
Lok Sabha Elections 2024 : पश्चिम बंगाल के सबसे सफल पार्टी अध्यक्षों में से एक भाजपा नेता दिलीप घोष के सामने इस बार कई चुनौतियां हैं। बर्द्धमान-दुर्गापुर लोकसभा सीट पर चुनावी मुकाबले में घोष को तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार और पूर्व भारतीय क्रिकेटर कीर्ति आजाद के साथ ही वाम-कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार सुकृति घोषाल कड़ी टक्कर दे रहे हैं। वाम दल-कांग्रेस गठबंधन के मुकाबले में शामिल होने से यहां त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। हर चुनाव में अलग-अलग पार्टी के उम्मीदवार को जिताने के लिए पहचाने जाने वाले बर्द्धमान-दुर्गापुर लोकसभा क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार दिलीप घोष के सामने इस रिवाज को बदलने और अपना राजनीतिक भविष्य सुरक्षित करने की अहम चुनौती है। विश्व कप (1983) विजेता भारतीय क्रिकेट टीम के सितारे रहे टीएमसी उम्मीदवार कीर्ति आजाद अपना गृह क्षेत्र बिहार और दिल्ली छोड़ बंगाल से चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा उन्हें बाहरी बता रही है लेकिन टीएमसी आजाद के जरिये इस सीट पर फिर से अपना परचम लहराने को आतुर है।
लोकसभा क्षेत्रों के परिसीमन में 2008 में बनी इस सीट के मतदाताओं ने पिछले तीन चुनावों में माकपा, तृणमूल कांग्रेस और भाजपा प्रतिनिधियों को लोकसभा में भेजा है। भाजपा के एस.एस.अहलूवालिया ने 2019 में तकरीबन 3,000 मतों के मामूली अंतर से तृणमूल से यह सीट छीन ली थी। भाजपा ने सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए यहां से घोष पर विश्वास जताया है।
राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि बर्द्धमान-दुर्गापुर में दिलीप घोष के लिए प्रतिष्ठा और राजनीतिक अस्तित्व दोनों की अहम परीक्षा है। घोष को मेदिनीपुर सीट से यहां भेजा गया है। अब वे पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी नहीं रहे। सामाजिक विज्ञान अध्ययन केंद्र में राजनीतिक विश्लेषक मैदुल इस्लाम कहते हैं कि दिलीप घोष को इस बार कई मोर्चे पर जूझना पड़ रहा है। उन्हें अभी अपनी ही पार्टी में दरकिनार कर दिया गया। जीत उनके राजनीतिक करियर को पुनर्जीवित कर देगी जबकि हार इस पर शंका पैदा कर सकती है।
भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष के तौर पर दिलीप घोष के कार्यकाल में पार्टी ने 2019 में 18 लोकसभा सीटें जीतकर राजनीतिक पंडितों को हैरानी में डाल दिया था। इस बार चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद वे अपनी संभावनाओं को लेकर आशान्वित हैं। दिलीप ने कहा कि मैं पार्टी का वफादार सदस्य हूं और मुझे मिलने वाली हर भूमिका को स्वीकार करता हूं। पार्टी के साथ समाजसेवा में सक्रिय रहने वाले घोष लोगों से सीधा सम्पर्क साध रहे हैं। उन्होंने लोगों से भीषण गर्मी, बारिश, बाढ़ या आपदा के समय दुर्गापुर के साथ खड़े रहने का वादा किया है। केंद्र की योजनाओं और पीएम नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से वह लाभ की उम्मीद में हैं। टीएमसी उम्मीदवार कीर्ति आजाद मुख्यमंत्री और पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी की लोकप्रियता और उनकी सरकार के कामकाज के भरोसे है। उधर, माकपा प्रत्याशी सुकृति घोषाल अपने कोर मतदाताओं पर डोरे डाल रहे हैं।
क्षेत्र में बंद कारखानों के नहीं खुलने, सरकारी कामकाज में भ्रष्टाचार, रोजगार की कमी, गांवों में पेयजल की किल्लत, खाद के दाम बढऩे, बेहतर सिंचाई व्यवस्था समेत कई चुनावी मुद्दे बने हुए हैं। समाजसेवा से जुड़े कीर्ति आजाद को भाजपा की ओर से बाहरी नेता बताया जा रहा है। आजाद ने इसे खारिज करते हुए कहा कि मैं भारतीय हूं और कोई भी भारतीय देश के किसी भी हिस्से से चुनाव लड़ सकता है। यह चुनाव मुद्दों और राजनीति के बारे में है, न कि व्यक्तियों के बारे में।
इस निर्वाचन क्षेत्र में मिली जुली आबादी है। बांग्लाभाषी के अलावा बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के लोग भी हैं। पंजाबी बिरादरी के लोग भी बड़ी संख्या में हैं। करीब 20 फीसदी मुस्लिम आबादी है जबकि अनुसूचित जाति की आबादी 27 फीसदी है।
Published on:
01 May 2024 08:15 am

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