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Rajasthan को भारी पड़ने लगी बेटियों की पढ़ाई, नि:शुल्क शिक्षा से पीछे हटी सरकार

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कार्यकाल में शुरू हुई मुख्यमंत्री हमारी बेटी योजना अब सरकार की प्राथमिकता में नहीं रही है। इस योजना में हर साल जिले में टॉप करने वाली छात्राओं को सात साल तक निशुल्क योजना का प्रस्ताव था, पर अब सरकार इस योजना को मूल स्वरूप में लागू करने में कोई इच्छा शक्ति नहीं दिखा रही है, जिसके कारण योजना के लिए लगातार बजट में कटौती की जा रही है। पर राज्य के शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला को को योजना में ऐसे किसी बदलाव की जानकारी नहीं है।

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विडंबना: मुख्यमंत्री हमारी बेटी योजना के तहत कराई जाने वाली नि:शुल्क पढ़ाई अब राजस्थान सरकार को पड़ रही है भारी

मुख्यमंत्री हमारी बेटी योजना के तहत कराई जाने वाली नि:शुल्क पढ़ाई सरकार को भारी पड़ रही है। यही कारण है कि इन बालिकाओं को शिक्षा दिलाने में सरकार पीछे हट रही है। बढ़ते बजट को देखते हुए सरकार ने साल 2021-22 के लिए नए प्रावधान तय कर दिए हैं। इसके अनुसार 11वीं और 12वीं कक्षा की पढ़ाई का जिम्मा बालिका फाउंडेशन के पास रहेगा। लेकिन स्नातक और स्नाकोत्तर की पढ़ाई का खर्चा कौन उठाएगा, इस पर सरकार ने चुप्पी साध ली है। ऐसे में कॉलेज में दाखिला लेने वाली पात्र होनहार लड़कियां अपने ही खर्चे से पढ़ने को मजबूर हैं।

इस प्रकार की है योजना

10 वीं में जिला टॉप करने वाली चार छात्राओं का सरकार 11वीं से लेकर स्नाकोत्तर तक की पढ़ाई का खर्चा उठाती है। इसमें दो छात्राएं सामान्य, एक अनाथ और एक बीपीएल श्रेणी से शामिल होती है। 11वीं और 12वीं कक्षा की प्रत्येक छात्रा को 1.15 लाख और स्नातक और स्नाकोत्तर के लिए 2.25 लाख रुपए दिए जाते हैं। यह पुरस्कार राशि शैक्षणिक संस्थानों को सीधे चेक के जरिए दी जाती है। छात्राएं स्कूल-कॉलेज, हॉस्टल, कोचिंग की फीस और स्टेशनरी की रसीद जमा कराती हैं। साल 2020-21 तक योजना में शामिल छात्राओं को 11वीं से स्नाकोत्तर में नि:शुल्क शिक्षा का बजट बालिका शिक्षा फाउंडेशन से ही जारी किया गया। योजना के तहत सात साल तक पात्र बालिका की शिक्षा के लिए 13.55 लाख रुपए दिए जाते हैं।


अभी तक सिर्फ 11वीं और 12वीं के प्रस्ताव मांगे गए

नई गाइड लाइन जारी होने के बाद बालिका शिक्षा फाउंडेशन ने 11वीं और 12वीं कक्षा की पात्र छात्राओं से प्रस्ताव मांगे हैं। यह प्रस्ताव 2021-22 के लिए हैं, लेकिन कॉलेज में पढ़ने वाली छात्राओं से प्रस्ताव नहीं मांगे हैं। हालांकि नई गाइड लाइन के तहत स्नातक और स्नाकोत्तर में अध्यनरत बालिकाओं के लिए योजना की क्रियान्विति का जिम्मा उच्च शिक्षा विभाग को दिया है, लेकिन बजट पर निर्णय नहीं लिया है।

कॉलेज शिक्षा में छात्राओं के नामांकन

अब तक पिछले कुछ सालों में राजस्थान में कॉलेज छात्राओं का नामांकन इस प्रकार रहा है।

2017—18 5.46

2018—19 5.80

2019—20 6.30

2020—21 6.46

2021—22 6.73

हैरानी की बात है कि राज्य के स्कूली शिक्षी मंत्री को इस बात की जानकारी नहीं है। राज्य़ के शिक्षामंत्री बी.डी. कल्ला से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने पत्रिका से कहा कि स्कूल शिक्षा की होनहार बेटियों को उचित पुरस्कार राशि नियमानुसार दी जा रही है, लेकिन कॉलेज शिक्षा के लिए क्यों रोकी गई है। इसकी जानकारी नहीं है, इसको दिखवाया जाएगा।