
फर्जी पहचान के आरोप में ST आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष गिफ्तार (ANI)
सीबीआई की विशेष अदालत ने फर्जी पहचान बनाकर बिहार सरकार के अनुसूचित जनजाति (ST) आयोग के उपाध्यक्ष पद पर नियुक्ति और दो पदों पर एक साथ वेतन लेने के मामले में डाक विभाग के पूर्व वरिष्ठ लेखाकार लोहरा भगत को दो साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने लोहरा भगत पर 1.10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
सीबीआई ने 31 मार्च को लोहरा भगत के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज किया था। जांच में पता चला कि वर्ष 2010 से 2013 के बीच लोहरा भगत ने डाक विभाग में नौकरी करते हुए ललित भगत के नाम से फर्जी पहचान बनाई और खुद को एसटी आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त करवाया। इस दौरान वे दोनों पदों पर एक साथ काम करते रहे और दोनों जगह से वेतन हासिल करते रहे।
सीबीआई कोर्ट ने इस मामले में लोहरा भगत को दोषी ठहराते हुए सजा और जुर्माने का आदेश दिया। यह मामला सरकारी पदों पर फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का उदाहरण है।
Updated on:
23 Jul 2025 11:41 am
Published on:
23 Jul 2025 11:14 am
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