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‘माता-पिता चाहते हैं अमेरिका लौट जाए अभिजीत’, CJP संस्थापक के परिजनों से मिले शिवसेना मंत्री संजय शिरसाट

Sanjay Shirsat Meets Abhijeet Dipke Parents: शिवसेना नेता और महाराष्ट्र मंत्री संजय शिरसाट ने CJP संस्थापक अभिजीत दीपके के माता-पिता से मुलाकात की है। जानिए उन्होंने क्या कुछ कहा है?
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भारत

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Rahul Yadav

Jul 27, 2026

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Sanjay Shirsat and Abhijeet Dipke (Photo : ANI)

CJP Founder Abhijeet Dipke: महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के माता-पिता से मुलाकात की है। उन्होंने कहा कि दीपके परिवार का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। अभिजीत का अमेरिका छोड़कर आंदोलन से जुड़ना उनका निजी फैसला था। शिरसाट के मुताबिक, अभिजीत के माता-पिता आज भी चाहते हैं कि वह अमेरिका लौटकर अपनी पढ़ाई पूरी करें। उनको जो नौकरी मिली है उसे जॉइन करें और वहीं अपना भविष्य बनाएं। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुलाकात को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

'अमेरिका लौटकर पढ़ाई पूरी करें'

शिरसाट के अनुसार, अभिजीत के माता-पिता आज भी चाहते हैं कि वह अमेरिका लौट जाएं। उन्होंने कहा कि परिवार की इच्छा है कि अभिजीत अपनी पढ़ाई पूरी करें, जिस नौकरी का उन्हें ऑफर मिला था उसे जॉइन करें और अपना भविष्य वहीं बनाएं। शिरसाट ने कहा कि वह अभिजीत, उनकी बहन और पूरे परिवार के साथ हमेशा सौहार्दपूर्ण संबंध रखते आए हैं।

संजय राउत पर भी साधा निशाना

इस दौरान शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत के अगले शिक्षा मंत्री को लेकर दिए गए बयान पर भी संजय शिरसाट ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी मंत्री या किसी पद पर नियुक्ति का फैसला करने से पहले संजय राउत से सलाह नहीं लेंगे। यह फैसला पूरी तरह प्रधानमंत्री का अधिकार है। शिरसाट ने यह भी कहा कि संजय राउत निराश दिखाई देते हैं और अक्सर इसी तरह के बयान देते रहते हैं।

छात्र आंदोलन से राष्ट्रीय पहचान तक

परीक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं और NEET पेपर लीक के मुद्दे पर CJP के नेतृत्व में 36 दिनों तक आंदोलन चला था। आंदोलन समाप्त होने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद अभिजीत दीपके राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गए। संजय शिरसाट ने कहा कि यह सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं था बल्कि युवाओं की ऐसी पहल थी जिसने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया।

करियर छोड़ छात्रों के मुद्दों को दी प्राथमिकता

संजय शिरसाट के मुताबिक, अभिजीत दीपके ने अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में उच्च शिक्षा हासिल की थी और उन्हें वहीं नौकरी का अवसर भी मिला था। हालांकि उन्होंने विदेश में करियर बनाने के बजाय भारत लौटकर छात्रों के मुद्दों पर काम करने का फैसला किया। शिरसाट ने कहा कि परिवार चाहता था कि अभिजीत अमेरिका में ही अपना भविष्य बनाएं लेकिन उन्होंने युवाओं के हितों को प्राथमिकता देते हुए आंदोलन का रास्ता चुना।

यह अभियान आगे भी बदलाव की दिशा तय करेगा

संजय शिरसाट ने कहा कि आंदोलन की सफलता का श्रेय अभिजीत दीपके ने कभी अकेले लेने की कोशिश नहीं की। उनके अनुसार, इस अभियान को देशभर के छात्रों और युवाओं का व्यापक समर्थन मिला। उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र का एक युवा राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा सुधार की चर्चा का केंद्र बना। यह पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। शिरसाट ने विश्वास जताया कि यह पहल भविष्य में भी शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक बदलाव की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।