1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

UAPA: हिंदू नेताओं की टारगेट किलिंग आतंकवादी कृत्य नहीं, हाई कोर्ट ने क्यों कहा ऐसा?

High Court commented about terrorist act: हाईकोर्ट ने एक फैसले की सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की और कहा कि हिंदू धार्मिक नेताओं की लक्षित हत्या को आतंकवादी कृत्य नहीं माना जा सकता है।

2 min read
Google source verification
uapa_act_15.jpg

What says UAPA act 15 about terrorist act?: मद्रास हाईकोर्ट ने गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि साक्ष्यों से यह पता चलता है कि कुछ धार्मिक नेताओं को लक्ष्य करके उनपर हमला करने की साजिश रची गई थी इसलिए इसे आतंकवादी कृत्य नहीं माना जा सकता है। जस्टिस एसएस सुंदर और सुंदर मोहन ने यूएपीए की धारा 15 का हवाला देते हुए ऐसी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यूएपीए की धारा 15 के तहत यह परिभाषा बताई गई है कि किसी धार्मिक नेताओं की टारगेट किलिंग को आतंकवादी कृत्य नही माना जा सकता है। दरअसल पीठ ने यह टिप्पणी आसिफ मुस्तहीन द्वारा जमानत पर रिहाई की मांग की सुनवाई के दौरान की। गौरतलब है कि आसिफ को 26 जुलाई 2022 को यूएपीए के तहत अपराध के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा गिरफ्तार किया गया था।

यूएपीए की धारा 15 की क्या कहती है?

खंडपीठ ने कहा कि आतंकवादी कृत्य के अन्तर्गत कोई मामला तब बनता है जब कोई कार्य भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा या देश की संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने के इरादे से किया गया हो या किसी विदेशी व्यक्ति या संगठन द्वारा देश में लोगों या किसी वर्ग में आतंक फैलाने या उनपर संभावित रूप से हमला करने के इरादे से किया जाए।

आसिफ पर क्या है आरोप?

आरोपि:यों की जमानत याचिकाओं को पहले निचली अदालत, उच्च न्यायाल और सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था। आरोपी पिछले 17 महीने से जेल में बंद थे। आरोपियों पर यह आरोप लगाया कि वे आईएस का सदस्य बनना चाहते थे। उसने दूसरे आरोपियों जो वैश्विक आतंकवादी संगठन के सदस्य थे, से अपनी निकटता बढ़ाने की कोशिश की। उन्होंने ने भाजपा और आरएसएस से जुड़े हिंदू धार्मिक नेताओं को मारने की योजना बनाई थी।

हाईकोर्ट ने आरोपी को सशर्त जमानत दी

पीठ ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दायर करने वाले पक्षकार से असहमति प्रकट करते हुए कहा कि आपके द्वारा दिए गए सबूत या साक्ष्यों से यह संकेत नहीं मिलता है कि आरोपी आईएसा में शामिल हो गया इसलिए मुकदमे के लंबित रहने तक आरोपी को अनिश्चितकालीन समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता है। पीठ ने आरोपी को मुकमदा चलने तक इरोड में ही रहने और अगले आदेश तक हर दिन सुबह 10.30 बजे ट्रायल कोर्ट में पेश होने के निर्देश के साथ सशर्त जमानत दे दी।

यह भी पढ़ें - Marital Dispute Cases: अब पत्नियों से ज्यादा पति होने लगे पीड़ित, क्रूरता के आधार पर मांग रहे तलाक