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हर दिन मेला, काम संभालने वाले हाथ पड़ रहे कम

समृद्धि: अब नहीं कार्तिक पूर्णिमा का इंतजार, छोटे व्यवसायियों का धंधा कई गुना बढ़ा

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हर दिन मेला, काम संभालने वाले हाथ पड़ रहे कम

हर दिन मेला, काम संभालने वाले हाथ पड़ रहे कम

अयोध्या. रामनगरी के व्यवसायियों के लिए हर साल कार्तिक पूर्णिमा का इंतजार खत्म हो गया है। उनके लिए अब हर दिन कार्तिक पूर्णिमा का मेला है। पहले सालाना कार्तिक पूर्णिमा के मेले के समय ही इन दुकानदारों की अच्छी आमदनी होती थी जब श्रद्धालु सरयू में डुबकी लगाने यहां आते थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले और राम मंदिर बनना शुरू होने के बाद ये दुकानदार मालामाल हो गए हैं। रामजी के श्रीचरणों से ऐसी दया बरस रही है कि रोजी-रोटी का संकट किसी के सामने नहीं रहा। हालत यह है कि घर में जितने सदस्य हैं, उतने कम पड़ रहे हैं कामकाज संभालने के लिए। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद अपना धंधा कई गुना बढ़ने की उम्मीद से ये व्यवसायी प्रफुल्लित हैं।बाहर से बुलाने पड़े माली और फूल

तुलसी माला और पूजा-पाठ सामग्री के व्यापारी पंडित राजेश्वर तिवारी बताते हैं कि पहले हनुमान गढ़ी पर फूल माला की करीब 64 दुकानें हुआ करती थीं। अब इनकी संख्या 112 से अधिक हैं। वहीं छोटी देवकाली क्षेत्र में 15, नागेश्वर नाथ मंदिर, सरयू पर 33 तो वहीं कनक भवन में आठ दुकानें हैं। पहले एक माली से एक व्यापारी 4 किग्रा फूलों की बिक्री करता था। अब 27 से 30 किग्रा तक पहुंच गई है। हालात यह हैं कि बाहर से ेफूल और माली बुलाने पड़ रहे हैं।धार्मिक किताबों की बिक्री पहुंची कई गुना

अयोध्या में सनातन हिंदू धर्म, पूजन-पाठ, व्रत, उपवास संबंधी पुस्तकों का भी बड़ा कामकाज है। रामपथ और अशर्फी भवन क्षेत्र में इसकी दुकानें हैं जिनकी संख्या 50 से अधिक है। पंडित कुलभूषण पांडेय बताते हैं कि बीते कुछ सालों में दुकानों की संख्या दोगुनी हो गई है। इसका कारोबार भी 25 से 30 करोड़ रुपए के बीच जा पहुंचा है।

पहले 5-7 किलो, अब 30 किलो बिक रहे लड्डू

कनक भवन में किशोरी जी मिष्ठान के संचालक हरीश गुप्ता बताते हैं राममंदिर पर फैसला आने के बाद देश-दुनिया से श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी। रामपथ पर चंद्रा स्वीट्स के संचालक बताते हैं कि पहले सालाना 20 करोड़ रुपए का प्रसाद बिकता था। अब बिक्री दोगुनी हो गई। शहर में प्रसाद कारोबार 250 करोड़ रुपए पहुंच चुका है। हनुमानगढ़ी मंदिर के ठीक सामने ही विकास गुप्ता 35 वर्ष से प्रसाद की दुकान चला रहे हैं। वे भाव विभोर हो कर बताते हैं कि पहले 5-7 किलो लड्डू बिकते तो खुशी होती थी अब रोज 30 किलो की बिक्री हो रही है।

परिजन भी बंटा रहे हैं हाथ

हनुमान गढ़ी में राकेश गुप्ता की 100 साल पुरानी प्रसाद दुकान भी हैं। इनकी कई पीढ़ियां इस काम को करती आ रही हैं। गुप्ता का कहना है कि पिछले एक साल से काम में घर-परिवार के सदस्य भी हाथ बंटा रहे हैं। अयोध्या में किसी के हाथ खाली नहीं रहने वाले।