21 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

‘सुप्रीम अपील’ पर डॉक्टरों की हड़ताल खत्म, कहा न्याय और चिकित्सा हड़ताल पर नहीं जा सकते, जारी किए 5 निर्देश

Supreme Court : कोलकाता के अस्पताल में डॉक्टर से बलात्कार-हत्याकांड और महाराष्ट्र के बदलापुर के एक स्कूल में चार साल की दो मासूमों पर यौन हमलों के मामलों के निपटने में पुलिस के तरीकों पर अदालतें हैरान हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस को फटकार लगाई तो महाराष्ट्र हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान मामले में कहा कि निश्चित रूप से पुलिस ने अपनी भूमिका उस तरह नहीं निभाई है, जैसी उसे निभानी चाहिए थी। अगर पुलिस संवेदनशील होती, तो यह घटना नहीं होती।

3 min read
Google source verification

सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ड्यूटी के दौरान महिला रेजिडेंट डॉक्टर से बलात्कार के बाद उसकी हत्या किए जाने के विरोध में आंदोलनरत देशभर के डॉक्टरों को अपने काम पर तत्काल लौटने की अपील की। शीर्ष अदालत ने सरकारों को काम पर लौटने वाले आंदोलनकारी डॉक्टरों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने के साथ ही उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों को दो सप्ताह में सुधार लाने को कहा। शीर्ष अदालत इस मामले में अगली सुनवाई पांच सितंबर को करेगी। सुप्रीम कोर्ट की अपील के बाद फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (एफएआइएमए) ने 11 दिन से चली आ रही हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की।

प्रधान न्यायाधीश डीवाइ चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने नौ अगस्त की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के स्वतः संज्ञान मामले में सुनवाई के दौरान गुरुवार को सभी संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डॉक्टरों से हड़ताल समाप्त कर लौटने की भावुक अपील की। उन्होंने कहा, 'न्याय और चिकित्सा हड़ताल पर नहीं जा सकते। क्या हम अब सर्वोच्च न्यायालय के बाहर जाकर बैठ सकते हैं?' पीठ ने अपने आदेश में कहा, 'डॉक्टरों ने आशंका जताई है कि उनमें से कुछ पर पिछले दिनों हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के कारण कार्रवाई की जा रही है। हमें आश्वासन दिया गया है कि डॉक्टर काम पर वापस लौट आएंगे… और आज (22 अगस्त 2024) के आदेश के बाद काम पर वापस आने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।'


पांच प्रमुख निर्देश- दो सप्ताह के भीतर सुधार करें

1- स्वास्थ्य सचिव एक सप्ताह के भीतर राज्य के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों के साथ बैठक करके काम पर लौटने के इच्छुक डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। सभी राज्य दो सप्ताह के भीतर सुधारात्मक उपाय करें।
2- सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश यह सुनिश्चित करे कि चिकित्सा प्रतिष्ठानों में हिंसा की किसी भी आशंका को रोका जा सके। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय एक पोर्टल खोले, जहां सभी हितधारक अपने सुझाव प्रस्तुत कर सकें।

3- रेजिडेंट डॉक्टरों की 36 से 48 घंटे की वर्किंग शिफ्ट को अमानवीय बताते हुए पीठ ने नवगठित 10 सदस्यीय राष्ट्रीय टॉस्क फोर्स को इस समस्या पर भी विचार करने का निर्देश दिया।
4- पीठ ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को बाधित न करने का निर्देश देते हुए कहा कि सरकारें आरजी कर मेडिकल कॉलेज की उस घटना के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करें।

5- पीठ ने डॉक्टरों के कल्याण और सुरक्षा के मुद्दे को बार-बार रेखांकित करते हुए कोलकाता की इस घटना के मामले का राजनीतिकरण न करने का सभी से आग्रह किया और कहा कि कानून अपना काम कर रहा है।
………………………

कोलकाता बलात्कार-हत्याकांडः सीबीआइ का दावा, पुलिस ने मामले को छिपाया

  • सीबीआइ की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कोलकाता के आरजी कर अस्पताल ने डॉक्टर से बलात्कार और हत्या के मामले को पश्चिम बंगाल पुलिस ने छापने की कोशिश की। सीबीआइ घटना के पांचवें दिन वहां पहुंची, तब तक क्राइम सीन पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ की जा चुकी थी।
  • राज्य सरकार सीबीआइ के इस दावे को गलत बताया और कहा कि पूरी प्रक्रिया की वीडियो रेकॉर्डिंग की गई है। सबकुछ सीबीआइ को उपलब्ध करा दिया गया है। राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि सीबीआइ ने जांच में यदि कोई प्रगति की हो तो बताए। एक मात्र गिरफ्तारी भी राज्य पुलिस ने ही की है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ को आरजी कर अस्पताल के तत्कालीन प्राचार्य संदीप घोष की पोलिग्राफी जांच कराने की अनुमति दे दी। इसके बाद डॉ घोष को कोलकाता के जीसीओ कम्प्लेक्स ले जाया गया।
  • इस बीच, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध पर ऐसे केंद्रीय कानून बनाने की मांग की जिसमें 15 दिन में सुनवाई पूरी हो जाए और अपराधी को ऐसी सख्त सजा मिल सके जो नजीर बन सके। पत्र में कहा गया कि देशभर में प्रतिदिन बलात्कार के 90 मामले दर्ज किए जा रहे हैं।