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Undertrial prisoners in India: देश की जेलों में भीड़भाड़ की स्थिति पिछले एक दशक में सबसे कम स्तर पर पहुंची है। इसके बावजूद देश की अधिकांश जेलें अभी भी अपनी क्षमता से अधिक कैदियों को रखने को मजबूर हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा ‘प्रिजन स्टैटिस्टिक्स 2024’ रिपोर्ट के अनुसार, जेलों में भीड़भाड़ की सबसे बड़ी वजह विचाराधीन कैदियों की बड़ी संख्या है। जेलों में कर्मचारियों की भारी कमी और क्षमता विस्तार की धीमी गति भी चिंता का विषय बनी हुई है:
| क्रम | विवरण | आंकड़े |
|---|---|---|
| 1 | देश में कुल जेलें | 1,333 |
| 2 | स्वीकृत क्षमता | लगभग 4.53 लाख कैदी |
| 3 | वास्तविक कैदी संख्या | 5.11 लाख से अधिक |
| 4 | औसत अधिभोग दर (Occupancy Rate) | 112.7% |
| 5 | अतिरिक्त बोझ | क्षमता से लगभग 13% अधिक कैदी |
वर्ष 2024 में कुल कैदियों में विचाराधीन की हिस्सेदारी लगभग 73% रही। ये वे कैदी हैं जिन्हें कोर्ट ने अब तक दोषी या निर्दोष घोषित नहीं किया है। हालांकि, यह 2021 के 77% के रिकॉर्ड स्तर से कम है। दूसरी ओर, दोषी करार दिए जा चुके कैदियों की हिस्सेदारी 2016 के 32% से घटकर 2024 में 26.6% रह गई। दिल्ली और बिहार में सबसे ज्यादा विचाराधीन कैदी हैं, जहां जेलों में बंद कुल कैदियों में 87% से अधिक विचाराधीन हैं।
देश के आधे से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जेलें अभी भी अपनी क्षमता से अधिक कैदियों को रख रही हैं। दिल्ली में सबसे अधिक भीड़भाड़ दर्ज की गई। यह जेलों की ऑक्यूपेंसी दर 194% रही। यानी क्षमता से लगभग दोगुने कैदी जेलों में बंद थे। जम्मू-कश्मीर में ऑक्यूपेंसी दर 2015 के 78% से बढ़कर 2024 में 148% से अधिक हो गई। छत्तीसगढ़ में सुधार हुआ। यहां 2015 में जेलों की ऑक्यूपेंसी दर 234% थी, जो अब घटकर 127.6% रह गई है। यूपी में भी भीड़भाड़ के स्तर में कमी आई है।
संसदीय स्थायी समिति ने जेल कर्मचारियों की भारी कमी पर भी चिंता जताई है। जहां जेलों में भीड़भाड़ और विचाराधीन कैदियों की संख्या अधिक है, वहां कर्मचारियों के पद भी बड़ी संख्या में खाली पड़े हैं। दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में तो 60% से अधिक जेल कर्मियों के पद रिक्त हैं।
| राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | विचाराधीन कैदियों का प्रतिशत |
|---|---|
| दिल्ली | 88.0% |
| बिहार | 87.2% |
| जम्मू-कश्मीर | 84.6% |
| गोवा | 84.4% |
| महाराष्ट्र | 80.8% |
| लद्दाख | 80.4% |
| पश्चिम बंगाल | 78.7% |
| पंजाब | 78.0% |
| ओडिशा | 77.5% |
| हरियाणा | 76.8% |
| कर्नाटक | 75.5% |
| राजस्थान | 74.8% |
| तेलंगाना | 73.8% |
| आंध्र प्रदेश | 72.6% |
Published on:
03 Jun 2026 02:43 am
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