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E-20 संगत इंजन का डेटा नहीं लेकिन गाडिय़ों को नही हो रहा नुकसान, मंत्री सुरेश गोपी ने कर दिया साफ

E-20 Update: E-20 पेट्रोल के बारे में मंत्री सुरेश गोपी ने अहम जानकारी दी है। क्या कहा गोपी ने? आइए जानते हैं।
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भारत

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Tanay Mishra

Jul 28, 2026

E-20 Petrol

E-20 पेट्रोल (File Photo)

पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E-20) को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच सरकार ने संसद में बड़ी जानकारी दी है। वहीं इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर लोगों का आक्रोश झेल रहे केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मेटा, एक्स (ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ अदालत की शरण ली है। पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी (Suresh Gopi) ने राज्यसभा में सवाल के जवाब में बताया कि सरकार ने इस बात का कोई आकलन नहीं किया है कि देश में कितने प्रतिशत गाड़ियों का इंजन E-20 पेट्रोल के उपयोग के अनुरूप है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि E-20 से गाडि़यों के इंजन को नुकसान होने की कोई आधिकारिक रिपोर्ट सामने नहीं आई है लेकिन माइलेज में 3-5% की कमी हो सकती है।

परीक्षण के बाद एथेनॉल नीति को किया गया लागू

गोपी ने बताया कि ऑटोमोबाइल कंपनियों, तेल कंपनियों और तकनीकी संस्थाओं के वैज्ञानिक परीक्षण के बाद एथेनॉल नीति को लागू किया गया। गोपी ने अध्ययनों से यह साबित होने का दावा कि पुराने E-20 के कारण पुराने वाहनों की परफॉर्मेंस को कोई खास बदलाव या असामान्य नुकसान नहीं हुआ है। उल्लेखनीय है कि सोशल मीडिया पर चल रही ज़बरदस्त चर्चा में E-20 से गाडि़यों के फ्यूल टैंक, इंजन में खराबी के साथ स्मूथ ड्राइविंग और माइलेज प्रभावित होने के दावे किए जा रहे हैं।

कब से हैं प्रचलन में?

E-20 पेट्रोल साढ़े तीन साल से और E-19/20 ढाई साल से ज़्यादा समय से इस्तेमाल किया जा रहा हूं है।-वाहन निर्माता कंपनियाँ होने हुए भी गाडि़यों के वारंटी दायित्व पूरे कर रहे। बताया का रहा है कि देश में एक एक प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी ने 2025-26 में डेढ़ करोड़ बिना E-20 संगत इंजन वाली गाड़ियों की सर्विस की लेकिन पुर्जों में घिसाव या अन्य असामान्यता की रिपोर्ट नहीं मिली।

फायदे और नुकसान

E-20 पेट्रोल पर्यावरण के लिए अच्छा है। यह कम विषैली गैसों का उत्सर्जन करता है, जिससे हवा साफ होती है। उच्च ऑक्टेन रेटिंग से इंजन में नॉकिंग कम होती है और दहन बेहतर होता है। देश की आयातित तेल पर निर्भरता घटती है, किसानों की आय बढ़ती है और विदेशी मुद्रा बचती है। हालांकि एथेनॉल की कम ऊर्जा से माइलेज 3-8% तक गिर जाता है। पुरानी गाड़ियों (BS4 से पहले) में रबर सील, गास्केट, फ्यूल पंप खराब हो सकते हैं। पानी सोखने की आदत से जंग लगने का खतरा बढ़ता है। रखरखाव खर्च बढ़ सकता है।