3 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भारत के पहले गवर्नर-जनरल सी राजगोपालाचारी के परपोते ने बताई ‘सेंगोल’ से जुड़ी रोचक कहानी, PM मोदी को कहा धन्यवाद

New Parliament Building: भारत के पहले गवर्नर जनरल सी राजगोपालाचारी के परपोते सी आर केसवन ने सेंगोल को जीवंत करने के लिए नरेंद्र मोदी को धन्यवाद कहा है।

2 min read
Google source verification
cr_keswan.jpg

New Parliament building : 28 मई को प्रधानमंत्री मोदी देश के नए सांसद भवन का उद्घाटन करेंगे । इस उद्घाटन को लेकर कांग्रेस सहित 19 विपक्षी पार्टियों ने नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन किए जाने का विरोध किया है और उद्घाटन समारोह में आने से मना कर दिया है। वहीं कुछ ऐसे भी नेता हैं जैसे नवीन पटनायक और जगन मोहन रेड्डी, जिन्होंने इस समारोह में शामिल होने का मन बनाया है। इसी बीच एक और चीज जो बहुत चर्चा में है, जो सत्ता हस्तांतरण के मौके पर प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है उसे लेकर देश के प्रथम गवर्नर जनरल सी राजगोपालाचारी के परपोते सी आर केसवन ने नरेंद्र मोदी को धन्यवाद कहा है।


भारत के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल सी राजगोपालाचारी के परपोते सी. आर. केसवन ने क्या कहा

इस मौके पर केसवन बोले- मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करता हूं कि वे इस पवित्र राजदंड सैंगोल को फिर से जीवंत किया। 1947 में जब आज़ादी नज़दीक थी तब राजगोपालाचारी ने नेहरू जी को बताया कि यह प्राचीन भारतीय सभ्यता परंपरा है कि जब सत्ता का हस्तांतरण होता है तब पवित्र राजदंड सैंगोल को मुख्य पुजारी द्वारा नए राजा को दिया जाता है और यही होना चाहिए।

यह राजदंड पहले माउंटबेटन को दिया गया जिसे बाद में पुजारी को दी गई जिसे गंगाजल से पवित्र किया गया और बाद में नेहरू जी को दी गई। यह एक ऐतिहासिक घटना थी। इसके बार में किसी को नहीं पता था। इस राजदंड को इलाहाबाद संग्रहालय में यह कहकर रखा गया कि यह एक गोल्डन वॉकिंग स्टिक है जो पंजित नेहरू को दी गई थी।


कहां था सेंगोल?

यह सवाल उठना लाजमी है कि पहले पीएम जवाहर लाल नेहरू को सौंपे जाने के बाद और अमित शाह की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बीच आखिर यह राजदंड कहां पर था। इस बारे में सेंगोल को बनाने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले वुम्मीदी एथिराजुलु के बेटे उधय वुम्मीदी ने कहा कि यह तो हमें भी नहीं पता था कि अभी तक यह कहां था, लेकिन जब प्रधानमंत्री ने हमसे संपर्क किया और इसके बारे में हमसे पूछा तो इसने अचानक हमारी यादों को ताजा कर दिया।

उन्होंने कहा- ऐसा नहीं था, हमें पता नहीं था कि आखिर ये क्या है, या फिर हम इसे भूल गए थे, लेकिन यह जरूर है कि यह कहीं हमारी यादों में दब गया था। काफी सालों से इसकी खोज खबर किसी ने नहीं ली तो हमें याद करने में थोडा समय लग गया। लेकिन फिर सरकार ने हमें इसके बारे में याद दिलाया और अब यह आप सबके सामने है। इस सेंगोल को प्रयागराज में नेहरू संग्राहलय में सुरक्षित रखा गया था, अब सरकार इसको देश की नई संसद भवन में लगाएगी।

यह भी पढ़ें: 18 साल के होते ही बन जाएगा आपका Voter Card, सरकार मानसून सत्र में लाएगी ये बिल!
कहां से आया सेंगोल

बता दें कि, सेंगोल शब्द संस्कृत के 'संकु' से लिया गया है। इसका अर्थ शंख होता है। सेंगोल पर सबसे ऊपर नंदी हैं और बगल में कुछ कलाकृति बनी हैं। यह सोने और चांदी से बना होता है। भारत में सेंगोल का इतिहास काफी पुराना है। सबसे पहले मौर्य साम्राज्य (322-185 ईसा पूर्व) द्वारा इसका उपयोग किया गया था। इसके बाद गुप्त साम्राज्य (320-550 ईस्वी), फिर चोल वंश में आया। जहां इसका इस्तेमाल ज्यादा किया जाता था। बाद में यह मुगलों के पास आया और जब अंग्रेज भारत आए तो ब्रिटिश ने इस पर अपना अधिकार जमा लिया।

यह भी पढ़ें: जयराम का PM Modi पर हमला, बोले- वो 'द इनॉग्रेट' है, एक व्यक्ति की अंहकार के कारण...

Story Loader