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विचाराधीन कैदियों के कारण भरी पड़ी हैं देश की जेलें, 73% को कोर्ट फैसलों का इंतजार

NCRB prison report 2024: देश की जेलों में विचाराधीन कैदियों की संख्या बढ़ने से स्थिति गंभीर बनी हुई है। NCRB रिपोर्ट 2024 के अनुसार 73% कैदी अब भी कोर्ट के फैसलों का इंतजार कर रहे हैं।

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JAIL

Representational photo

Undertrial prisoners in India: देश की जेलों में भीड़भाड़ की स्थिति पिछले एक दशक में सबसे कम स्तर पर पहुंची है। इसके बावजूद देश की अधिकांश जेलें अभी भी अपनी क्षमता से अधिक कैदियों को रखने को मजबूर हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा ‘प्रिजन स्टैटिस्टिक्स 2024’ रिपोर्ट के अनुसार, जेलों में भीड़भाड़ की सबसे बड़ी वजह विचाराधीन कैदियों की बड़ी संख्या है। जेलों में कर्मचारियों की भारी कमी और क्षमता विस्तार की धीमी गति भी चिंता का विषय बनी हुई है:

भारत की जेलों की स्थिति (2024 के अंत तक)

क्रमविवरणआंकड़े
1देश में कुल जेलें1,333
2स्वीकृत क्षमतालगभग 4.53 लाख कैदी
3वास्तविक कैदी संख्या5.11 लाख से अधिक
4औसत अधिभोग दर (Occupancy Rate)112.7%
5अतिरिक्त बोझक्षमता से लगभग 13% अधिक कैदी

कैदियों को कोर्ट के आदेश का इंतजार

वर्ष 2024 में कुल कैदियों में विचाराधीन की हिस्सेदारी लगभग 73% रही। ये वे कैदी हैं जिन्हें कोर्ट ने अब तक दोषी या निर्दोष घोषित नहीं किया है। हालांकि, यह 2021 के 77% के रिकॉर्ड स्तर से कम है। दूसरी ओर, दोषी करार दिए जा चुके कैदियों की हिस्सेदारी 2016 के 32% से घटकर 2024 में 26.6% रह गई। दिल्ली और बिहार में सबसे ज्यादा विचाराधीन कैदी हैं, जहां जेलों में बंद कुल कैदियों में 87% से अधिक विचाराधीन हैं।

दिल्ली की जेलों में क्षमता से दोगुने कैदी

देश के आधे से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जेलें अभी भी अपनी क्षमता से अधिक कैदियों को रख रही हैं। दिल्ली में सबसे अधिक भीड़भाड़ दर्ज की गई। यह जेलों की ऑक्यूपेंसी दर 194% रही। यानी क्षमता से लगभग दोगुने कैदी जेलों में बंद थे। जम्मू-कश्मीर में ऑक्यूपेंसी दर 2015 के 78% से बढ़कर 2024 में 148% से अधिक हो गई। छत्तीसगढ़ में सुधार हुआ। यहां 2015 में जेलों की ऑक्यूपेंसी दर 234% थी, जो अब घटकर 127.6% रह गई है। यूपी में भी भीड़भाड़ के स्तर में कमी आई है।

जेल कर्मियों के पद भी खाली

संसदीय स्थायी समिति ने जेल कर्मचारियों की भारी कमी पर भी चिंता जताई है। जहां जेलों में भीड़भाड़ और विचाराधीन कैदियों की संख्या अधिक है, वहां कर्मचारियों के पद भी बड़ी संख्या में खाली पड़े हैं। दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में तो 60% से अधिक जेल कर्मियों के पद रिक्त हैं।

2024 में विचाराधीन (Undertrial) कैदियों की हिस्सेदारी

राज्य/केंद्र शासित प्रदेशविचाराधीन कैदियों का प्रतिशत
दिल्ली88.0%
बिहार87.2%
जम्मू-कश्मीर84.6%
गोवा84.4%
महाराष्ट्र80.8%
लद्दाख80.4%
पश्चिम बंगाल78.7%
पंजाब78.0%
ओडिशा77.5%
हरियाणा76.8%
कर्नाटक75.5%
राजस्थान74.8%
तेलंगाना73.8%
आंध्र प्रदेश72.6%

राष्ट्रीय औसत

  • भारत में कुल विचाराधीन कैदी (2024): 72.6%