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Trump Tariffs: ट्रंप को रास नहीं आई India-Russia की दोस्ती! लगाया 50% टैरिफ, भारत ने दिया ये जवाब

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि अमेरिका ने भारत पर ऐसे कदमों के लिए अतिरिक्त शुल्क लगाने का निर्णय लिया है जो कई अन्य देश भी अपने राष्ट्रीय हित में उठा रहे हैं।

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US President Donald Trump and Prime Minister Narendra Modi

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी (Photo-IANS)

Trump Tariffs on India: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को भारत से होने वाले आयात पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का आदेश जारी किया। यह निर्णय भारत द्वारा रूस से तेल खरीद जारी रखने के जवाब में लिया गया है। व्हाइट हाउस के अनुसार, यह कदम यूक्रेन युद्ध के कारण रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों को और प्रभावी बनाने के लिए उठाया गया है। ट्रंप ने पिछले सप्ताह इस शुल्क की घोषणा की थी, जिसे अब आधिकारिक रूप से लागू किया जा रहा है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति पर जोर

आदेश में कहा गया है कि भारत प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूस से तेल आयात कर रहा है, जिसे अमेरिका अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के लिए खतरा मानता है। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि यह शुल्क अमेरिकी सीमा शुल्क क्षेत्र में भारत से आयातित वस्तुओं पर लागू होगा और यह मौजूदा शुल्कों के अतिरिक्त होगा। यह नया शुल्क आदेश जारी होने के 21 दिन बाद प्रभावी होगा, लेकिन 17 सितंबर से पहले अमेरिकी सीमा शुल्क से क्लियर होने वाली वस्तुओं को इससे छूट मिलेगी।

शुल्क के दायरे और नियम

आदेश के अनुसार, आयातित वस्तुओं को प्रिविलेज्ड फॉरेन स्टेटस के तहत लाया जाएगा, जो सख्त सीमा शुल्क नियमों के अधीन होगा। कुछ विशेष श्रेणियों या पहले से लागू व्यापार समझौतों के तहत छूट प्राप्त वस्तुओं पर यह शुल्क लागू नहीं होगा। ट्रंप ने इस आदेश में बदलाव का अधिकार भी अपने पास रखा है, ताकि भारत या रूस की नीतियों में परिवर्तन या जवाबी कार्रवाई की स्थिति में इसे संशोधित किया जा सके।

अमेरिकी एजेंसियों को निगरानी का निर्देश

आदेश में अमेरिकी वाणिज्य विभाग, विदेश विभाग, कोषागार विभाग और अन्य एजेंसियों को अन्य देशों द्वारा रूस से तेल व्यापार की निगरानी करने और आवश्यकता पड़ने पर समान कदमों की सिफारिश करने का निर्देश दिया गया है। यह कदम अमेरिका की रूस के खिलाफ प्रतिबंधों को सख्त करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

जानिए भारत सरकार की प्रतिक्रिया

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि अमेरिका ने भारत पर ऐसे कदमों के लिए अतिरिक्त शुल्क लगाने का निर्णय लिया है जो कई अन्य देश भी अपने राष्ट्रीय हित में उठा रहे हैं। हम दोहराते हैं कि ये कदम अनुचित, अनुचित और अविवेकपूर्ण हैं। भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।

'ट्रंप का 50% टैरिफ़ आर्थिक ब्लैकमेल'

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा, ट्रंप का 50% टैरिफ़ आर्थिक ब्लैकमेल है- भारत को एक अनुचित व्यापार समझौते के लिए धमकाने का एक प्रयास। प्रधानमंत्री मोदी को अपनी कमज़ोरी को भारतीय जनता के हितों पर हावी नहीं होने देना चाहिए।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर की प्रतिक्रिया

इस फैसले पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने चिंता जताई। उन्होंने कहा, यह हमारे लिए अच्छी खबर नहीं है। अगर कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंचता है, तो हमारे उत्पाद अमेरिका में कई लोगों के लिए अप्राप्य हो जाएंगे। थरूर ने भारत के प्रतिस्पर्धी देशों जैसे वियतनाम, इंडोनेशिया, फिलीपींस, बांग्लादेश और पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए कहा कि इन देशों पर कम टैरिफ के कारण अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात की मांग प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा, लोग सस्ते विकल्पों की ओर जाएंगे, जिससे भारत का निर्यात प्रभावित होगा।

भारत के लिए चुनौतियां और रणनीति

थरूर ने सुझाव दिया कि भारत को अपने निर्यात बाजारों में विविधता लाने की आवश्यकता है। उन्होंने ब्रिटेन के साथ हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौते और यूरोपीय संघ के साथ चल रही बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को नए बाजारों की तलाश करनी होगी। हालांकि, उन्होंने अल्पावधि में इस शुल्क को भारत के लिए एक झटके के रूप में देखा।

आर्थिक प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं

यह शुल्क भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को प्रभावित कर सकता है, खासकर तब जब भारत रूस से तेल आयात पर अपनी स्थिति स्पष्ट करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपनी ऊर्जा नीति और वैश्विक व्यापार रणनीति में संतुलन बनाना होगा। इस बीच, अमेरिका की यह कार्रवाई अन्य देशों के लिए भी एक चेतावनी हो सकती है जो रूस के साथ व्यापारिक संबंध बनाए रखे हुए हैं। भारत को अब वैकल्पिक बाजारों और व्यापार समझौतों पर ध्यान देना होगा ताकि इस शुल्क के प्रभाव को कम किया जा सके। साथ ही, रूस के साथ तेल व्यापार पर भारत की स्थिति और अमेरिका के साथ कूटनीतिक बातचीत इस मुद्दे के भविष्य को निर्धारित करेगी।


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