
India Export Crisis (AI Image)
India Export Crisis: भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है और चावल निर्यात में भी उसकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। लेकिन इस बार भारतीय खेतों से निकली फसलें विदेशी बंदरगाहों पर अटक रही हैं। पहले चीन ने भारतीय गैर-बासमती चावल की करीब 70 खेप लौटा दीं और अब जापान ने भारतीय आमों के आयात पर तत्काल रोक लगा दी है।
जापान ने भारतीय अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसे आमों के आयात को सस्पेंड करते हुए इसकी वजह भारत के वेपर हीट ट्रीटमेंट (डब्ल्यूएचटी) सेंटरों में गंभीर अनियमितताएं बताई हैं। यह सेंटर निर्यात से पहले आमों को फल मक्खियों जैसे कीटों से मुक्त करने का काम करते हैं। जापान अपनी घरेलू कृषि को बचाने के लिए इन आक्रामक कीटों के खिलाफ 'जीरो-टोलरेंस' नीति अपनाता है।
जापान के 'योकोहामा प्लांट प्रोटेक्शन एसोसिएशन' ने वहां के आयातकों को स्पष्ट निर्देश दे दिया है कि 25 मार्च, 2026 के बाद जारी किए गए भारतीय निरीक्षण प्रमाणपत्रों वाले किसी भी आम के शिपमेंट को जापानी बंदरगाहों पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह लगभग 20 साल में भारतीय आमों पर जापान द्वारा लगाया गया पहला बड़ा प्रतिबंध है। इससे पहले, जापान ने फल मक्खियों के संक्रमण के कारण ही भारतीय आमों पर प्रतिबंध लगाया था, जिसे भारत द्वारा अपनी उपचार और प्रमाणन प्रणालियों को अपग्रेड करने के बाद साल 2006 में हटाया गया था।
चीन ने भारतीय गैर-बासमती चावल की लगभग 70 खेपें लौटा दीं। चीनी अधिकारियों का दावा है कि इनमें ‘जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म’ यानी जीएमओ मौजूद हैं। भारत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि देश में कपास को छोड़कर किसी भी जीएम फसल की व्यावसायिक खेती की अनुमति नहीं है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) और जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रेजल कमेटी भी स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत में जीएम चावल उगाया ही नहीं जाता।
दिलचस्प है कि जिन शिपमेंट को चीन ने लौटाया, उनमें से कई को खुद चीनी सरकारी एजेंसी ‘चाइना सर्टिफिकेशन एंड इंस्पेक्शन ग्रुप’ के भारतीय कार्यालय ने पहले मंजूरी दी थी। इसे चीन का एक सुनियोजित कूटनीतिक व्यापारिक दबाव भी माना जा रहा है, जिसका लक्ष्य वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को कमजोर करना, कृषि साख को धूमिल करना, आगामी व्यापार वार्ताओं में भारत पर दबाव बनाकर बढ़त हासिल करना हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक बाजार में भारत की बढ़ती प्रतिस्पर्धा कई देशों को असहज कर रही है। ऐसे में तकनीकी नियम, गुणवत्ता जांच और आयात प्रतिबंध अब केवल स्वास्थ्य या सुरक्षा के मुद्दे नहीं रह गए, बल्कि व्यापारिक हथियार भी बनते जा रहे हैं। ऐसे में निर्यात केंद्रों की निगरानी, दस्तावेजीकरण की पारदर्शिता और कीट-नियंत्रण प्रक्रियाओं को और विश्वस्तरीय बनाना होगा।
इन प्रतिबंधों का सबसे बड़ा असर किसानों और निर्यातकों पर पड़ रहा है। महाराष्ट्र की अल्फांसो बेल्ट पहले ही एल नीनो, भीषण गर्मी और बेमौसम मौसम से जूझ रही है। कई इलाकों में 85 से 90 प्रतिशत तक फसल नुकसान का अनुमान है। ऐसे समय में जापान का प्रतिबंध किसानों के लिए दोहरी मार बन गया है। वहीं चीन की सख्ती के बाद भारतीय निर्यातकों ने करीब 200 कंटेनरों की खेप खुद ही रोक दी है।
Updated on:
30 May 2026, 2:15 AM IST
Published on:
30 May 2026, 2:15 AM IST
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