
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को टाटा-पटना वंदे भारत एक्सप्रेस को वर्चुअली हरी झंडी दिखाई। इस ट्रेन का संचालन लोको पायलट एसएस मुंडा और सहायक के रूप में रितिका तिर्की (27) कर रही हैं। झारखंड के आदिवासी समुदाय की 27 वर्षीय रितिका तिर्की को महिला सशक्तिकरण का प्रतीक और आदिवासी समाज के लिए एक पथप्रदर्शक के रूप में सम्मानित किया जाता है। उन्हें ट्रेन के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि पूरे आत्मविश्वास के साथ वंदे भारत एक्स्प्रेस को चला रही है यह झारखंड की बेटी रितिका है - वंदे भारत चलाने वाली देश की पहली महिला आदिवासी सहायक लोको पायलट रितिका तिर्की। यह नया भारत है, जिसमें आदिवासी समाज की यह बेटी, अपनी शिक्षा एवं प्रतिभा से हमारे समाज एवं राज्य को गौरवान्वित कर रही है। अपनी बेटियों को पढ़ाईये, उन्हें आगे बढ़ने का मौका दीजिये, तभी वे आगे आकर समाज एवं देश का नेतृत्व कर सकेंगी। तब ही महिला सशक्तिकरण धरातल पर स्पष्ट दिखाई देगा।
रितिका देश की पहली आदिवासी महिला हैं, जो सहायक लोको-पायलट के रूप में वंदे भारत एक्सप्रेस की प्रभारी होंगी। वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाने की पूर्व संध्या पर मीडिया से बात करते हुए, बीआईटी, मेसरा की मैकेनिकल इंजीनियर वरिष्ठ सहायक लोको पायलट ने कहा कि उनका मानना है कि भारत में महिलाएं अगर कड़ी मेहनत करें तो अपने सभी लक्ष्य हासिल कर सकती हैं। मूल रूप से गुमला की रहने वाली रितिका ने कहा, "हां, मुझे यह अवसर मिलने पर बेहद खुशी है और मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगी। मेरा मानना है कि भारत में महिलाएं सब कुछ हासिल कर सकती हैं, बशर्ते उनके अंदर जुनून हो।" बीआईटी, मेसरा से बीई की डिग्री प्राप्त करने के बाद, रितिका ने भारतीय रेलवे में अपना करियर चुना। वह 2019 में दक्षिण पूर्व रेलवे (एसईआर) के चक्रधरपुर डिवीजन में शंटर के रूप में शामिल हुईं और फिर वरिष्ठ सहायक लोको पायलट के पद पर पदोन्नत होने से पहले माल और यात्री ट्रेनों को चलाया और वंदे भारत एक्सप्रेस को चलाने में सहायता करने का अवसर मिला।
जमशेदपुर में अपने पति के साथ रहने वाली रितिका ने कहा, "जब मैंने कहीं और नियमित नौकरी की तलाश करने के बजाय रेलवे में शामिल होने का फैसला किया, तो हमेशा रोमांच की भावना शामिल थी। मुझे अच्छा लगेगा कि अधिक महिलाएं इसे करियर के रूप में अपनाएं। महिलाएं हमेशा नेतृत्व कर सकती हैं।" दीपक झा, प्रिंसिपल चीफ ऑपरेशन मैनेजर (एसईआर), ने कहा कि यह निश्चित रूप से आदिवासी समुदाय की महिलाओं सहित अन्य महिलाओं को रेलवे में करियर बनाने की आकांक्षा रखने के लिए प्रेरित करेगा।
Published on:
20 Sept 2024 05:56 pm
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