चंडीगढ़ में Domino’s को एक ग्राहक से पिज्जा कैरी बैग के लिए 12 रुपए कैरी करना महंगा पड़ गया है। अब डोमिनोज को 12 रुपए के कैरी बैग के एवज में ग्राहक को 1512 रुपए जुर्माने के रूप में देना पड़ेगा।
Domino’s को पिज्जा कैरी बैग के लिए 12 रुपए चार्ज करना महंगा पड़ गया है। दरअसल चंडीगढ़ के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने डोमिनोज पिज्जा इंडिया लिमिटेड और चंडीगढ़ में उसके आउटलेट पर कैरी बैग के लिए 12 रुपए चार्ज करने पर 1,512 रुपए का जुर्माना लगाया है। आयोग ने ये 1,512 रुपए को शिकायतकर्ता पारस शर्मा को जुर्माना के रूप में पेमेंट करने का आदेश दिया है।
इससे पहले शिकायतकर्ता पारस शर्मा ने आरोप लगाया था कि 29 मई 2019 को उन्होंने सेक्टर 15 में एक डोमिनोज आउटलेट गए और एक कैरी बैग के साथ एक गोल्ड कॉर्न पिज्जा का ऑर्डर दिया और 79.75 रुपये का बिल प्राप्त किया। बाद में शिकायतकर्ता को पता चला कि आउटलेट ने एक अलग चालान के माध्यम से उससे कैरी बैग के लिए 12 रुपए अतिरिक्त वसूले लिए हैं। इसके बाद उन्होंने अटेंडेंट से कैरी बैग के पैसे लौटाने को कहा लेकिन अटेंडेंट ने साफ मना कर दिया।
Domino’s ने आरोप को बताया झूठा
Domino’s के संचालक ने शिकायत का विरोध करते हुए लिखित रूप से जवाब दिया कि "शिकायतकर्ता को डिलीवरी देने से पहले पेपर बैग खरीदने के बारे में पूछा गया था और जब उन्होंने इसकी पुष्टि की तब उन्हें अन्य सामानों के साथ उसका भी बिल दिया गया था।" शिकायतकर्ता पारस शर्मा ने Domino’s के जवाब को गलत बताया।
डिलीवरी करने के लिए बाध्य है विक्रेता
दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद आयोग ने कहा कि "विक्रेता माल की पूरी डिलीवरी की स्थिति में डिलीवरी करने के लिए बाध्य है। माल की डिलीवरी का मतलब विक्रेता से खरीदार को पूरी डिलीवरी योग्य स्थिति में भौतिक रूप से सामान सौंपना है। इसके साथ साथ ही कि माल की पैकिंग भी सुपुर्दगी योग्य स्थिति में माल रखने की एक अवस्था है और माल को सुपुर्दगी योग्य स्थिति में लाने के लिए किए गए खर्च को विक्रेता को वहन करना होगा। जैसा कि रिकॉर्ड पर साबित हुआ है कि डोमिनोज इंडिया के स्टोर ने कैरी बैग के लिए शिकायतकर्ता से 12 रुपए की राशि ली थी, डोमिनोज़ इंडिया का उक्त अधिनियम स्पष्ट रूप से अनुचित व्यापार अभ्यास के बराबर है।" जिसके बाद आयोग ने डोमिनोज सेक्टर 15 आउटलेट व जुबिलेंट फूडवर्क्स लिमिटेड को शिकायतकर्ता को 12 रुपए वापस करने का निर्देश दिया, इसके साथ ही मुआवजे के रूप में 1,000 रुपए और मुकदमे की लागत के रूप में 500 रुपए देने का भी निर्देश दिया।
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