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India-Germany relations: भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी की सिल्वर जुबली ऐसे समय आ रही है जब वैश्विक शक्ति संतुलन तेज़ी से बदल रहा है। इसी संदर्भ में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज 12 और 13 जनवरी को भारत की पहली स्टेट विजिट पर आ रहे हैं। मर्ज का भारत को अपनी पहली आधिकारिक यात्रा के लिए चुनना यूरोप की भारत-केंद्रित रणनीति का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।
अहमदाबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में 25 वर्षों की साझेदारी की समीक्षा के साथ रक्षा सहयोग, वैश्विक सुरक्षा, व्यापार, तकनीक और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को आगे बढ़ाने पर फोकस रहेगा।
बैठक का मुख्य एजेंडा दोनों देशों के बीच 8 अरब डॉलर (करीब 66 हजार करोड़ रुपए) की पनडुब्बी डील रहेगी। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा समझौता हो सकता है। खास बात यह है कि पहली बार पनडुब्बी निर्माण पर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी इसमें शामिल होगा।
भारत में जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन पहले ही कह चुके हैं कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत जर्मनी के लिए 'केंद्रीय और भरोसेमंद साझेदार' बन चुका है। यह दौरा उसी सोच को औपचारिक रूप देने वाला माना जा रहा है।
भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी चार प्रमुख स्तंभों पर मजबूती से खड़ी है
Updated on:
11 Jan 2026 05:55 am
Published on:
11 Jan 2026 05:54 am
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