्थित है और इसमें नागपुर, अमरावती, वर्धा, चंद्रपुर जैसे जिले शामिल हैं। यह क्षेत्र ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अलग पहचान रखता है।
-मांग का कारण: विदर्भ के लोग महसूस करते हैं कि उन्हें राज्य की मुख्यधारा से विकास और संसाधनों में उचित भागीदारी नहीं मिलती है। यह क्षेत्र खेती और मिनरल रिसोर्सेज में समृद्ध है, लेकिन उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में पिछड़ गया है।
-समस्या: अगर विदर्भ एक अलग राज्य बनता है, तो महाराष्ट्र का भूगोल और अर्थव्यवस्था बदल सकती है। इससे राज्य के अंदर और बाहर विभाजन और विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है।

2.गोरखालैंड

शामिल जिले: दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, गोरखा हिल्स
-मूल राज्य: पश्चिम बंगाल
गोरखालैंड की मांग पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग और आसपास के क्षेत्रों के गोरखा (भारतीय नेपाली) लोगों द्वारा की जाती है। यह क्षेत्र हिमालय की फुटहिल्स में स्थित है और गोरखा समुदाय की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है।
-मांग का कारण: गोरखा समुदाय का मानना है कि उनकी सांस्कृतिक पहचान और विकास की आवश्यकताओं को राज्य की सरकार द्वारा पर्याप्त रूप से नहीं पहचाना गया है।

समस्या: गोरखालैंड का गठन पश्चिम बंगाल के क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकता है और राज्य में राजनीतिक और सामाजिक तनाव को बढ़ा सकता है।
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3.बोडोलैंड

शामिल जिले: नॉर्थ बार्पेटा, कोकराझार, चिरांग, बक्सा, उदालगुड़ी और धुबरी जिलों के कुछ हिस्सें
-मूल राज्य: असम

यह इलाका बोडो जाति की मुख्य आबादी का केंद्र है और यहां पर उनकी विशेष संस्कृति और परंपराएं मौजूद हैं। बोडो लोगों की मुख्य आजीविका खेती और वन्य जीवन से जुड़ी है, और इनका समाज देहात और सामाजिक युक्ति पर आधारित है।

-मांग का कारण: बोडो लोगों को अपने स्वतंत्र राजनीतिक अधिकारों की सुरक्षा और उनके विकास के लिए एक अलग प्रशासनिक इकाई की जरुरत है। वे मानते हैं कि एक अलग राज्य उनके स्थानीय समस्याओं को बेहतर ढंग से हल करने में मदद करेगा और उनके संसाधनों का उपयोग भी बेहतर तरीके से हो सकेगा।

– संभवित समस्याएं: बोडोलैंड के अलग होने से कुछ समस्याएं भी उठ सकती हैं। जैसे कि असम के विभाजन से संबंधित प्रशासनिक और आर्थिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। साथ ही, राजनीतिक और सामाजिक सम्बंधों में भी चुनौतियां आ सकती हैं।

4.सौराष्ट्र

शामिल जिले: राजकोट जिला, जामनग जिला, पोरबंदर जिला, अमरेली जिला, भावनगर जिला,गिर सोमनाथ जिला
-मूल राज्य: गुजरात

सौराष्ट्र क्षेत्र गुजरात राज्य में स्थित है और यहां के लोगों की संस्कृति और इतिहास बहुत ही गहरे रूप से जुड़ा हुआ है। यहां की विशेषता यह है कि इस जगह के बारे में पौराणिक कथाओं में भी कहा गया है और यहां के मंदिर, जैन धर्मस्थल और ऐतिहासिक स्थल भी बहुत प्रमुख हैं।
-मांग का कारण: इस क्षेत्र में रहने वाले लोग इसे अलग राज्य के रूप में स्थापित करने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें ऐसा लगता हैं कि अपने स्थानीय विकास और संस्कृति को सुरक्षित रखने के लिए एक अलग प्रशासनिक इकाई की जरूरत है। इसके अलावा, कुछ लोग यह भी मानते हैं कि अलग राज्य उनके क्षेत्रीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद करेगा और उनकी सांस्कृतिक पहचान को भी सुरक्षित रखेगा।
संभवित समस्याएं: इस मांग के पीछे कई समस्याएँ उठ सकती हैं, जैसे कि प्रशासनिक विभाजन, अर्थव्यवस्था की असमानता, और राजनीतिक समर्थन की कमी। इसके अलावा, इस प्रक्रिया में समाज में भी विभाजन आ सकता है और विभिन्न समुदायों के बीच आपसी विरोध भी बड़ सकता है।

5.भीलीस्थान (भील प्रदेश)

शामिल जिले: मध्य प्रदेश के अलीराजपुर, जबलपुर, और बड़वानी; गुजरात के वडोदरा और दाहोद; राजस्थान के मेवाड़, मारवाड़, और अरावली क्षेत्र; और महाराष्ट्र के नांदुरबार, धुलिया, और नासिक
-मूल राज्य: मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र
भील जनजाति भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमी और मध्य भागों में वास करने वाली एक प्रमुख आदिवासी समुदाय है। वे अपनी अनूठी भाषा, संस्कृति, और परंपराओं को संरक्षित रखने के लिए जाने जाता हैं। भीलों की धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाओं का अपना एक विशेष स्थान है, जिसमें गांवों के मेले, धार्मिक उत्सव, और परंपरागत गाने-नृत्य शामिल हैं।

-मांग का कारण: भील समुदाय के लोगों की मुख्य मांग उनकी स्वतंत्रता है। उनका विचार है कि एक अलग राज्य उनकी स्थानीय विकास को गति देगा और उन्हें अपने स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की स्वतंत्रता मिलेगी। वे अपनी भाषा, संस्कृति और आर्थिक विकास के लिए अलग राज्य की दिशा में बढ़ना चाहते हैं।

-समस्याएं और संभावित परिणाम: भीलिस्तान की मांग से जुड़ी कई समस्याएं उठ सकती हैं। इसमें प्रशासनिक और राजनीतिक समस्याएं शामिल हैं, जैसे कि नए राज्य की स्थापना और उसके प्रबंधन की कठिनाई। साथ ही, अन्य समुदायों और राज्यों के साथ संघर्ष भी उत्पन्न हो सकता है। विभिन्न भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक असमानताओं को हल करना भी एक चुनौती हो सकती ह
आगे जानने से पहले आपको यह जानना होगा कि उत्तर प्रदेश को चार राज्यों- पूर्वांचल, बुंदेलखंड, अवध प्रदेश और पश्चिम प्रदेश, में विभाजित करने का मुद्दा 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुमाव के दौरान ऊठा था। 2011 में, तब की मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की प्रमुख, मायावती ने विधानसभा में उत्तर प्रदेश को चार छोटे राज्यों – पूर्वांचल, बुंदेलखंड, अवध प्रदेश और पश्चिम प्रदेश में विभाजित करने का प्रस्ताव रखा। यह प्रस्ताव बेहतर प्रशासन प्रदान करने के हित में था। हालांकि, यह प्रस्ताव कांग्रेस सरकार के पास अटका रहा और उस समय आगे नहीं बढ़ पाया।
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6.पूर्वांचल

शामिल जिले: गोरखपुर, आजमगढ़, वाराणसी
-मूल राज्य: उत्तर प्रदेश

पूर्वांचल उत्तर प्रदेश का पूर्वी हिस्सा है, जिसमें वाराणसी, गोरखपुर, और आजमगढ़ जैसे जिले शामिल हैं। यह क्षेत्र ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर से समृद्ध है।
-मांग का कारण: यह क्षेत्र ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध है लेकिन विकास के मामले में पिछड़ा हुआ है। स्थानीय लोग मानते हैं कि एक अलग राज्य के रूप में, उनके विकास के मुद्दों को अधिक प्राथमिकता मिलेगी।
-संभावित प्रभाव: पूर्वांचल के गठन से क्षेत्रीय प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार हो सकता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के बाकी हिस्सों के साथ तालमेल बैठने और संसाधनों के वितरण में नई चुनौतियाँ पैदा हो सकती हैं।

7.बुंदेलखंड

शामिल जिले: मध्य प्रदेश के छतरपुर, दमोह, टीकमगढ़,पन्ना, सागर, दतिया, शिवपुरी; उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर, सोनभद्र
-मूल राज्य: उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश

बुंदेलखंड क्षेत्र उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के हिस्सों में फैला है, जिसमें झांसी, ललितपुर, चित्रकूट जैसे जिले शामिल हैं। यह क्षेत्र बुंदेला राजाओं के शासनकाल को दर्शाता है और अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक धरोहर के लिए जाना जाता है।
-मांग का कारण: यह क्षेत्र लंबे समय से सूखा, गरीबी, और विकास की कमी से ग्रस्त है। स्थानीय लोग मानते हैं कि एक अलग राज्य बनने से यहां के मुद्दों पर अधिक ध्यान दिया जा सकेगा और विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।

-समस्या: अगर बुंदेलखंड को अलग राज्य बनाया जाता है, तो यह उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की वर्तमान सीमाओं में बदलाव ला सकता है, जिससे प्रशासनिक और संसाधनों के वितरण में नई चुनौतियाँ खड़ी हो सकती हैं।

8.अवध प्रदेश

शामिल जिले: गोंडा, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, फैजाबाद, सुल्तानपुर, अमेठी, बाराबंकी, अयोध्या, गोरखपुर, और बस्ती
-मूल राज्य: उत्तर प्रदेश

अवध प्रदेश उत्तर प्रदेश के केंद्रीय हिस्से को कवर करेगा, जिसमें लखनऊ, फैजाबाद, और कानपुर जैसे शहर शामिल होंगे।
– मांग का कारण: अवध क्षेत्र का ऐतिहासिक महत्व है और यहां की सांस्कृतिक धरोहर विशेष है। लोग मानते हैं कि एक अलग राज्य के रूप में वे अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को बेहतर ढंग से संरक्षित कर सकते हैं।
-संभावित प्रभाव: अवध प्रदेश का गठन क्षेत्रीय प्रशासनिक क्षमता को मजबूत कर सकता है, लेकिन इससे राज्य के शेष हिस्सों में राजनीतिक और आर्थिक संतुलन पर प्रभाव पड़ सकता है।

9.पश्चिम प्रदेश ( हरित प्रदेश)

शामिल जिले: मेरठ, मुरादाबाद, आगरा, सहारनपुर, अलीगढ़ संभाग, बरेली संभाग
-मूल राज्य: उत्तर प्रदेश
पश्चिम प्रदेश उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से को कहा जाएगा, जिसमें मेरठ, मुजफ्फरनगर, और सहारनपुर जैसे जिले शामिल हैं।

-मांग का कारण: यह क्षेत्र आर्थिक रूप से समृद्ध है और खेती के लिए अच्छा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि एक अलग राज्य बनने से वे अपने संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकेंगे और विकास को अधिक गति दे सकेंगे।
-संभावित प्रभाव: पश्चिम प्रदेश के गठन से क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहन मिल सकता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के बाकी बचे हिस्सों के साथ संसाधनों और राजनीतिक शक्तियों को फिर से बांटने का कार्य चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

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