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अलविदा नई दिल्ली….ब्राजील में मिलेंगे!

- कूटनीति का लोहा मनवा ब्राजील को जी-20की कमान सौंपी भारत ने - सभी के कल्याण की कामना के साथ सम्पन्न हुआ शिखर सम्मेलन

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अलविदा नई दिल्ली....ब्राजील में मिलेंगे!

अलविदा नई दिल्ली....ब्राजील में मिलेंगे!

नई दिल्ली। 'वसुधैव कुटुम्बकम...' की भावना के साथ अफ्रीकन यूनियन को दुनिया की 60 फीसदी आबादी वाले देशों के समूह में शामिल करवाने और बिना किसी विवाद के शिखर सम्मेलन में वैश्विक नेताओं के संयुक्त घोषणा पत्र की मंजूरी जैसी महत्वपूर्ण सफलताओं के साथ अपनी कूटनीति का लोहा मनवाते हुए भारत ने रविवार को जी-20 देशों की कमान (गेवल) ब्राजील को सौंप दी।

इसके साथ ही भारत की अध्यक्षता में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन संपूर्ण विश्व में आशा और शांति का संचार और सभी के कल्याण की कामना के साथ सम्पन्न हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्राजील के राष्ट्रपति लूला-डी-सिल्वा को प्रेसीडेंसी गेवल सौंपते हुए उम्मीद जताई कि ब्राजील के नेतृत्व में जी-20 साझा लक्ष्यों को और आगे बढ़ाएगा। डी-सिल्वा ने कहा कि ब्राजील अब तक हुई तरक्की को आगे बढ़ाने का पूरा प्रयास करेगा। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में हर क्षेत्र में फैली असमानता को दूर करने की जरूरत है। उम्मीद है जी-20 इसमें जरूर कामयाब होगा।

वर्चुअल सत्र का प्रस्ताव

मोदी ने नवम्बर में जी-20 के वर्चुअल सत्र का प्रस्ताव करते हुए कहा कि भारत के पास नवम्बर तक प्रेसिडेंसी की जिम्मेदारी है। शिखर सम्मेलन के दो दिनों में कई सुझाव व प्रस्ताव आए हैं। भारत की जिम्मेदारी है कि इनमें तेजी से प्रगति लाई जाए। वर्चुअल सेशन में इनकी समीक्षा हो। इसके बाद उन्होंने वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर का रोडमैप सुखद होने और 'स्वस्ति अस्तु विश्वस्य' यानी 'संपूर्ण विश्व में आशा और शांति का संचार हो' की 140 करोड़ भारतीयों की मंगलकामना के साथ सम्मेलन के समापन की घोषणा की।

पूर्व व भावी मेजबानों का हरित संदेश

सम्मेलन के रविवार सुबह शुरू हुए तीसरे सत्र की शुरुआत जी-20 के ट्रोइका देशों के बीच पौधे सौंपने की औपचारिकता के साथ हुई। जी-20 प्रेसिडेंसी सम्भालने वाले देशों की परम्परा के अनुरूप भारत से पहले प्रेसिडेंसी सम्भालने वाले इंडोनेशिया व भारत के बाद जिम्मेदारी लेने वाले ब्राजील के राष्ट्रपति ने मोदी को पौधे भेंट कर स्वच्छ पर्यावरण का संदेश दिया।

बदलाव नहीं लाने वाले खो देते हैं प्रासंगिकता

शिखर सम्मेलन के 'एक भविष्य' थीम वाले तीसरे सत्र को सम्बोधित करते हुए मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता में भारत की दावेदारी का संकेतों में उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया को बेहतर भविष्य की ओर ले जाने के लिए जरूरी है कि वैश्विक व्यवस्थाएं वर्तमान की वास्तविकताओं के मुताबिक हों। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद इसका उदाहरण है। संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के समय मात्र 51 सदस्य थे और आज 200 सदस्य हैं। फिर भी सुरक्षा परिषद के सदस्यों की संख्या नहीं बढ़ी। आज दुनिया बदल चुकी है। ये न्यू रिएलिटी नए वैश्विक ढांचे में झलकनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो संस्था समय के साथ नहीं बदलती, वह अपनी प्रासंगिकता खो देती है। आज हर वैश्विक संस्था को प्रासंगिकता बढ़ाने के लिए सुधार करना जरूरी है। इसके बाद कई अन्य विश्व नेताओं ने भी वैश्विक चुनौतियों और उनके समाधान पर मंथन किया।