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National Doctor’s Day : जानिए देश की पहली महिला डॉक्टर आनंदी जोशी की कहानी, पढ़कर आपको भी गर्व होगा

National Doctor’s Day: आज नेशनल डॉक्टर्स डे है। पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध डॉक्टर और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. विधान चंद्र राय के सम्मान में 1991 से एक जुलाई को डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। आज के दिन लोग डॉक्टरों को उनके टफ प्रोफेशन और हमारी जान बचाने के लिए शुक्रिया बोलते हैं।  

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जानिए देश की पहली महिला डॉक्टर आनंदी जोशी की कहानी

जानिए देश की पहली महिला डॉक्टर आनंदी जोशी की कहानी

National Doctor’s Day: डॉक्टर को धरती का भगवान कहा जाता है। आज नेशनल डॉक्टर्स डे हैं। जो पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री और मशहूर डॉक्टर विधान चंद्र राय की याद में मनाया जाता है। नेशनल डॉक्टर्स डे मौके पर आज देश में कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सबसे बड़ा प्रोग्राम मध्य प्रदेश के शहडोल में होने जा रहा है। जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेशनल सिकल सेल एनीमिया एलिमिनेशन मिशन का शुभारंभ करेंगे। करीब 3.57 करोड़ आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना कार्ड्स के वितरण की भी शुरुआत करेंगे। ये दोनों कवायद लोगों को सेहतमंत बनाने के नजरिए महत्वपूर्ण है। आज नेशनल डॉक्टर्स डे पर पढ़िए भारत की पहली महिला डॉक्टर आनंदी गोपाल जोशी की कहानी, जिन्होंने 1886 में एमडी की डिग्री की हासिल की थी।




9 साल में शादी, 14 साल में मां, बच्चे की मौत से डॉक्टर बनने की ठानी

आनंदी गोपाल जोशी की महज नौ साल की उम्र में गोपालराव जोशी से शादी कर दी गई थी। मात्र 14 साल की उम्र में वह मां बन गई थीं। लेकिन बच्चे के जन्म के मात्र 10 दिन बाद ही उसकी मौत हो गई। संतान की मौत का आनंदी को इतना दुख हुआ कि उन्होंने डॉक्टर बनने का लक्ष्य तय कर लिया। और फिर इसके बाद वो डॉक्टर बनने की राह पर चल निकली। लेकिन यह राह इतनी आसान नहीं थी।

कोल्हापुर के एडवर्ड अस्पताल में की मरीजों की सेवा

21 साल की उम्र में डॉक्टरी की पढ़ाई कर एमडी की डिग्री के साथ आनंदी भारत लौटी और कोल्हापुर रियासत के अल्बर्ट एडवर्ड अस्प्ताल के महिला वार्ड में प्रभारी चिकित्सक के तौर पर काम किया। हालांकि कुछ ही दिनों तक डॉक्टरी करने के बाद आनंदी टीबी की शिकार हो गई। मात्र 22 साल की उम्र में 26 फरवरी 1887 को उनका निधन हो गया।

22 साल की जिंदगी में ही हासिल किया बड़ा मुकाम

आनंदी को बेशक 22 साल का जीवन मिला। लेकिन उन्होंने इसी जीवन में बड़ा मुकाम हासिल की। वो भारत की पहली लेडी डॉक्टर कहलाई। उन्हें डॉक्टर बनाने में उनके पति गोपालराव जोशी का भी बड़ा रोल है। गोपालराव ने आनंदी का हरकदम पर साथ दिया।

डॉक्टरी की पढ़ाई के दौरान आनंदी की अंग्रेजों से अच्छी दोस्ती हो गई थी। थियो डीसिया नामक उनकी दोस्त ने आनंदी की मौत के बाद उनके परिजनों से उनका राख देने की मांग की थी। बाद में थियो डीसिया ने उस राख को न्यूयॉर्क के पकिप्सी में एक कब्रिस्तान में अपने परिजनों के साथ दफना। इस कब्रिस्तान के हेडस्टोन पर लिखा है- आनंदीबाई जोशी MD (1865- 1887), भारत की पहली महिला डॉक्‍टर। आनंदी गोपाल पर मराठी फिल्म भी बन चुकी है।

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