
चीफ जस्टिस सूर्यकांत। (फोटो- IANS)
CJI Surya Kant: सुप्रीम कोर्ट में एक चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया, जब तीन-न्यायाधीशीय पीठ द्वारा पूर्व में खारिज की गई समान प्रकृति की याचिका दोबारा दूसरी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध हो गई। इस पर सीजेआइ सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में सुधार का संकल्प लेते हुए गहन प्रशासनिक जांच की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जो अधिकारी खुद को 'स्थायी' समझते हैं, उनसे जवाब मांगा जाएगा।
हुआ यों कि सीजेआइ सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एवं असामाजिक गतिविधि (निवारण) अधिनियम, 1986 को भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 111 के आधार पर चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जबकि इसी मुद्दे पर सिराज अहमद खान की याचिका पहले से जस्टिस जे.बी. पारडीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ के समक्ष लंबित है। इरफान सोलंकी ने समान आधार पर अपनी याचिका को टैग करने की मांग की।
उत्तर प्रदेश सरकार ने बताया कि इसी तरह की चुनौती मोहम्म्द अनस चौधरी मामले में तत्कालीन सीजेआइ डी.वाइ. चंद्रचूड़ की पीठ 12 दिसंबर 2022 को खारिज कर चुकी है, और वैकल्पिक उपाय अपनाने की छूट दी थी। जस्टिस बागची ने सामान्य विधि बनाम राज्य विशेष कानून पर ‘विरोधाभास’ के तर्क पर प्रश्न उठाए। वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम के याचिका वापस लेने के अनुरोध के बावजूद सीजेआइ ने मामले को तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने पर जोर दिया।
Published on:
27 Feb 2026 06:54 am
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