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AAP के राघव ही नहीं इन नेताओं ने दल-बदल कर बचाई थी कुर्सी, TDP के भी 4 राज्यसभा सांसद हुए थे BJP में शामिल

TDP MPs merger BJP 2019 Rajya Sabha: आम आदमी पार्टी के 7 राज्य सभा सांसद पार्टी छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए है। यह पहली बार नहीं है जब नेताओं ने अपनी पार्टी छोड़ दूसरे दल में शामिल हुए है और कुर्सी भी बचा ली।
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भारत

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Ashib Khan

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Updated: 28 Apr 2026, 9:45 AM IST

बीजेपी में शामिल हुए राघव चड्ढा (Photo-IANS)

AAP MPs merge with BJP Rajya Sabha: आम आदमी पार्टी के सात राज्य सभा सांसदों द्वारा पार्टी से इस्तीफा देने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। सभी सांसदों को उच्च सदन में बीजेपी में विलय की मान्यता मिल चुकी है। इसके साथ ही राज्य सभा में बीजेपी के सांसदों की संख्या भी 113 हो गई है। इसको लेकर राज्य सभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर दी है। AAP के सातों सांसदों पर दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई नहीं हुई है और सभी की राज्य सभा सदस्यता भी बरकरार है।

यह पहली बार नहीं है जब किसी पार्टी के सांसदों और विधायकों ने दूसरे दल में विलय किया हो और अपनी सदस्यता भी बचाई हो। इससे पहले भी कई बार ऐसा देखने को मिल चुका है। 

TDP के सांसदों ने BJP में किया विलय

आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव 2019 में चंद्रबाबू नायडू की पार्टी को हार का सामना करना पड़ा और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने भारी बहुमत से सरकार बना ली थी। विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीडीपी को राज्य सभा में भी बड़ा झटका लगा। उस समय पार्टी के राज्य सभा में 6 सांसद थे, लेकिन इनमें से 4 सांसदों ने पार्टी छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए। इन सांसदों में वाई.एस. चौधरी, सी.एम. रमेश, टी.जी. वेंकटेश और जी. मोहन राव शामिल थे। इस तरह दो तिहाई होने के कारण इन सांसदों की राज्य सभा सदस्यता नहीं गई। 

अरुणाचल प्रदेश में विधायकों का हुआ विलय

अरुणाचल प्रदेश की राजनीति में 2016 में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला था। उस समय कांग्रेस के 46 में से 43 विधायक एक साथ अलग हो गए। पहले इन विधायकों ने पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल का रुख किया और बाद में राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान BJP के साथ आ गए। इस पूरे घटनाक्रम में पेमा खांडू की अहम भूमिका रहीष विधायकों ने इसे वैध विलय बताया, जबकि कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ करार दिया।

गोवा में कांग्रेस के विधायक बीजेपी में गए

2022 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गोवा के विधायकों के बीजेपी में शामिल हो गए। उस समय कांग्रेस के कुल 11 विधायकों में से 8 विधायक सत्तारूढ़ बीजेपी में मिल गए। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री दिगंबर कामत और नेता माइकल लोबो जैसे प्रमुख नाम शामिल थे। इन विधायकों ने दावा किया कि यह कदम पार्टी विभाजन और स्थिर सरकार के हित में है, जबकि कांग्रेस ने इसे स्पष्ट रूप से दलबदल बताया। 

तेलंगाना में कांग्रेस विधायक TRS में हुए शामिल

2019 में तेलंगाना में कांग्रेस के कई विधायक सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (तत्कालीन TRS) में शामिल हो गए थे। पार्टी के 18 विधायकों ने दल बदलकर TRS का दामन थाम लिया था और इसे विलय बताया। इन विधायकों ने दसवीं अनुसूची के तहत दो-तिहाई समर्थन का हवाला देकर अपने कदम को वैध ठहराया। विधानसभा अध्यक्ष ने भी इस विलय को मान्यता दे दी। 

क्या है दल बदल विरोधी कानून

दल-बदल विरोधी कानून को दसवीं अनुसूची के तहत लागू किया गया। इसका उद्देश्य निर्वाचित प्रतिनिधियों को बार-बार पार्टी बदलने से रोकना है। इस कानून के अनुसार, यदि कोई सांसद या विधायक स्वेच्छा से अपनी पार्टी छोड़ता है या पार्टी व्हिप के खिलाफ वोट करता है, तो उसे अयोग्य ठहराया जा सकता है। हालांकि, यदि किसी दल के दो-तिहाई सदस्य किसी अन्य दल में विलय करते हैं, तो इसे वैध माना जाता है। अयोग्यता का फैसला संबंधित सदन के अध्यक्ष या सभापति द्वारा लिया जाता है।