
EPFO का पोर्टल अपग्रेड। (Image: Gemini)
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने हाल ही में अपना सॉफ्टवेयर और पोर्टल अपग्रेड किया है। इसे EPFO 3.0 नाम दिया गया है। दरअसल, पुराना पोर्टल अब नए क्लाउड-बेस्ड और आधुनिक यूजर इंटरफेस वाले पोर्टल में बदल गया है।
नए अपडेट के अनुसार, क्लेम सेटलमेंट अब AI की मदद से 24 घंटे के अंदर हो जाता है। मेंबर्स अब ATM और UPI के जरिए PF राशि तुरंत निकाल सकते हैं। शिक्षा, विवाह, मकान, बेरोजगारी आदि के नाम पर आंशिक निकासी बहुत आसान और तेज हो गई है।
सदस्य खुद ही बिना दस्तावेज के प्रोफाइल में नाम, जन्मतिथि, लिंग आदि अपडेट कर सकते हैं। पोर्टल में AI अनुवाद के साथ हिंदी सहित कई क्षेत्रीय भाषाओं का सपोर्ट जोड़ा गया है। मोबाइल ऐप बेहतर बनाया गया है, जिससे क्लेम स्टेटस और पासबुक ट्रैकिंग आसान हो गई है।
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने एक अधिकारी के हवाले से बताया कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन कोर बैंकिंग सॉल्यूशन की ओर बढ़ रहा है। यह लेबर कोड लागू होने के बाद संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के श्रमिकों को कवर करने के लिए रिटायरमेंट फंड निकाय के पैमाने में विस्तार की पृष्ठभूमि में आया है।
रिटायरमेंट फंड निकाय के पास वर्तमान में लगभग 8 करोड़ सक्रिय सदस्य हैं और यह लगभग 28 लाख करोड़ रुपये का कोष बनाए रखता है। इस बीच, 8 करोड़ EPFO खाताधारकों के लिए एक और अच्छी खबर है।
दरअसल, गृह मंत्रालय (MHA) ने 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे ऑनलाइन ठगी के बढ़ते खतरे को रोकने के लिए एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है। यह कमेटी 'किल स्विच' नाम का एक बटन बनाने पर विचार कर रही है।
इस 'किल स्विच' की मदद से अगर कोई व्यक्ति ठगी का शिकार होने लगे, तो वह तुरंत अपने बैंक अकाउंट या मोबाइल से सारे पैसे के लेन-देन (ट्रांजैक्शन) रोक सकता है। इससे स्कैमर को पैसे ट्रांसफर होने से पहले ही रोका जा सकेगा।
प्रस्ताव देने वाले अधिकारियों के अनुसार, बैंकिंग सिस्टम में धोखाधड़ी (फ्रॉड) से होने वाले नुकसान को कवर करने के लिए एक इंश्योरेंस व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है।
दिसंबर के अंत में बनी एक अंतर-विभागीय कमेटी 'किल स्विच' के प्रस्ताव की जांच कर रही है। इस प्रस्ताव में एक मुख्य विचार यह है कि सभी बैंकों के पेमेंट एप्लिकेशन (जैसे UPI और अन्य बैंकिंग ऐप) में एक इमरजेंसी बटन जोड़ा जाना चाहिए।
अगर यूजर को शक हो कि कोई धोखेबाज (स्कैमर) उसे ठगने की कोशिश कर रहा है, तो वह इस बटन को दबाकर तुरंत अपने सारे बैंकिंग ऑपरेशन (पैसे ट्रांसफर, भुगतान आदि) को फ्रीज कर सकता है। इससे ठगी होने से पहले ही पैसे की सुरक्षा हो जाएगी।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पेमेंट एप्लिकेशन जैसे UPI ऐप या बैंक ऐप में किल स्विच हो सकता है और जैसे ही यूजर उस बटन को दबाएगा, कोई भी बैंक ट्रांजैक्शन संभव नहीं होगा।
अधिकारी ने कहा कि कमेटी यह भी देख रही है कि क्या ऐसे ट्रांजैक्शन की पहचान करना संभव है जो धोखाधड़ी वाले हो सकते हैं और क्या यह सुनिश्चित करने का कोई तरीका है कि अगर ऐसा कोई ट्रांजैक्शन होता है, तो उसे तुरंत कई फर्जी खातों में ट्रांसफर न किया जा सके।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम में, धोखेबाज वीडियो कॉल के जरिए पुलिस या अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारियों का रूप धारण करते हैं और पीड़ितों से कहते हैं कि वे गंभीर अपराधों के लिए जांच के दायरे में हैं।
विश्वसनीयता के लिए लीक हुए पर्सनल डेटा का इस्तेमाल करके, वे डर और जल्दबाजी का माहौल बनाते हैं और पीड़ितों को फर्जी आईडी व गिरफ्तारी वारंट दिखाकर घंटों तक कॉल पर रखते हैं।
पीड़ितों को गिरफ्तारी से बचने के लिए बड़ी रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता है। माना जाता है कि पूरे भारत में पीड़ितों ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम में सामूहिक रूप से लगभग 3,000 करोड़ रुपये गंवाए हैं, जिसके बाद पिछले अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया।
Published on:
21 Jan 2026 11:16 am
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