27 फ़रवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

NCERT Text Book Row: ‘पता करो किसने किया ये काम…’ NCERT मामले में एक्शन में PM मोदी, मीटिंग के बाद क्या बोले शिक्षा मंत्री

NCERT Text Book Row: सेवा तीर्थ में हुई पहली कैबिनेट की मीटिंग में पीएम मोदी ने NCERT मामले में नाराजगी जाहिर करते हुए जिम्मेदार लोगों पर एक्शन लेने की बात कही है। पढ़ें पूरी खबर...

3 min read
Google source verification
pm modi

पीएम मोदी (Photo: IANS/PMO)

NCERT Text Book Row: NCERT की आठवीं की किताब में 'न्यायापालिका में भ्रष्टाचार' का जिक्र का मामला अब केंद्र सरकार की गले की फांस बनता जा रहा है। किताब वापस लेने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट राहत देने के मूड में नहीं है। इधर, बीते मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में पीएम मोदी ने भी इस पर नाराजगी जाहिर की है। बैठक के दौरान पीएम मोदी ने तल्ख तेवर में कहा कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है और किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। इस बात का पता जल्द से जल्द लगाया जाए।

सेवा तीर्थ में पहली मीटिंग में उठी ये बात

पीएम मोदी ने नए बने PMO यानि सेवा तीर्थ में पहली मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए पूरे घटनाक्रम पर नाराजगी जाहिर की। मीटिंग के दौरान पीएम मोदी ने पूछा कि क्लास 8 के स्टूडेंट्स को ऐसे चैप्टर क्यों पढ़ाए जा रहे हैं और किताबों में कंटेंट की मॉनिटरिंग कौन कर रहा है।

पीएम मोदी इस पूरे घटनाक्रम से नाखुश: प्रधान

गुरुवार को झारखंड में पत्रकारों से बातचीत के दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पीएम मोदी इस पूरे घटनाक्रम से नाखुश हैं। प्रधान ने कहा कि जब यह मामला पीएम मोदी के संज्ञान में आया तो उन्होंने फौरन NCERT को किताब वापस लेने का निर्देश दिया। शिक्षा मंत्री ने कहा कि हम न्यायपालिका का पूरी तरह सम्मान करते हैं। न्यायपालिका जो भी कहेगी, हम उसे मानेंगे। जो हुआ है, उससे मैं बहुत दुखी हूं, मैं इसके लिए अफसोस जाहिर करता हूं। प्रधान ने कहा कि जब यह मामला मेरे ध्यान में आया, तो मैंने तुरंत NCERT को किताबें वापस लेने का निर्देश दिया, ताकि वे (उन्हें) आगे सर्कुलेट न करें।

हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं: BJP

BJP के नेशनल स्पोक्सपर्सन संबित पात्रा ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान NCERT मुद्दे पर एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि इंडियन ज्यूडिशियरी जितनी इंडिपेंडेंट और डिजर्विंग कोई दूसरी संस्था नहीं है। यह सिर्फ इंडिया में ही नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया में है। हम सभी इंडियन ज्यूडिशियरी के प्रति सम्मान का भाव, मान का भाव और स्वाभिमान का भाव रखते हैं।

क्या है नई किताब में?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, NCERT की नई किताब में ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ नामक चैप्टर में बताया गया है कि अदालतों को किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है। साथ ही, कोर्ट में व्याप्त भष्ट्राचार की घटनाओं का भी जिक्र किया गया है।

किताब में 5.53 करोड़ पेंडिंग केसों का भी जिक्र किया गया है। इसके पीछे कई कारण बताए गए हैं। जैसे कि जजों की कमी, कानूनी प्रक्रिया का जटिल होना और अदालतों में सही इंफ्रास्ट्रक्चर का अभाव। किताब में बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में करीब 81 हजार केस पेंडिंग हैं। देश भर के उच्च न्यायालयों में 4 करोड़ 70 लाख केस पेंडिंग हैं। किताब में बताया है कि इन पेंडिंग केस के चलते कोर्ट पर भारी दवाब है।

आचार संहिता से बंधे होते हैं न्यायाधीश

बच्चों को बताया गया है कि जज एक आचार संहिता से बंधे होते हैं। उन्हें कोर्ट रूम के भीतर और बाहर सही आचरण रखना होता है। यदि किसी न्यायाधीश के खिलाफ शिकायत होती है तो उसकी जांच की व्यवस्था है। इसके लिए ‘Centralised Public Grievance Redress and Monitoring System (CPGRAMS)’ नाम का सिस्टम बनाया गया है। किताब में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि साल 2017 से 2021 के बीच 1600 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुई थी। किताब में बताया गया है कि अगर आरोप बहुत ज्यादा गंभीर हो तो उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के खिलाफ संसद में महाभियोग लाया जाता है, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी जांच के बाद ही शुरू होती है और उक्त न्यायाधीश को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जाता है।

किताब में पूर्व जस्टिस गवई का भी किया गया है जिक्र

किताब में पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बीआर गवई के बयान का भी जिक्र किया गया है। गवई ने 2025 में कहा था कि न्यायपालिका के भीतर भी भ्रष्टाचार और गलत आचरण की घटनाएं सामने आई हैं। इससे जनता का भरोसा कमजोर होता है। इन मामलों में पारदर्शी और सख्त कार्रवाई करना जरूरी है, ताकि लोगों का विश्वास दोबारा मजबूत हो सके।

पुरानी किताब में क्या था?

पुरानी किताब में न्यायपालिक की भूमिका, स्वतंत्र न्यायपालिका का मतलब, अदालतों की संरचनाओं व लोगों की पहुंच के बारे में जानकारी दी गई थी। पुरानी किताब में पेंडिंग मामलों का जिक्र जरूर था, लेकिन न्यायपालिका में व्याप्त भ्रष्टचार को लेकर कोई बात नहीं कही गई थी। पुरानी किताब में ‘Justice delayed is justice denied’ न्याय में देरी, न्याय से वंचित की बात भी समझाई गई थी।