31 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सुप्रीम कोर्ट ने दिया बयान, सिर्फ आंदोलन होने से लाठीचार्ज नहीं कर सकते

आंदोलनों के दौरान लाठीचार्ज पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त बयान दिया है। क्या कहना है सुप्रीम कोर्ट का? आइए जानते हैं।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भारत

•

image

Tanay Mishra

•

Updated: 28 Jul 2026, 2:40 AM IST

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट (Photo - ANI)

जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सख्त बयान दिया है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार सिर्फ इस आंदोलन के आधार पर लाठीचार्ज नहीं किया जा सकता। सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह बयान उस समय दिया जब देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग से जुड़ी याचिकाओं का उल्लेख उसके सामने किया गया। इनमें एक याचिका उन छात्रों के समूह की ओर से दायर की गई है, जिन्होंने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उनके साथ मारपीट की। याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील फौजिया शकील और विकास सिंह ने कोर्ट के सामने यह मामला उठाया। कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में चले छात्र आंदोलन की वजह से आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा और धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा।

पुलिसकर्मी भी घायल

इस घटना के दौरान न सिर्फ प्रदर्शनकारी, बल्कि पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं और उनकी बात भी सुनी जानी चाहिए। इस पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि हर व्यक्ति की जान महत्वपूर्ण है, चाहे वह कोई भी हो। हम सरकार से यह भी जवाब मांग सकते हैं कि हिंसक प्रदर्शनकारियों से घायल हुए पुलिसकर्मियों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण क्यों उपलब्ध नहीं कराए गए।

शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करना विरोध-प्रदर्शन करण

सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करना मौलिक अधिकार है और इसकी रक्षा की जानी चाहिए। सिर्फ इसलिए कि कहीं आंदोलन हो रहा है, पुलिस लाठीचार्ज या ज़रूरत से ज्यादा बल प्रयोग नहीं कर सकती। सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी कहा कि केंद्र सरकार इस मामले में निष्पक्ष तरीके से अदालत की सहायता करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई से जुड़ी सभी याचिकाओं पर एक साथ 28 जुलाई को सुनवाई करेगी।

पूरे देश के लिए तय प्रोटोकॉल जरूरी

सीजेआई ने कहा कि प्रदर्शन के लिए पूरे देश में एक तय प्रोटोकॉल होना चाहिए। प्रदर्शन के लिए उचित जगह होनी चाहिए, ताकि बेवजह रोक-टोक न हो। अगर प्रदर्शन में असामाजिक तत्व हों, तो उनसे अलग तरीके से निपटा जा सकता है। यह सिर्फ दिल्ली का मामला नहीं है, ज़रूरत है कि पूरे देश में एक समान नियम हो।