
सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ड्यूटी के दौरान महिला रेजिडेंट डॉक्टर से बलात्कार के बाद उसकी हत्या किए जाने के विरोध में आंदोलनरत देशभर के डॉक्टरों को अपने काम पर तत्काल लौटने की अपील की। शीर्ष अदालत ने सरकारों को काम पर लौटने वाले आंदोलनकारी डॉक्टरों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने के साथ ही उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों को दो सप्ताह में सुधार लाने को कहा। शीर्ष अदालत इस मामले में अगली सुनवाई पांच सितंबर को करेगी। सुप्रीम कोर्ट की अपील के बाद फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (एफएआइएमए) ने 11 दिन से चली आ रही हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की।
प्रधान न्यायाधीश डीवाइ चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने नौ अगस्त की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के स्वतः संज्ञान मामले में सुनवाई के दौरान गुरुवार को सभी संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डॉक्टरों से हड़ताल समाप्त कर लौटने की भावुक अपील की। उन्होंने कहा, 'न्याय और चिकित्सा हड़ताल पर नहीं जा सकते। क्या हम अब सर्वोच्च न्यायालय के बाहर जाकर बैठ सकते हैं?' पीठ ने अपने आदेश में कहा, 'डॉक्टरों ने आशंका जताई है कि उनमें से कुछ पर पिछले दिनों हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के कारण कार्रवाई की जा रही है। हमें आश्वासन दिया गया है कि डॉक्टर काम पर वापस लौट आएंगे… और आज (22 अगस्त 2024) के आदेश के बाद काम पर वापस आने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।'
1- स्वास्थ्य सचिव एक सप्ताह के भीतर राज्य के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों के साथ बैठक करके काम पर लौटने के इच्छुक डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। सभी राज्य दो सप्ताह के भीतर सुधारात्मक उपाय करें।
2- सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश यह सुनिश्चित करे कि चिकित्सा प्रतिष्ठानों में हिंसा की किसी भी आशंका को रोका जा सके। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय एक पोर्टल खोले, जहां सभी हितधारक अपने सुझाव प्रस्तुत कर सकें।
3- रेजिडेंट डॉक्टरों की 36 से 48 घंटे की वर्किंग शिफ्ट को अमानवीय बताते हुए पीठ ने नवगठित 10 सदस्यीय राष्ट्रीय टॉस्क फोर्स को इस समस्या पर भी विचार करने का निर्देश दिया।
4- पीठ ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को बाधित न करने का निर्देश देते हुए कहा कि सरकारें आरजी कर मेडिकल कॉलेज की उस घटना के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करें।
5- पीठ ने डॉक्टरों के कल्याण और सुरक्षा के मुद्दे को बार-बार रेखांकित करते हुए कोलकाता की इस घटना के मामले का राजनीतिकरण न करने का सभी से आग्रह किया और कहा कि कानून अपना काम कर रहा है।
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Updated on:
23 Aug 2024 02:26 pm
Published on:
23 Aug 2024 06:21 am
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