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बैंक मैनेजर की नौकरी छोड़कर शख्स बना किसान, 110 देशी सब्जियों के बीजों से छत पर शुरू की खेती

Organic Agriculture: आंध्र प्रदेश के अराकू पहाड़ियों में मिलने वाली अनोखी 1 इंच कड़वी तोरी जैसी दुर्लभ देशी किस्मों को टी. सांबा शिवा ने संरक्षित कर अपने 110+ देशी बीजों के कलेक्शन किया है।

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भारत

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Devika Chatraj

Apr 28, 2026

बैंक की नौकरी छोड़कर किसान बना शख्स (AI)

Araku Valley Tribal Farming: आंध्र प्रदेश की अराकू पहाड़ियों में एक बहुत ही अनोखी और बेहद छोटी कड़वी तोरी (बिटर गॉर्ड) पाई जाती है, जो मुश्किल से एक इंच जितनी होती है। इतनी छोटी और खास किस्म होने की वजह से ये आम बाजारों में नहीं मिलती और बहुत कम लोग इसके बारे में जानते हैं। लेकिन ये आज भी बची हुई है क्योंकि वहां के आदिवासी लोग इसे अपनी पारंपरिक खेती के तौर पर पीढ़ियों से उगाते आ रहे हैं। इसी तरह की अनोखी देशी किस्मों को टी. सांबा शिवा (जिन्हें लोग सांबाजी कहते हैं) ने खोजा, संभाला और अपने देशी बीजों के बड़े संग्रह का हिस्सा बना दिया।

बचपन से ही खेती का शौक

सांबा शिवा को बचपन से ही खेती का बहुत शौक था। उन्होंने सिर्फ 9 साल की उम्र में अपनी पहली सब्जी उगा ली थी, जिसमें उनकी नानी ने उन्हें बहुत मदद की थी। नानी के घर का छोटा-सा किचन गार्डन देखकर ही उन्हें पौधों और बीजों से लगाव हो गया था।

बैंक की नौकरी से किसान बनने तक का सफर

सांबा शिवा ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 33 साल नौकरी की और 2014 में शाखा प्रबंधक के पद से रिटायर हुए। नौकरी के दौरान वे अलग-अलग राज्यों में रहे, लेकिन हर जगह वे अपने साथ देशी बीज ले जाते और छोटा-सा बगीचा जरूर बनाते थे।

पूरी तरह प्राकृतिक खेती

वे खेती में किसी भी प्रकार के रासायनिक या जहरीले खाद का उपयोग नहीं करते। वे सुभाष पालेकर की जीरो बजट प्राकृतिक खेती पद्धति अपनाते हैं। इसमें वे घर पर बने प्राकृतिक घोलों का इस्तेमाल करते हैं, जैसे गोबर, गोमूत्र, गुड़ और दाल से तैयार जीवामृत, बीजों को सुरक्षित रखने के लिए बीजामृत, तथा कीटों से बचाव के लिए प्राकृतिक स्प्रे जैसे दशपर्णी अर्क और पंचपर्णी अर्क। इन तरीकों से उनकी भूमि उपजाऊ बनी रहती है और फसल पूरी तरह प्राकृतिक होती है।

110 से ज्यादा देशी किस्में उगाते हैं

उनका खेत किसी देशी बीजों के संग्रहालय जैसा है। वहां 110 से ज्यादा तरह की देसी सब्जियां उगाई जाती हैं।

  • बैंगन की 15 किस्में
  • लोबिया की 10 किस्में
  • मिर्च की 7 किस्में

कई तरह की जड़ और पत्तेदार सब्जियां

  • 1 फुट लंबी भिंडी
  • 2 फुट लंबी लोबिया
  • सालभर फल देने वाली लौकी
  • 3 साल तक चलने वाली बैंगन की किस्म और सबसे खास है अराकू की वो 1 इंच वाली कड़वी तोरी।

आदिवासी इलाकों से मिली अनोखी फसलें

सांबा शिवा ने अलग-अलग आदिवासी इलाकों से भी कई दुर्लभ बीज इकट्ठा किए हैं। अराकू घाटी से मिला कांटोला भी इनमें से एक है, जो वहां के लोगों की रोजमर्रा की खाने की चीज है। इसके अलावा ओडिशा, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु से भी कई पुरानी देशी किस्में उन्होंने जुटाई हैं।

साल में तीन बार फसल

उनका खेत साल में तीन बार फसल देता है, इसलिए खेत लगभग पूरे साल हरा-भरा रहता है।

बीज बचाने और बांटने का काम

उनका असली मकसद सिर्फ खेती करना नहीं है, बल्कि देशी बीजों को बचाना और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है। वे अपने बीज दूसरे किसानों, शहरी गार्डनिंग करने वालों और नए किसानों के साथ भी शेयर करते हैं। उनका मानना है कि बीज तभी जिंदा रहते हैं जब उन्हें बार-बार बोया और आगे बढ़ाया जाता है।