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Supreme Court: तारीख पर तारीख का खेल खत्म, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश- 3 महीने में सुनाने होंगे रिजर्व फैसले

Supreme Court Guideline: न्यायपालिका में देरी को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्टों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। अब रिजर्व फैसले तीन माह के भीतर सुनाने होंगे, जबकि जमानत मामलों में आदेश उसी दिन या अधिकतम अगले दिन जारी करना होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि जमानत मिलने पर आरोपी की रिहाई में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
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भारत

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Rahul Yadav

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Updated: 30 May 2026, 1:38 AM IST

Supreme Court Decision

Supreme Court Decision (Ai Image)

Supreme Court Decision: देश के हाईकोर्टों में मुकदमे की सुनवाई पूरी करने के बाद फैसले (रिजर्व रखे गए) के लिए तारीख पर तारीख का इंतजार नहीं करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने रिजर्व फैसले सुनाने में देरी पर चिंता जताते हुए हाईकोटों के लिए बाध्यकारी गाइडलाइन तय की है। इसके तहत हाईकोर्टों को रिजर्व फैसला तीन माह में सुनाना होगा। साथ ही जमानत आवेदनों पर सुनवाई के बाद उसी दिन या अधिकतम अगले दिन आदेश सुनाना होगा और वेबसाइट पर इसे अपलोड करना होगा।

जमानत मिलने वाले व्यक्ति को उसी दिन या अगले दिन जेल से छोड़ना अनिवार्य होगा। देश के चीफ जस्टिस (सीजेआइ) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने झारखंड हाईकोर्ट में आपराधिक अपीलों में सुनवाई के बाद दो-तीन साल तक फैसला लंबित रहने संबंधी केस की सुनवाई के बाद देश भर के लिए गाइडलाइन जारी की।

त्वरित न्याय के लिए विशेष शक्ति का उपयोग

बेंच ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत संपूर्ण न्याय के लिए मिली शक्ति का उपयोग करते हुए दिशा-निर्देश तय किए। बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट प्राथमिक संस्थाएं हैं जहां हजारों लोग प्रतिदिन राहत पाने के लिए आते हैं। निर्णयों में देरी न्यायपालिका में जनता के विश्वास को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। बेंच ने स्पष्ट किया कि यह निर्देश किसी भी जज या न्यायिक संस्था पर लांछन लगाने के लिए नहीं है।

ये दिशा निर्देश

  1. हाईकोर्ट निर्णय रिजर्व रखने के तीन माह में तर्कसंगत निर्णय सुनाने का प्रयास करेगा। व्यक्तिगत स्वतंत्रता, नियमित व अग्रिम जमानत के मामलों में ज्यादा तत्परता बरतें।
  2. जमानत मामलों में मानक तौर पर उसी दिन आदेश सुनाएं व अपलोड करें, यदि निर्णय रिजर्व है तो अगले दिन सुनाकर वेबसाइट पर अपलोड करें।
  3. जमानत देने या सजा निलंबन के आदेश सुनाने के बाद तत्काल जेल अधिकारियों को सूचित करें, संबंधित व्यक्ति उसी दिन या अधिकतम अगले दिन रिहा हो। अनुपालन रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश हो।
  4. यदि बेंच को विस्तृत व तर्कपूर्ण निर्णय सुनाने में देरी से दोनों पक्षों को कठिनाई है तो निर्णय का मुख्य भाग अदालत में सुनाकर विस्तृत निर्णय सात दिन या विशेष िस्थति में 15 दिन में वेबसाइट पर अपलोड हो।
  5. खुली अदालतों में सुनाया गया विस्तृत निर्णय 24 घंटे में वेबसाइट पर अपलोड हो।
  6. हाईकोर्ट वेबसाइट में जरूरी बदलाव करें। हर माह के अंत में चीफ जस्टिस को गोपनीय रिपोर्ट पेश हो जिसमें उस माह के सभी लंबित रिजर्व फैसलों का विवरण हो। जहां निर्णय दो माह से लंबित है इसकी सूचना संबंधित बेंच को भी दी जा सकती है।
  7. यदि तीन माह में रिजर्व निर्णय नहीं सुनाया जाता है, तो रजिस्ट्रार जनरल आदेश के लिए चीफ जस्टिस (सीजे) के सामने मामला रखेंगे। सीजे संबंधित बेंच को यह सूचित करेंगे। फिर भी दो सप्ताह में फैसला नहीं सुनाया जाए तो सीजे मामले को दोबारा सुनवाई के लिए अन्य बेंच को सौंप सकेंगे जो सुनवाई कर शीघ्र निर्णय सुनाए।
  8. यदि रिजर्व निर्णय तीन माह में नहीं सुनाया जाए तो मुकदमे के पक्षकार अर्जी दाखिल कर सकेंगे जिस पर दो दिन में सुनवाई होगी।
  9. यदि निर्णय रिजर्व रखने की तिथि से चार माह में नहीं सुनाया जाए तो मुकदमे के पक्षकार सीजे के समक्ष अन्य बेंच को मामला सौंपने का आवेदन कर सकेंगे।
  10. उच्च न्यायालयों को अपनी वेबसाइट पर यह भी दर्शाना होगा कि फैसला कब सुरक्षित रखा गया, मुख्य भाग कब सुनाया गया और तर्कयुक्त निर्णय कब अपलोड हुआ।
  11. हाईकोर्ट रजिस्ट्रार जनरल इन दिशा-निर्देशों को सीजे के समक्ष रखेंगे ताकि नियमों में जरूरी बदलाव किए जा सकें।