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राज्य सभा में 113 हुई बीजेपी सांसदों की संख्या, AAP के 7 बागी MP के लिए जारी हुई नई अधिसूचना

आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले सात सांसदों को लेकर राज्य सभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी की है। अधिसूचना के मुताबिक सातों बागी सांसदों को बीजेपी में विलय होने की मंजूरी मिल गई है।

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भारत

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Ashib Khan

Apr 27, 2026

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AAP के बागी सांसदों को मिली मान्यता (Photo-IANS)

AAP Rajya Sabha MPs Join BJP: आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले सात सांसदों को लेकर राज्य सभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी की है। अधिसूचना के मुताबिक सातों बागी सांसदों को बीजेपी में विलय होने की मंजूरी मिल गई है। इसी के साथ राज्य सभा में बीजेपी के सदस्यों की संख्या 113 पहुंच गई है।

किस पार्टी के कितने सांसद

बता दें कि राज्य सभा में अब आम आदमी पार्टी के महज तीन सांसद बचे हैं। इसके अलावा कांग्रेस के 29, तृणमूल कांग्रेस के 13, द्रविड मुन्नेत्र कषगम के 8, जेडीयू के 4, एनसीपी के 4, समाजवादी पार्टी के 4, राजद के 3 और जेएमएम के 2 सांसद हैं। 

आम आदमी पार्टी को लगा झटका

बता दें कि पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने है। इससे पहले 10 में से सात राज्य सभा सांसदों का पार्टी से इस्तीफा देना और बीजेपी में शामिल होना AAP के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि 2022 के विधानसभा चुनाव में राघव चड्ढा और संदीप पाठक ने पार्टी की जीत में अहम भूमिका निभाई थी।

AAP ने की थी सदस्यता खत्म करने की मांग

दरअसल, पार्टी से बागी हुए तीन सांसदों के खिलाफ राज्य सभा चेयरमैन को अर्जी भी दी थी। पार्टी ने इन सांसदों की सदस्यता खत्म करने की भी मांग की। पार्टी ने दलील दी थी जब इन तीन सांसदों ने AAP छोड़ने का ऐलान किया था, उस समय 4 अन्य सांसद मौजूद नहीं थे। ऐसे में ये अल्पमत में है और इनका पार्टी छोड़ना दल-बदल कानून के तहत आता है।

किन सांसदों ने छोड़ी पार्टी


1- राघव चड्ढा

2- स्वाति मालीवाल

3- हरभजन सिंह

4- संदीप पाठक

5- अशोक मित्तल

6- विक्रमजीत सिंह साहनी

7- राजिंदर गुप्ता

AAP के बागी सांसदों पर दल-बदल कानून क्यों नहीं होगा लागू

बता दें कि दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के बावजूद आप के सांसदों पर दल-बदल कानून लागू नहीं होगा, क्योंकि इसमें यह प्रावधान है कि यदि किसी विधायक दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य अलग या किसी अन्य पार्टी में विलय कर लेते हैं, तो उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा।

कानून में क्या कहा गया है? 

कानून के मुताबिक किसी सदन का सदस्य दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा, यदि उसकी मूल राजनीतिक पार्टी किसी अन्य राजनीतिक पार्टी में विलय कर जाती है और वह सदस्य यह दावा करता है कि वह और उसकी मूल पार्टी के अन्य सदस्य उस दूसरी पार्टी या विलय से बनी नई पार्टी के सदस्य बन गए हैं। यदि यह संख्या दो-तिहाई से कम होती, तो विलय करने वाले सहयोगियों को अपनी राज्यसभा सदस्यता छोड़नी पड़ती है।

इसलिए, यदि राघव चड्ढा अकेले पार्टी छोड़ते, तो उन्हें अपनी राज्यसभा सदस्यता छोड़नी पड़ती है। लेकिन ऐसा नहीं है, क्योंकि उनके साथ स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी भी शामिल हैं।