
Mahadev App Case: इंडियन प्रीमियर लीग यानी IPL के कारण देश में बेटिंग के चलन को काफी बढ़ावा मिला है। आपने भी मोबाइल या लैपटॉप यूज करने वक्त इस बात को महसूस किया होगा कि हर दूसरे तीसरे मिनट पर किसी न किसी बेटिंग ऐप का प्रचार दिख ही जाता है। ऐसा ही एक बेटिंग ऐप है महादेव बेटिंग ऐप। यह बेटिंग ऐप तब खूब चर्चा में आया, जब बॉलीवुड सुपरस्टार रणबीर कपूर, कपिल शर्मा और श्रद्धा कपूर जैसी फिल्मी हस्तियों को ED ने समन जारी किया और पेश होने के लिए कहा। यह बेटिंग ऐप ऑपरेट कैसे होता था इसे लेकर ED ने बड़ा खुलासा किया है।
क्या खुलासा हुआ
इस केस की जांच कर रही केन्द्रीय एजेंसी ED का कहना है कि कंपनी के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल दुबई से महादेव बेटिंग ऐप ऑपरेट कर रहे थे। इस केस में ED ने आरोप लगाया है कि वे नए उपयोगकर्ताओं का पंजीकरण करने के लिए ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप का इस्तेमाल करते थे, ID बनाते थे एवं मल्टी लेवल बेनामी बैंक एकाउंट्स के नेटवर्क से काले धन को वैध बनाया करते थे।
बता दें कि ED ने अब तक इस केस में 4 लोगों की गिरफ्तारी की है, जिनमें दो सहोदर भाई सुनील दम्मानी, अनिल दम्मानी हैं। इन दोनों भाइयों के अलावा छत्तीसगढ़ पुलिस के ASI चंद्रभूषण वर्मा और सतीश चंद्राकर शामिल भी ED की गिरफ्त में है।
पुलिस से लेकर राजनेता तक सब शामिल
बता दें कि छत्तीसगढ़ के अलावे देश के अलग-अलग राज्यों में महादेव बेटिंग ऐप के करीब 30 कॉल सेंटर खोले गए थे। बड़े शातिराना ढंग से यही से सबकुछ संचालित हो रहा था। अनिल दम्मानी और सुनील दम्मानी जो सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के बेहद करीबी हैं उनकी मदद से भारत में कारोबार को बढ़ा रहा था। अब आपको समझाते हैं इस सट्टे के जरिए पैसा कैसा बनाया जा रहा था ?
दरअसल, अनिल और सुनील की मदद से KYC के जरिए बड़ी संख्या में बेनामी बैंक खाते खोले गए। मेन प्रमोटर और कॉल सेंटर ऑपरेटर की मिली भगत से इस बैटिंग ऐप सिंडिकेट को चलाया जा रहा था। पैसों का लेन देन बढ़ता जा रहा था इसीलिए एजेंसी की नजरों से बचने के लिए और इस सिंडिकेट को बिना किसी व्यवधान के चलाने के लिए पुलिस, नेता और अधिकारीयों को भी हिस्सेदारी दी जाने ली।
हवाला के जरिए लेन-देन
इस ऐप को लेकर और भी बड़े खुलासे हुए। दरअसल अनिल का रोल इस सिंडिकेट में सिर्फ ऑनलाइन बेटिंग ऐप को ही चलाना ही नहीं, बल्कि बड़े लेवल पर हवाला के जरिए आने वाले पैसे को बेटिंग ऐप में इस्तेमाल करने के साथ-साथ पुलिस, राजनेता और अधिकारी जो इस ऐप से लाभान्वित होते थे, उन तक पैसा पहुंचा जाता था ताकि काम स्मूथली चलता रहे।
UAE में बैठे प्रमोटर छत्तीसगढ़ में हवाला के जरिए मोटा कैश अनिल और सुनील को भेजते थे। उसके बाद ASI चन्द्र भूषण वर्मा तक ये पैसा पहुंचाया जाता था, जिसकी जिम्मेदारी थी कि छत्तीसगढ़ पुलिस में तैनात पुलिस अधिकारी और बड़े राजनीतिक प्रभाव वाले लोगों तक इस पैसे को बतौर रिश्वत पहुंचाना।
यह पैसा छतीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सदर बाजार में एक ज्वेलरी शॉप के यहां भेजा जाता था। पिछले दो-तीन वर्षों में हवाला के जरिए 60-65 करोड़ का ट्रांजेक्शन किया जा चुका है। ED ने बताया कि कई लोग जो इस खेल में शामिल हैं अभी फरार चल रहे हैं। उन्हें खोजा जा रहा है।
नाम खुलासा होने पर आ सकता है भूचाल
ED ने इस केस की जांच में पाया कि कई बड़े और रसूखदार नेता और अधिकारी की इसमें संलिप्तता है। सबने इस ऐप के जरिए खूब पैसे बनाये। आने वाले दिनों में छतीसगढ़ में विधानसभा के चुनाव होने हैं। ऐसे में अगर कोई बड़े नाम का खुलासा ED कर देती है तो यहां की राजनीति में भूचाल आ सकता है।
Published on:
06 Oct 2023 07:57 pm
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