
Former Chief Justice DY Chandrachud ( photo - ANI )
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने अपने पद से हटने के महीनों बाद भी अभी तक सुप्रीम कोर्ट द्वारा आवंटित सरकारी आवास खाली नहीं किया है। जिसके चलते अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को पत्र लिख कर यह बंगला खाली करवाने को कहा है। कोर्ट ने लिखा है कि केंद्र इस बंगले को जल्द खाली करा कर इसे फिर से सुप्रीम कोर्ट के आवास पूल में शामिल करे।
देश के सर्वोच्च न्यायालय में फिलहाल मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई समेत कुल 33 जज है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में कुल जजों की संख्या 34 है और अभी एक जज की जगह खाली है। इन जजों में से चार को अभी तक सरकारी आवास नहीं मिले है। जिसके चलते तीन जज फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के ट्रांजिट अपार्टमेंट में रह रहे हैं, जबकि एक जज सरकारी गेस्ट हाउस में रुके हुए है। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट को 5, कृष्णा मेनन मार्ग पर मौजूद बंगले की तुरंत आवश्यकता है, जो कि मुख्य न्यायाधीश का आधिकारिक निवास है।
सरकारी नियमों के अनुसार, सेवारत मुख्य न्यायाधीश को उनके कार्यकाल के दौरान रहने के लिए टाइप VIII बंगला दिया जाता है। इसके अलावा सेवानिवृत्ति होने के बाद छह महीने तक वह टाइप VII सरकारी बंगले में बिना किराए के रह सकते हैं। जस्टिस चंद्रचूड़ के मामले की बात करें तो वह 10 नवंबर, 2024 को अपनी पोस्ट से रिटायर हो गए थे। लेकिन सेवानिवृत्ति होने के छह महीने बाद तक भी वह टाइप VIII बंगले में ही रह रहे है।
पूर्व मुख्य न्यायाधीश इसलिए भी इतने लंबे समय तक टाइप VIII बंगले में रह पाए क्योंकि उनके बाद मुख्य न्यायाधीश बने उनके दोनों उत्तराधिकारियों, पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और वर्तमान मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने यह बंगला लेने से मना कर दिया। उनका कहना है कि वह अपने पिछले सरकारी आवास में ही रहना चाहते है।
सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने 1 जुलाई को लिखे अपने पत्र में केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय से इस बंगले को तुरंत खाली कराने का आग्रह किया है। पत्र में लिखा है कि, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि बंगला नंबर 5, कृष्णा मेनन मार्ग, माननीय डॉ. न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ से बिना किसी देरी के कब्ज़े में ले लिया जाए, क्योंकि इसे रखने की अनुमति 31 मई, 2025 को समाप्त हो चुकी है। इसके अलावा, 2022 के नियमों के नियम 3बी (Rule 3B of the 2022 Rules) के तहत दी गई छह महीने की अवधि भी 10 मई, 2025 को खत्म हो गई है।
जस्टिस चंद्रचूड़ का कहना है कि वह निजी कारणों के चलते अभी तक यह आवास खाली नहीं कर पाए है। उन्होंने यह भी कहा कि इस देरी के बारे में सुप्रीम कोर्ट प्रशासन को सूचित कर दिया गया था। उन्होंने आगे कहा कि, सरकार ने उन्हें कुछ समय के लिए एक किराए का वैकल्पिक आवास दिया था लेकिन उस आवास में मरम्मत और नवीनीकरण का काम चल रहा है जिसके पूरा होने का वह इंतजार कर रहे है।
Published on:
06 Jul 2025 11:07 am
बड़ी खबरें
View Allबिहार चुनाव
राष्ट्रीय
ट्रेंडिंग
