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भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष: चांसलर मर्ज की यात्रा और 66 हजार करोड़ की पनडुब्बी डील पर टिकी निगाहें

भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी की सिल्वर जुबली पर जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की पहली राजकीय यात्रा। जानें प्रधानमंत्री मोदी के साथ अहमदाबाद में होने वाली ₹66,000 करोड़ की ऐतिहासिक पनडुब्बी डील, रक्षा सहयोग और भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बारे में विस्तार से।

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India-Germany relations: भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी की सिल्वर जुबली ऐसे समय आ रही है जब वैश्विक शक्ति संतुलन तेज़ी से बदल रहा है। इसी संदर्भ में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज 12 और 13 जनवरी को भारत की पहली स्टेट विजिट पर आ रहे हैं। मर्ज का भारत को अपनी पहली आधिकारिक यात्रा के लिए चुनना यूरोप की भारत-केंद्रित रणनीति का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।

अहमदाबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में 25 वर्षों की साझेदारी की समीक्षा के साथ रक्षा सहयोग, वैश्विक सुरक्षा, व्यापार, तकनीक और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को आगे बढ़ाने पर फोकस रहेगा।

बैठक का मुख्य एजेंडा दोनों देशों के बीच 8 अरब डॉलर (करीब 66 हजार करोड़ रुपए) की पनडुब्बी डील रहेगी। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा समझौता हो सकता है। खास बात यह है कि पहली बार पनडुब्बी निर्माण पर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी इसमें शामिल होगा।

भारत में जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन पहले ही कह चुके हैं कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत जर्मनी के लिए 'केंद्रीय और भरोसेमंद साझेदार' बन चुका है। यह दौरा उसी सोच को औपचारिक रूप देने वाला माना जा रहा है।

अहमदाबाद-बेंगलूरुः मर्ज का कार्यक्रम

  • 12 जनवरीः अहमदाबाद-गांधीनगर
  • पीएम मोदी के साथ साबरमती आश्रम जाएंगे और अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में भाग लेंगे
  • गांधीनगर के महात्मा मंदिर में द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेंगे
  • 66 हजार करोड़ की पनडुब्बी डील, रक्षा सहयोग और एफटीए पर मंथन

13 जनवरीः बेंगलूरु

  • जर्मन उद्योग प्रतिनिधियों से संवाद
  • फार्मास्यूटिकल्स और रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की संभावना। सेंटर फॉर नैनो साइंस एंड इंजीनियरिंग का भी दौरा करेंगे।

25 साल की रणनीतिक साझेदारी: चार स्तंभ, साझा भविष्य

भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी चार प्रमुख स्तंभों पर मजबूती से खड़ी है

  • शांति व सुरक्षा: रक्षा सहयोग का विस्तार, संयुक्त सैन्य अभ्यास और इंडो-पैसिफिक में जर्मनी की सक्रिय भूमिका।
  • समृद्धि: भारत में करीब 2,000 जर्मन कंपनियां, 7.5 लाख से अधिक रोजगार और आपस में जुड़ी सप्लाई चेन।
  • विज्ञान-तकनीक: रिसर्च, इनोवेशन, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन टेक्नोलॉजी में गहरी भागीदारी।
  • जन-संपर्क: जर्मनी में 50–60 हजार भारतीय छात्र, जो वहां की उच्च शिक्षा और अर्थव्यवस्था की अहम ताकत हैं।
  • राजदूत एकरमैन के मुताबिक, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितताओं के दौर में भारत-जर्मनी की गहराती सप्लाई चेन साझेदारी भरोसे का प्रमाण है, जबकि प्रस्तावित भारत-ईयू एफटीए दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

व्यापारिक रिश्तों पर एक नजर

  • 23वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है भारत, जर्मनी का
  • 33.40 अरब डॉलरः कुल कारोबार 2024 में
  • 15.09 अरब डॉलरः भारत से जर्मनी को निर्यात
  • 18.31 अरब डॉलरः जर्मनी से भारत में आयात