
संरक्षणवादियों के लिए खुशी की बात यह है कि गुजरात के खेड़ा जिले की आर्द्रभूमि में मुख्य रूप से पाई जाने वाली संकटग्रस्त प्रजाति सारस क्रेन (ग्रस एंटीगोन) की संख्या में प्रतिवर्ष 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। गुजरात के आणंद और खेड़ा जिलों में इस वर्ष 21 जून को ग्रीष्म संक्रांति के दिन की गई नौवीं गणना में 141 उप-वयस्कों सहित 1,431 सारस क्रेन थे, जबकि 2023 में इनकी संख्या 1,254 की संख्या दर्ज की गई थी। खेड़ा और आनंद जिले के 15 तालुकाओं के 164 गांवों में रहने वाले वन विभाग और ग्रामीणों के संयुक्त संरक्षण प्रयासों के चलते दुनिया के सबसे ऊंचे उड़ने वाले पक्षियों में से एक सारस क्रेन की संख्या 2015 के 500 से 186 प्रतिशत बढ़ गई है।
खेड़ा जिले के मातर तालुका के क्षेत्रीय वन अधिकारी प्रीतेश प्रजापति के अनुसार अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) की रेड लिस्ट के तहत 'संकटग्रस्त' के रूप में वर्गीकृत यह प्रजाति भारत में पाई जाने वाली एकमात्र निवासी क्रेन प्रजाति है जो आर्द्रभूमि और कृषि क्षेत्रों में रहती है। ग्रामीण पहले इसे फसल खराब करने वाले पक्षी मानते थे लेकिन अब जागरूकता पैदा होने से इस पक्षी की संख्या में वृद्धि हुई है।
जीईईआर फाउंडेशन द्वारा 1997 और 2000 के बीच किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि गुजरात में सारस की आबादी 1,700 थी, जिसमें खेड़ा में सबसे अधिक 737 सारस थे, उसके बाद अहमदाबाद का स्थान था। हालांकि, 2000 के दशक में उनकी संख्या में गिरावट के कारण संरक्षणवादियों ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर सारस को विलुप्त होने से बचाने के लिए रैली निकाली और धीरे-धीरे जागरूकता बढ़ी।
Published on:
27 Jun 2024 03:06 pm
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