
वैलेंटाइन डे के लिए विदेशी चॉकलेट्स। (फोटो: AI Generated)
Premium-Gifting: वैलेंटाइन डे से ठीक पहले प्यार करने वालों के लिए एक शानदार खबर सामने आई है। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच होने जा रहे ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का सीधे आपकी जेब और आपके तोहफों पर भी असर पड़ने वाला है। इस समझौते के बाद यूरोप से आने वाली प्रीमियम चॉकलेट्स की कीमतों में भारी गिरावट आने की संभावना है, जिससे इस वैलेंटाइन डे पर 'स्वीट' गिफ्ट देना और भी आसान हो जाएगा। जानकारी के अनुसार भारत हर साल लगभग $250 मिलियन से $300 मिलियन (करीब 2,000 से 2,500 करोड़ रुपये) से अधिक मूल्य की चॉकलेट और संबंधित कोको उत्पादों का आयात करता है।
बाजार की वृद्धि: प्रीमियम और डार्क चॉकलेट की मांग में सालाना 15-20% की बढ़ोतरी देखी जा रही है। भारत-EU ट्रेड डील के बाद इस आयात मूल्य में और इजाफा होने की उम्मीद है क्योंकि ड्यूटी कम होने से विदेशी ब्रांड्स की मांग बढ़ेगी।
प्रमुख निर्यातक देश: भारत में सबसे ज्यादा चॉकलेट स्विट्जरलैंड, बेल्जियम, जर्मनी, इटली और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से आती है।
विदेशी चॉकलेट भारत तक पहुँचने के लिए मुख्य रूप से दो मार्गों का उपयोग किया जाता है:
समुद्री मार्ग (Sea Route): भारी मात्रा में आयात की जाने वाली चॉकलेट और कोको पाउडर समुद्री मार्ग से कंटेनरों के जरिए भारत पहुँचते हैं। मुंबई (Nhava Sheva), चेन्नई और कोलकाता के बंदरगाह इसके मुख्य केंद्र हैं। चॉकलेट को खराब होने से बचाने के लिए इन्हें रीफर कंटेनर्स (Refrigerated Containers) में लाया जाता है ताकि तापमान नियंत्रित रहे।
हवाई मार्ग (Air Route): प्रीमियम, लग्जरी और 'लिमिटेड एडिशन' वाली चॉकलेट्स अक्सर हवाई मार्ग से आती हैं। खासतौर पर स्विट्जरलैंड और बेल्जियम से आने वाली ताजी चॉकलेट्स को हवाई मार्ग से लाया जाता है ताकि वे जल्दी बाजार तक पहुँच सकें और उनकी गुणवत्ता बनी रहे।
भारत में डार्क चॉकलेट और प्रीमियम यूरोपीय ब्रांड्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान में, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड और जर्मनी जैसे देशों से आने वाली चॉकलेट पर भारी आयात शुल्क (Import Duty) लगता है। समझौते के बाद यह शुल्क कम होने से लिंड्ट (Lindt) और फेररो रोचर (Ferrero Rocher) जैसे ब्रांड्स आम आदमी की पहुँच में होंगे।
चॉकलेट: उत्पादन, खपत और व्यापार के आंकड़े चॉकलेट केवल स्वाद नहीं, बल्कि एक बड़ा कारोबार बन चुका है। भारत और दुनिया भर में इसके आंकड़े चौंकाने वाले हैं:
भारत में खपत: भारत का चॉकलेट बाजार सालाना 10-12% की दर से बढ़ रहा है। भारतीय औसतन प्रति वर्ष लगभग 100 से 200 ग्राम चॉकलेट खाते हैं, जो यूरोपीय देशों (जहां औसत 8-10 किलोग्राम है) के मुकाबले कम है, लेकिन तेजी से बढ़ रहा है।
उत्पादन: भारत में कोको (Cocoa) का उत्पादन मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश, केरल और कर्नाटक में होता है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 25-30% कोको खुद पैदा करता है, जबकि बाकी आयात किया जाता है।
आयात-निर्यात: भारत मुख्य रूप से यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया से चॉकलेट का आयात करता है। EU के साथ इस डील के बाद भारत को बेहतर गुणवत्ता वाला कोको और चॉकलेट कम कीमतों पर उपलब्ध होगा।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि चॉकलेट पर ड्यूटी कम होने से न केवल ग्राहकों को फायदा होगा, बल्कि भारत के बेकरी और कन्फेक्शनरी उद्योग को भी नई ऊर्जा मिलेगी। वैलेंटाइन डे जैसे मौकों पर चॉकलेट की बिक्री में 40% तक का उछाल देखा जाता है।
यह समझौता लागू होने के बाद, कई यूरोपीय कंपनियां भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने पर विचार कर रही हैं। इससे भविष्य में 'मेक इन इंडिया' चॉकलेट भी वैश्विक मानकों की हो सकेंगी।
चॉकलेट के शौकीनों के लिए एक स्वास्थ्य पहलू भी है। डार्क चॉकलेट के शौकीन लोग अब कम कीमत पर उच्च गुणवत्ता वाली कोको सामग्री वाली चॉकलेट खरीद सकेंगे, जो स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर मानी जाती है।
इन समझौतों के तहत आयात शुल्क (Import Duty) को 50% से घटाकर शून्य से 20% के बीच लाया जा रहा है।
| चॉकलेट श्रेणी / ब्रांड | वर्तमान अनुमानित शुल्क | भविष्य का अनुमानित शुल्क | संभावित असर |
| स्विस चॉकलेट (Premium) | 30% - 50% | 0% - 15% | कीमतों में 15-20% की कमी |
| लग्जरी बेल्जियन चॉकलेट | 50% तक | 10% - 20% | ₹500 वाली चॉकलेट ₹400-420 तक मिल सकती है |
| प्रोसेस्ड कन्फेक्शनरी (Bars) | 40% - 50% | पूरी तरह समाप्त (0%) | मध्यम श्रेणी की चॉकलेट काफी सस्ती हों |
समझौते के तहत मुख्य रूप से निम्नलिखित देशों की मशहूर चॉकलेट्स सस्ती होंगी:
स्विट्जरलैंड (Switzerland): स्विस चॉकलेट्स जैसे लिंड्ट (Lindt) और टोब्लरॉन (Toblerone) के दाम सबसे ज्यादा गिर सकते हैं क्योंकि भारत ने EFTA देशों (स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टाइन) के साथ विशेष समझौता किया है।
बेल्जियम (Belgium): बेल्जियम अपनी लग्जरी चॉकलेट्स के लिए प्रसिद्ध है। यूरोपीय संघ के साथ हुए समझौते से बेल्जियम के ब्रांड्स की कीमतों में कमी आएगी।
जर्मनी और इटली (Germany & Italy): जर्मनी की किंडर (Kinder) और इटली की फेररो रोचर (Ferrero Rocher) जैसी ब्रांडेड चॉकलेट्स पर भी आयात शुल्क कम होगा।
बहरहाल,भारत का चॉकलेट बाजार दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है। चॉकलेट अब केवल बच्चों की पसंद नहीं रही, बल्कि गिफ्टिंग और प्रीमियम लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुकी है। यही कारण है कि भारत हर साल भारी मात्रा में विदेशों से चॉकलेट और कोको उत्पादों का आयात करता है।
Published on:
27 Jan 2026 04:17 pm

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