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HoneyTrap:हुस्न के जाल में फंसते-फंसते बचे मंत्रीजी, बोले- पिछले 20 सालों से BJP-Congress के नेता हो रहे शिकार

HoneyTrap: मंत्री ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है; पिछले 20 सालों से ऐसा होता आ रहा है। हर पार्टी—कांग्रेस, बीजेपी और जेडीएस—इसका शिकार बनी है।

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HoneyTrap: कर्नाटक के मंत्री सतीश जरकिहोली ने 20 मार्च 2025 को एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने पुष्टि की कि राज्य के एक मंत्री को "हनी ट्रैप" में फंसाने की कोशिश की गई थी, हालांकि यह प्रयास सफल नहीं हो सका। जरकिहोली ने कहा, "यह सच है कि कोशिश की गई थी, लेकिन यह कामयाब नहीं हुई। कर्नाटक में यह कोई नई बात नहीं है; पिछले 20 सालों से ऐसा होता आ रहा है। हर पार्टी—कांग्रेस, बीजेपी और जेडीएस—इसका शिकार बनी है।" इस बयान से साफ होता है कि कर्नाटक की राजनीति में इस तरह की साजिशें लंबे समय से चली आ रही हैं, जिसमें नेताओं को ब्लैकमेल करने या बदनाम करने के लिए खूबसूरत जाल बिछाए जाते हैं।

औपचारिक शिकायत नहीं कराई दर्ज

उन्होंने आगे कहा कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत दर्ज करानी चाहिए और जांच होनी चाहिए। जरकिहोली ने बताया, "हमने मांग की है कि शिकायत दर्ज की जाए और जांच हो। हमने पीड़ित से कहा है कि वह सामने आए और शिकायत दर्ज करे, तभी जांच हो सकेगी और सच सामने आएगा।" यह सुझाव देता है कि अभी तक पीड़ित मंत्री ने औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की है, जिसके बिना इस मामले की सच्चाई उजागर करना मुश्किल होगा।

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वक्फ (संशोधन) विधेयक पर विवाद

इसी बीच, कर्नाटक में एक और राजनीतिक विवाद गरमाया हुआ है। बीजेपी विधायक बीवाई विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की सरकार पर वक्फ (संशोधन) विधेयक के खिलाफ प्रस्ताव को "जबरदस्ती पारित" करने का आरोप लगाया। यह प्रस्ताव 19 मार्च 2025 को कर्नाटक विधानसभा में पारित किया गया था, जिसका विपक्ष ने जमकर विरोध किया। विजयेंद्र ने कहा, "मोदी जी वक्फ में पारदर्शिता लाना चाहते हैं, लेकिन सिद्धारमैया सरकार जमीन हड़पने वालों को बचाना चाहती है।" उनका दावा है कि कांग्रेस नेता खुद जमीन हड़पने के घोटालों में शामिल हैं और बीजेपी इसे जनता के सामने उजागर करेगी।

वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार लाना है। 1995 के वक्फ अधिनियम को लंबे समय से भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और अतिक्रमण जैसी समस्याओं के लिए आलोचना झेलनी पड़ी है। नया विधेयक डिजिटाइजेशन, बेहतर ऑडिट, पारदर्शिता और अवैध कब्जे वाली संपत्तियों को वापस लेने के लिए कानूनी तंत्र जैसे सुधार लाने की कोशिश करता है। कर्नाटक सरकार का इस विधेयक के खिलाफ रुख राजनीतिक तनाव को और बढ़ा रहा है।