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भारत की नागरिकता पाने वाले डॉ मुखी कौन हैं? आखिर पाकिस्तान में किस बात का सता रहा था डर, डिटेल में पढ़ें सबकुछ

गुजरात हाई कोर्ट ने बताया कि पाकिस्तान से भारत आए डॉ नानिकराज खानूमल मुखी को भारतीय नागरिकता मिल गई है। कोर्ट ने कहा कि पिछले चार सालों से 'देशविहीन' पाकिस्तान के इस डॉक्टर को अब भारतीय नागरिक के रूप में पंजीकृत किया गया है, जिससे उन्हें नई पहचान मिली है।

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भारत

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Mukul Kumar

Aug 08, 2025

डॉ नानिकराज खानूमल मुखी। फोटो- X/@SarkarSupriyo

पाकिस्तान से भारत आए डॉ नानिकराज खानूमल मुखी को अब भारत की नागरिकता मिल गई है। गुजरात हाई कोर्ट ने गुरुवार को इस बारे में जानकरी दी। कोर्ट की तरफ बताया गया कि पिछले चार सालों से 'देशविहीन' पाकिस्तान के एक डॉक्टर को भारतीय नागरिक के रूप में पंजीकृत किया गया है।

भारत की नागरिकता मिलते ही डॉ मुखी गदगद हो गए। उन्होंने कहा कि अब वह पाकिस्तान के नहीं रहे, वापस जाने का अब कोई मतलब ही नहीं बनता है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ऐसा लग रहा है जैसे मैं जिस चीज के लिए संघर्ष कर रहा था, वो आखिरकार आ ही गई। अब, मैं आधार कार्ड बनवा सकता हूं।

वोटर आईडी और पासपोर्ट के लिए करेंगे आवेदन

उन्होंने आगे कहा कि भारतीय होने के नाते अब मुझे कानूनी अधिकार और एक डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस करने का अधिकार मिलेगा। अब मैं वोटर कार्ड और पासपोर्ट के लिए भी आवेदन करूंगा। पिछले चार सालों से मेरे पास कोई अधिकार नहीं था। अब तक मेरे पास कोई भी राष्ट्रीयता नहीं थी। यह मेरे लिए बहुत बड़ी राहत है।

इस वजह से आए भारत

बता दें कि 55 वर्षीय नानिकराज खानूमल मुखी 2009 में पाकिस्तान से विजिटर वीजा पर भारत आए थे। पाकिस्तान के हैदराबाद में उनका सोनोग्राफी क्लिनिक था।

बच्चों की शिक्षा और धार्मिक उत्पीड़न के खतरे को देखते हुए उन्होंने भारत आने का फैसला किया। इस समय वह अपने परिवार के साथ अहमदाबाद के सरदारनगर में रह रहे हैं।

2016 में नागरिकता के लिए किया था आवेदन

डॉ. मुखी ने 2016 में भारत की नागरिकता के लिए आवेदन किया था। इसके बाद साल 2017 में उन्हें अहमदाबाद कलेक्टर कार्यालय से जानकारी मिली कि उनके आवेदन पर कार्रवाई हो गई है। उन्हें जल्द ही नागरिकता मिल जाएगी। इसके बाद, साला 2021 में उन्होंने अपना पाकिस्तानी पासपोर्ट त्याग दिया।

डॉ मुखी को नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 5 (1) (ए) के तहत भारतीय के रूप में रजिस्टर्ड किया गया है। इस धारा के तहत, भारत सरकार, उसी व्यक्ति को नागरिकता देती है, जो अवैध प्रवासी नहीं है। इसके अलावा, वह नागरिकता के लिए आवेदन करने से आवेदन करने से पहले सात वर्षों तक भारत में रहा हो।

इस वजह से कोर्ट का खटखटाया था दरवाजा

बता दें कि कुछ दिनों पहले भारतीय नागरिक नहीं होने के कारण अहमदाबाद स्थित उनके क्लिनिक को स्वास्थ्य अधिकारियों ने सील कर दिया था। इसके बाद डॉ. मुखी ने 30 अप्रैल को गुजरात हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

इसके बाद गुरुवार को केंद्र सरकार के वकील ने अदालत को सूचित किया कि डॉ। मुखी को नागरिकता मिल गई है। इसके बाद, उन्होंने याचिका वापस लेने का फैसला किया।

परिवार में इन लोगों को मिल चुकी है नागरिकता

डॉ मुखी की पत्नी भोजो बाई को साल 2022 में ही नागरिकता मिल गई है। वहीं, उनकी बेटी नंदिता दास को 2024 में भारत की नागरिकता मिली है। उनके भाई और बहन भी अब भारत के नागरिक है। दो मुखी के एक बेटे ने भी भारत की नागरिकता के लिए आवेदन किया है। जबकि, एक और बेटा अब भी पाकिस्तानी नागरिक है।

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