
भारत अब दुनिया का 'एआई एक्सपोर्ट हब' बन रहा है। एआई समिट में जारी 'इंडियाज़ एआई इम्पैक्ट स्टार्टअप्स' रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय एआई स्टार्टअप्स अब 'सुपर-यूटिलिटी' मॉडल पर काम कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार देश के लगभग आधे स्टार्टअप्स सीधे तौर पर आम आदमी की बुनियादी ज़रूरतों जैसे हेल्थ-टेक, एड-टेक और एग्री-टेक पर केंद्रित हैं।
इस विशेष सत्र में लॉन्च हुई रिपोर्ट में बुनियादी क्षेत्रों में बदलाव लाने वाले 110 से ज़्यादा स्टार्टअप्स और गैर-लाभकारी संस्थाओं को शामिल किया गया है। लॉन्च के दौरान आईटी मंत्रालय के निदेशक श्री के. मोहम्मद वाई. सफीरुल्ला और अन्य अधिकारियों ने बताया कि ये कंपनियाँ एआई के 'सुपर-यूटिलिटी' मॉडल से कैसे 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' के मंत्र को साकार कर रही हैं।
हेल्थ-टेक और स्वास्थ्य तकनीक
क्योर एआई - एक्स-रे और सीटी स्कैन का विश्लेषण कर फेफड़ों के कैंसर और टीबी की शुरुआती पहचान।
निरामई - थर्मल इमेजिंग द्वारा बिना छुए, दर्द रहित और सस्ती ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग।
हेल्थप्लिक्स - डॉक्टरों के लिए एआई-आधारित डिजिटल नुस्खे, जिससे इलाज प्रक्रिया में तेजी।
एग्री-टेक, कृषि तकनीक
देहात - 14 लाख से अधिक किसानों को फसल, खाद और बाजार की व्यक्तिगत सलाह।
क्रॉपिन - सैटेलाइट इमेजिंग से उपज का पूर्वानुमान और फसल की सेहत की निगरानी।
फसल - आईओटी सेंसर के ज़रिए सिंचाई और कीटनाशकों के सटीक उपयोग की सलाह व पानी की बचत।
एड-टेक, शिक्षा तकनीक
कॉन्वेजीनियस - 'स्विफ्टचैट' बॉट्स के जरिए करोड़ों छात्रों तक क्षेत्रीय भाषा में शिक्षा।
अधिविहान - ग्रामीण छात्रों के लिए क्षेत्रीय भाषाओं में ट्यूटरिंग और शंका समाधान।
न्याय और शासन
अदालत एआई - अदालतों में रियल-टाइम स्टेनोग्राफर की तरह काम कर केस सुलझाने का समय कम करना।
कोरोवर-ई-सेवक - कई भारतीय भाषाओं में सरकारी सेवाओं और शिकायतों के प्रबंधन की सुविधा।
Published on:
20 Feb 2026 07:37 am
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