
सोशल मीडिया आज के दौर में लोगों के जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। इसका फायदा उठाते हुए कई बार सोशल मीडिया कंपनियां लोगों की जानकारियां अपने फायदे के लिए बेच देती है। इसे रोकने के लिए केंद्र सरकार ने आज डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन बिल, 2023 लोकसभा में पेश किया। IT मंत्री अश्वनी वैष्णव जब इस बिल को पेश कर रहे थे उस वक्त लोकसभा में विपक्ष के सांसदों ने इस विधेयक का जोरदार विरोध किया। इस पर उन्होंने विपक्षी सांसदों को बहस करने की चुनौती दी।
बता दें कि इस विधेयक को केंद्रीय कैबिनेट पिछले दिनों अपनी मंजूरी प्रदान कर चुकी है। कानून बनने के बाद सोशल मीडिया कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगेगा।
RTI को कमजोर करने की कोशिश
नए डाटा प्रोटेक्शन बिल को लेकर संसद में भारी विरोध देखने को मिला। विपक्षी सदस्यों ने विधेयक पेश किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इसे आगे के विचार-विमर्श के लिए आधिकारिक तौर पर संसदीय पैनल के पास भेजा जाए। इसके साथ ही विधेयक को संसद की संयुक्त समिति को सौंपने की भी मांग की गई। विपक्षी सांसदों ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के संभावित कमजोर करने का आरोप लगाया।
सरकार बहस के लिए तैयार- अश्वनी बैष्णण
बिल को लोकसभा में पेश करते हुए IT मंत्री अश्वनी बैष्णव ने विपक्ष के सवालो को भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विपक्षी सदस्यों द्वारा उठाया गया कोई भी मुद्दा सरकार की विधायी क्षमता से संबंधित नहीं है। केंद्र विपक्षी सांसदों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों सहित विधेयक पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है।
क्या है डाटा प्रोटेक्शन बिल?
डाटा प्रोटेक्शन बिल एक ऐसा कानून है जो यूजर्स की निजी जानकारी और डिजिटल पहचान को सुरक्षित रखेगा। गूगल से लेकर फेसबुक और ट्विटर तक जो कंपनियां यूजर्स का डाटा कलेक्ट करती हैं उनकी प्रोसेसिंग को यह बिल पूरी तरह से पारदर्शी बनाएगा। इस बिल के आने के बाद अगर कोई संस्था यूजर का डाटा स्टोर करना चाहती है तो उसके लिए उसे अनुमति लेनी होगी। साथ ही कोई भी संस्था इस डाटा का इस्तेमाल अपने हित के लिए नहीं कर पाएगी। जिस तरह से डाटा चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं और ऑनलाइन फ्रॉड सामने आ रहे हैं, इस बिल के आने से इन घटनाओं में कमी देखी जा सकती है
यूजर्स के डाटा का गलत इस्तेमाल करती है कंपनियां
जब भी आप किसी वेबसाइट या ऐप पर अपनी डिटेल दर्ज करते हैं तो आपका डाटा उस वेबसाइट या ऐप के पास चला जाता है। इसमें आपके नाम से लेकर एड्रेस और फोन नंबर समेत कई जानकारियां शामिल होती हैं। सिर्फ यही नहीं, बैंक डिटेल्स समेत सर्विस प्रोवाइडर की जानकारी भी कंपनियों के पास होती है जिनका इस्तेमाल कंपनियां अपने हित में करती हैं और फिर इनका इस्तेमाल टारगेटेड ऐड चलाने के लिए किया जाता है।
कानून बनने के बाद कंपनियों के मनमानी पर लगेगा लगाम
इस बिल के मुताबिक बिना कंज्यूमर की मर्जी के डाटा का इस्तेमाल नहीं हो सकता। कंपनियों को हर डिजिटल नागरिक को साफ और आसान भाषा में सारी जानकारी देनी होगी। किसी भी समय ग्राहक अपना कन्सेंट वापस ले सकता है। गलत इस्तेमाल पर 250 करोड़ रुपए तक की पेनल्टी का प्रावधान है। बता दें कि संसद के दोनों सदनों से पास होने और राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद ये विधेयक कानून का रूप ले लेगा।
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Published on:
03 Aug 2023 09:14 am
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