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पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने खुद फोन किया, लेकिन फील्ड मार्शल करिअप्पा बोले- वो मेरा बेटा नहीं, देश का सिपाही है

Field Marshal KM Cariappa death anniversary: भारत के पहले फील्ड मार्शल केएम करिअप्पा को जब रिटायर होने के बाद पाकिस्तान से फोन आया था, दूसरी तरफ से पाकिस्तान के फील्ड मार्शल ने कहा- आपका बेटा हमारे यहां युद्धबंदी...

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Field Marshal K.M. Cariappa

फील्ड मार्शल केएम करिअप्पा (फोटो - IANS)

Field Marshal KM Cariappa death anniversary: 1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध पूरे जोरों पर था। भारतीय वायुसेना के जवान दुश्मन के ठिकानों पर हमले कर रहे थे। उसी दौरान 8 सितंबर 1965 को एक भारतीय हमले के बाद पाकिस्तानी एंटी-एयरक्राफ्ट फायर में भारतीय वायुसेना का एक हंटर विमान मार गिराया गया। उस विमान में सवार थे फ्लाइट लेफ्टिनेंट के. सी. करिअप्पा। केसी करिअप्पा, भारत के पहले फील्ड मार्शल केएम करिअप्पा के एकलौते बेटे थे।

केसी करिअप्पा पाकिस्तान के सरगोधा इलाके में सुरक्षित उतर तो गए, लेकिन पाकिस्तानी सेना ने उन्हें युद्धबंदी बना लिया। यह खबर मिलते ही पाकिस्तान के रावलपिंडी से लेकर नई दिल्ली के साउथ ब्लॉक तक हड़कंप मच गया। वहीं, जब यह खबर पाकिस्तान के राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अयूब खान को पता चली तो उन्होंने फौरन केएम करिअप्पा को फोन किया।

अयूब खान और करिअप्पा दोनों सहयोगी थे

दरअसल, ब्रिटिश काल के दौरान केएम करिअप्पा और अयूब खान सहयोगी थे। वह साथ में काम भी कर चुके थे। अयूब ने करिअप्पा को फोन पर कहा, 'किपर मैं जानता हूं कि आपका बेटा हमारे यहां है। आप चिंता न करें। मैं खुद उसका ख्याल रखूंगा और उसे तुरंत रिहा करवा दूंगा।' अयूब खान की बात सुनकर कुछ पल के लिए भारत के पूर्व सैन्य प्रमुख चुप रहे, फिर कहा कि अयूब, वह मेरा बेटा नहीं है। वह मेरा बेटा तो तब था जब वह घर पर था। अब वह देश का सिपाही है। उसे बाकी सभी भारतीय युद्धबंदियों की तरह ही व्यवहार दो। अगर तुम उसे छोड़ना चाहते हो, तो सभी भारतीय युद्धबंदियों को छोड़ दो। नहीं तो किसी को मत छोड़ो।

अयूब लगातार फोन पर उन्हें इस बात के लिए मनाते रहे कि पाकिस्तान केसी करिअप्पा को छोड़ देगा, लेकिन केएम करिअप्पा
ने इस बात को मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कोई खास सुविधा या अपने बेटे के लिए कोई छूट नहीं मांगी।

युद्धबंदी बेटे से कहा- मुझे तुम पर गर्व है

फ्लाइट लेफ्टिनेंट के. सी. करिअप्पा पाकिस्तान में पूरे 6 महीने युद्धबंदी रहे। उन्हें अन्य भारतीय बंदियों की तरह ही व्यवहार मिला। अंत में 1966 के ताशकंद समझौते के बाद वे भारत वापस लौटे।जब बेटा वापस आया तो फील्ड मार्शल करिअप्पा ने उसे गले लगाया, लेकिन पहले ये कहा कि तुमने देश की सेवा की है, मैं गर्वित हूं।

कौन थे फील्ड मार्शल करिअप्पा

फील्ड मार्शल कोडंडेरा मडप्पा करियप्पा भारत के पहले सेनाध्यक्ष थे। उन्होंने 1947 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय सेना का नेतृत्व किया था। 15 जनवरी 1949 को फील्ड मार्शल कोडंडेरा माधप्पा करियप्पा (के एम करियप्पा) ने भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ का पदभार ग्रहण किया था। उससे पहले, स्वतंत्र भारत की सेना की कमान ब्रिटिश जनरल सर फ्रांसिस रॉय बुचर के पास थी। वे भारतीय सेना के अंतिम ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ थे। फील्ड मार्शल के.एम. करिअप्पा का निधन 15 मई 1993 को बेंगलुरु (कर्नाटक) के कमांड अस्पताल में हुआ था। वह 94 वर्ष के थे।

आज है उनकी पुण्यतिथि

भारत के पहले फील्ड मार्शल केएम करिअप्पा की पुण्यतिथि के मौके पर भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना ने श्रद्धांजलि अर्पित की है। इंडियन आर्मी ने लिखा, फील्ड मार्शल के एम करिअप्पा को नमन, जो भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ थे और भारत के सबसे विशिष्ट सैन्य नेताओं में से एक थे। उनकी पुण्य तिथि पर यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की है।